Durga Ji Ki Aarti | Durga Aarti: गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 20260से शुरू हो गई है. गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा की आरती का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इस दौरान श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से साधक को माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है आइए, मां जगदंबे की दिव्य आरती का पाठ कर जीवन में सुख-शांति और शक्ति प्राप्त करें।आरती के समय उसे जोर-जोर से गाकर पढ़ना चाहिए. यहां पढ़ें मां दुर्गा की आरती के पूरे लिरिक्स और जानें कैसे करें इसे विधिपूर्वक.
मां अंबे जी की आरती (Jai Ambe Gauri Aarti)
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से है बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली, दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता। पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली, दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना। हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली, सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली। वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
मैया भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली, भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती, हम सब उतारे तेरी आरती॥
ये भी पढ़ें: 30 सितंबर या 1 अक्तूबर, शारदीय नवरात्रि पर इस दिन करें कन्या पूजन, सभी तीर्थों से बढ़कर है कुमारी पूजा
