नप को मिलेगी पुराने जेल परिसर की जमीन
Updated at : 10 Aug 2018 6:21 AM (IST)
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फरवरी माह में अररिया पहुंचे सीएम को पत्र देकर नप को जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्य पार्षद ने लगायी थी गुहार मुख्य पार्षद ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार अररिया : समीक्षा यात्रा के प्रमंडलीय स्तरीय बैठक पूर्णिया में सीएम नीतीश कुमार के समक्ष मुख्य पार्षद ने शहर के अन्य समस्याओं के साथ, […]
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फरवरी माह में अररिया पहुंचे सीएम को पत्र देकर नप को जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्य पार्षद ने लगायी थी गुहार
मुख्य पार्षद ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
अररिया : समीक्षा यात्रा के प्रमंडलीय स्तरीय बैठक पूर्णिया में सीएम नीतीश कुमार के समक्ष मुख्य पार्षद ने शहर के अन्य समस्याओं के साथ, नप के पास भुमि की समस्या को दूर करने के लिए खाली पड़े पुराने जेल परिसर की जमीन को नप को उपलब्ध कराने को ले आवेदन दिया था. छह माह के बाद ही सही लेकिन मुख्य पार्षद के उक्त आवेदन पर सीएम के संयुक्त सचिव राकेश कुमार ने कार्यवाही किये जाने का पत्र मुख्य पार्षद रितेश कुमार को उपलब्ध कराया है.
दिये गये पत्र में मुख्यमंत्री सचिवालय के संयुक्त सचिव श्री कुमार ने मुख्य पार्षद को दिये गये पत्र में यह उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 8 फरवरी 2018 को पूर्णिया समाहरणालय में आहुत बैठक में मुख्य पार्षद के पत्र संख्या शून्य दिनांक 8 फरवरी के कार्यवाही को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग व गृह विभाग को भेजा गया था. पुन: 5 अगस्त 2018 को मुख्यमंत्री सचिवालय से एक पत्र गृह विभाग पटना व नगर विकास एवं आवास विभाग को निदेशानुसार यथोचित कार्रवाई के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गयी है.
जमीन के अभाव में नप को कार्य करने में होती है परेशानी
मुख्य पार्षद रितेश कुमार राय ने अपने कार्यकाल के शुरूआती दौर से ही पुराने पड़े जेल परिसर की जमीन नप को उपलब्ध कराने का प्रयास तेज किया था. उन्होंने डीएम हिमांशु शर्मा के समक्ष यह मामला उठाया भी था. डीएम ने भी अपनी मौन सहमति दे दी थी. लेकिन बाद में गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद यह मामला खटायी में पड़ गया था. लेकिन समीक्षा बैठक के दौरान एक बार इस मामले को मुख्य पार्षद ने पुन: मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया तो कुछ आसार नजर आने लगे हैं. इस आवेदन में मुख्य पार्षद ने कहा था कि वर्ष 1967 को अररिया नप का गठन हुआ. लेकिन इससे पूर्व ही वर्ष 1954 के सर्वे में नप की अधिकांश जमीन सरकारी भूमि या फिर जिला परिषद के अधीन चली गयी. जमीन के अभाव में छोटी-छोटी योजनाओं जैसे पब्लिक टॉयलेट आदि के लिए भी डीएम के हस्तातंरण की आस देखने पड़ती है. जमीन के अभाव में न तो नप का पास अपना बस स्टैंड है न ही फुटकर विक्रेताओं को व्यस्थित कर अतिक्रमण की समस्या को मुक्ति दिलाने का कोई ठोस विकल्प ही. जेल परिसर की 7.5 एकड़ की जमीन जो कि शहर के मध्य में स्थित है अगर नप को मिल जाये तो ऑटो व रिक्शा स्टैंड, फुटकर विक्रेताओं के लिए स्थान के साथ एक मार्केट का निर्माण नप करा सकता है.
कहते हैं मुख्य पार्षद
मुख्य पार्षद रितेश कुमार राय ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सचिवालय से प्राप्त पत्र को देखते हुए यह प्रतीत होता है कि सीएम ने उनके द्वारा रखे गये मांग को संजीदा से लिया है. अगर उनके प्रयास से पुराने जेल परिसर की जमीन अगर नप को मिल जाती है तो यह नगर परिषद के लिए मील का पत्थर साबित होगा.
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