Putin India Visit : रहस्यों के साये में लिपटा है पुतिन का जीवन, बेटियों पर नहीं करते हैं बात; कभी खुफिया एजेंसी में करते थे काम

Putin India Visit : व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति हैं. उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी के साथ काम किया था. उन्होंने मार्शल आर्ट्‌स की ट्रेनिंग ली है और उनका बचपन काफी गरीबी में गुजरा है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को अगर आप समझना चाहें, तो हमें ऐसी ही मोटी-मोटी जानकारियां मिलती हैं. विस्तार से यह पता नहीं चलता है कि पुतिन का जीवन कैसा था और उनके जीवन में क्या-क्या हुआ.

Putin India Visit : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत यात्रा पर 4-5 दिसंबर को भारत में रहेंगे. भारत और रूस की दोस्ती इस यात्रा से और मजबूत होगी ऐसी उम्मीद दोनों देशों को है. इस यात्रा के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे.वे 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे.पुतिन का भारत दौरा स्पेशल और प्रिविलेज्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को दिखाता है. दोनों देश रक्षा मुद्दों पर भी बातचीत करेंगे और संभव है कि कुछ अहम समझौते हों. भारत और रूस की दोस्ती कई दशकों से कायम है और दोनों देश इस दोस्ती को और बेहतर बनाने में जुटे रहते हैं. संभव है कि पुतिन की इस यात्रा के बाद दोस्ती की कोई और मिसाल कायम हो.

रूस में राष्ट्रपति के तौर पर पुतिन 2012 से पद संभाल रहे हैं, उसके पहले वे 2008 से 2012 तक रूस के राष्ट्रपति रहे थे.पुतिन की गिनती एक बेहतरीन प्रशासक के तौर पर होती है, लेकिन उनकी निजी जिंदगी पर बहुत कम ही चर्चा होती है और लिखा भी बहुत कम जाता है. वे खुद भी अपने परिवार के बारे में ज्यादा बात नहीं करते. पुष्ट स्रोतों से जो जानकारी सामने आती है उसके अनुसार पुतिन के जीवन में झांका जाए तो वे दो बेटियों के पिता हैं.

क्या सोवियत नेवी के कर्मचारी के बेटे हैं पुतिन?

व्लादिमीर पुतिन का जीवन

व्लादिमीर पुतिन के निजी जीवन की जानकारी बहुत सीमित है, लेकिन उनके पिता व्लादिमीर स्पिरिदोनोविच पुतिन के बारे में यह जानकारी उपलब्ध है कि वे सोवियत नेवी के कर्मचारी थे. वहीं उनकी माता मारिया इवानोव्ना शेलोमोवा एक कारखाने में काम करती थी. पुतिन ने लेनिनग्राद के राजकीय यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री हासिल की थी और उसके बाद उन्होंने सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी के साथ काम करना शुरू कर दिया था. सोवियत रूस के विघटन यानी 1991 तक वे केजीबी के साथ कार्यरत थे.

क्या पुतिन ने एक एयर होस्टेस से की है शादी?

रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बारे में जितनी पुष्ट जानकारियां सामने आती हैं उनके अनुसार उन्होंने कैलिनिनग्राद में जन्मीं एक एयर होस्टेस ल्यूडमिला ष्क्रेबनेवा (Lyudmila Skrebneva) से शादी की थी. 1983 में हुई यह शादी 2013 में टूट गई थी और आज की तारीख में पुतिन सिंगल हैं. लेकिन जब पुतिन और ल्यूडमिला शादीशुदा थे, उस वक्त भी वो काफी कम सामने आती थीं और गोपनीयता का खास ख्याल रखती थीं. ऐसा उनकी और उनकी बेटियों की सुरक्षा के लिए किया जाता था.

दो बेटियों के पिता हैं पुतिन?

पुतिन अपने परिवार के बारे में बहुत कम बात करते हैं, लेकिन 2015 में जब उनसे एक संवाददाता सम्मेलन में बेटियों के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने यह बताया था कि उनकी बेटियां रूस में है और वहीं शिक्षित भी हुई हैं. उन्होंने यह कहा था कि मैं अपने परिवार के बारे में किसी से बात नहीं करता हूं. उनकी बेटियां कहां और कहां पढ़ती हैं, क्या करती हैं, इस तरह की जानकारी बहुत कम ही सामने आती है. सुरक्षा के हवाला देते हुए पुतिन अपनी बेटियों के बारे में भी कुछ नहीं कहते हैं. उनकी बेटियों का नाम कैटरीना तिखोनोवा और मारिया वोरोन्त्सोवा है. मारिया का जन्म 1985 में हुआ है और उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान और मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी से चिकित्सा की पढ़ाई की.

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रहस्य के साए में क्यों हैं पुतिन पैलेस?

रूस के राष्ट्रपति पुतिन का जीवन जितना रहस्यमयी है, उतने ही राज उनके पैलेस में छुपे हैं. हालांकि पुतिन इस बात से इनकार करते हैं कि उनका कोई इस तरह का घर भी है, लेकिन जो जानकारियां सार्वजनिक प्लेटफाॅर्म पर आती हैं उसके अनुसार तो यह साबित होता है कि पुतिन पैलेस उनका ही मकान है. कहा जाता है कि इस महल को नो फ्लाइंग जोन मं रखा गया है. वहां ड्रोन उड़ाना भी मना है. महल के नीचे बंकर बना है, मुसीबत या आक्रमण के समय पुतिन इस रास्ते से बाहर निकल सकते हैं.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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