सीरिया में विद्रोहियों का डंका, क्या 60 लाख विस्थापितों की होगी घर वापसी?

Syria Civil War : सीरिया में 13 साल से गृहयुद्ध जारी है और इसमें अबतक 4 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लोकतंत्र की मांग से शुरू हुुआ यह युद्ध अब कई मसलों में बंट चुका है, जिसमें शिया–सुन्नी विवाद भी शामिल है. सीरिया की लगभग 90% आबादी मुसलमानों की है, जिसमें सुन्नी 74 और शिया करीब 15 प्रतिशत है बाकी कुर्द, तुर्कमेन, सर्कसियन और फिलिस्तीनी हैं .

Syria Civil War : इजरायल और लेबनान के बीच 27 नवंबर को सीज फायर की घोषणा ��ुई, तो लगा कि अब कुछ दिनों तक मीडिल-ईस्ट एशिया में शांति रहेगी. लेकिन सीरिया के गृहयुद्ध ने इस अनुमान को गलत साबित कर दिया है. सीरिया में विद्रोहियों ने हालिया विद्रोह में सीरिया के प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है जिसमें हामा और अलेप्पो जैसे शहर शामिल हैं और बहुत संभव है कि वे होम्स पर कब्जा करके राजधानी दमिश्क की ओर बढ़ेंगे.

सीरिया में गृहयुद्ध की वजह क्या है? 

लोकतंत्र की मांग से शुरू हुआ था सीरिया का गृहयुद्ध

सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत 2011 में लोकतंत्र की मांग को लेकर हुई थी. सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद एक अधिनायकवादी राष्ट्रपति हैं, जिसकी वजह से वहां हमेशा ही मानवाधिकारों के हनन की बात उठती रहती है. 2010 के अरब स्प्रिंग यानी सरकारों में बदलाव से प्रभावित होकर सीरिया में लोगों ने लोकतंत्र की मांग करते हुए विरोध-प्रदर्शन शुरू किया था, लेकिन जब सरकार ने इन प्रदर्शनों को क्रूरतापूर्वक दबाया तो वह धीरे-धीरे हिंसक होकर पूर्ण युद्ध में बदल गया और आज भी यह युद्ध जारी है. दारा शहर में ही सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई थी और यहां क्रूरता पूर्वक प्रदर्शन को दबाया गया था, जिसमें हजारों की जान गई थी.  हालांकि सीरिया का गृहयुद्ध अब मात्र लोकतंत्र के समर्थन में किया जा रहा युद्ध नहीं रहा है, इसमें शिया-सुन्नी विवाद भी शामिल हो गया है.

  • सीरिया में पिछले 13 साल से गृहयुद्ध जारी है.
  • सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत लोकतंत्र की मांग को लेकर हुई थी.
  • सीरिया की सरकार को ईरान और रूस का समर्थन प्राप्त है.
  • सीरिया के गृहयुद्ध में अबतक 4 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई है.
  • सीरिया के युद्ध से सबसे ज्यादा शरणार्थी बने हैं, जिनकी संख्या 60 लाख से अधिक है.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

सीरिया में गृहयुद्ध की वर्तमान स्थिति क्या है ?

सीरिया के लाखों विस्थापित दूसरे देश में टेंट में रहने को मजबूर हैं.

सीरिया के गृहयुद्ध में अब पक्ष और विपक्ष दोनों को ही बाहरी शक्तियों का समर्थन प्राप्त है. सरकार को जहां रूस और ईरान से समर्थन मिलता है वहीं विद्रोहियों को अमेरिका का सहयोग मिलता है. सीरिया के गृहयुद्ध में अबतक 4 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है वहीं 60 लाख से अधिक विस्थापित हो चुके हैं. हालिया विद्रोह नवंबर 2024 से शुरू हुआ है जिसमें विद्रोहियों ने उत्तर-पश्चिम सीरिया में बड़े हमले की शुरुआत की और कई बड़े इलाकों पर अपना कब्जा कर लिया है. विद्रोहियों ने 70 से अधिक स्थानों पर कब्जा किया है जिसमें अलेप्पो और हामा जैसे शहर भी शामिल हैं और अब उनकी नजर होम्स और दमिश्क पर है.

विद्रोही अगर दमिश्क पर कब्जा कर लेंगे तो क्या होगा? 

सीरिया के विद्रोही हामा पर कब्जा करने के बाद होम्स की ओर बढ़ चले हैं, अगर वे होम्स पर कब्जा करने में सफल रहे तो बशर अल-असद के लिए बड़ी क्षति होगी. होम्स का सीरिया में काफी महत्व है और यह शहर विद्रोहियों को दमिश्क तक पहुंचाने में मदद करेगा. हामा शहर को जब विद्रोहियों ने अपने कब्जे में लिया तो इसे असद के शासन से मुक्ति के रूप में देखा गया. रूस और ईरान अपने-अपने युद्ध में व्यस्त हैं, जिसकी वजह से असद को उनका पूरा समर्थन नहीं मिल पा रहा है और विद्रोही मजबूत हो गए हैं. संभव है कि यह विद्रोह सीरिया में शासन के नए स्वरूप की स्थापना कर दे. लेकिन यह बहुत आसान भी नहीं है क्योंकि अब इस युद्ध के कई स्वरूप हो चुके हैं.

Also Read : Integration of 565 Princely States 4: भोपाल के नवाब को चाहिए था पाकिस्तान का साथ, सरदार पटेल को लिखा था ये पत्र

 Integration of 565 Princely States 2 : हैदराबाद के निजाम के शागिर्द ने पटेल से कहा था सरदार होंगे आप दिल्ली के… ऐसे टूटा घमंड

Motion of no confidence : बिना सरकार के फ्रांस, कौन संभालेगा राज?

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >