Durga Ji Ki Aarti: दुर्गा जी की आरती करने का कोई एक तय समय नहीं होता. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह और शाम दोनों समय आरती करना शुभ माना जाता है. सुबह की आरती दिन की शुरुआत अच्छे विचारों और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करती है, जबकि शाम की आरती मन को शांति देती है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है। नवरात्रि में सुबह और शाम दोनों समय आरती करने से विशेष फल मिलता है.
दुर्गा जी की आरती करने का शुभ समय
धार्मिक परंपराओं के अनुसार आरती के ये समय अच्छे माने जाते हैं:
सुबह (ब्रह्म मुहूर्त)
इस समय आरती करने से मन शांत रहता है और दिन अच्छा गुजरता है.
शाम (संध्याकाल)
सूर्यास्त के बाद आरती करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस समय देवी की कृपा जल्दी मिलती है.
नवरात्रि में
नवरात्रि के दिनों में सुबह और शाम दोनों समय आरती करना बहुत लाभकारी माना जाता है.
आरती में क्या-क्या होना चाहिए?
आरती की थाली में ये चीजें रखें
- दीपक: गाय के घी का दीपक
- रोली और चावल: तिलक के लिए
- धूप या अगरबत्ती: पूजा की खुशबू के लिए
- फूल: लाल या पीले फूल, जैसे गुलाब या गुड़हल
- कपूर: आरती के अंत में
- घंटी या शंख: पूजा के समय बजाने के लिए
- जल: साफ पानी
मां दुर्गा को कौन-सा प्रसाद चढ़ाएं?
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माँ दुर्गा को ये प्रसाद बहुत प्रिय माने जाते हैं:
- खीर और हलवा
- पंचमेवा: बादाम, काजू, किशमिश, मखाना और छुहारे
- फल: सेब और अनार
- मिठाई: बताशे या नारियल की मिठाई
- नारियल: इसे बहुत शुभ माना जाता है
- आरती करते समय ध्यान रखने वाली बातें
- मन शांत रखें और पूरे मन से पूजा करें
- पूजा के समय गुस्सा या बुरे विचार न रखें
- सच्ची श्रद्धा से की गई आरती जरूर फल देती है
दुर्गा जी की आरती सुबह, शाम या ब्रह्म मुहूर्त—किसी भी समय की जा सकती है। सबसे जरूरी है भक्ति, साफ मन और विश्वास। इसी से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है.
