Ratha Saptami 2026: रथ सप्तमी का पर्व सूर्य देव को समर्पित है. वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 25 जनवरी को मनाया जाएगा. मान्यता है कि इसी दिन भगवान सूर्य अपने रथ पर सवार होकर उत्तर दिशा की यात्रा प्रारंभ करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ सप्तमी के दिन विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा और आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही व्यक्ति को रोग, शोक और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है.
सूर्य देव की आरती
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥
सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दुःखहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥
सुर-मुनि-भूसुर-वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥
सकल-सुकर्म-प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥
कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥
नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥
सूर्य देव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन॥
सूर्य देव की आरती का महत्व
रथ सप्तमी के दिन सूर्य देव की आरती करने से उनके तेज, शक्ति और कृपा की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्य देव की आरती करने से नेत्र रोग, त्वचा संबंधी समस्याएं और कमजोर आत्मबल जैसी परेशानियों से राहत मिलती है.
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