खाड़ी देशों में नागरिकों से ज्यादा विदेशी, जानिए क्यों बसे हैं 90 लाख भारतीय ?

Gulf Cooperation Council : छह गल्फ कंट्री के संगठन को जीसीसी कहा जाता है. इस संगठन का उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में परस्पर सहयोग बढ़ाना और आर्थिक विकास करना है. इन देशों की कुल आबादी में नागरिकों से ज्यादा विदेशियों की संख्या है. कतर तो एक ऐसा देश है, जहां की 87.9% आबादी विदेशियों की है.

Gulf Cooperation Council : ईरान में जारी युद्ध के बाद से खाड़ी देशों यानी गल्फ कंट्रीज की खूब चर्चा हो रही है. गौर करने वाली बात यह है कि प्रवासी भारतीयों की 25% आबादी से अधिक इन गल्फ कंट्रीज में रहती है. सबसे अधिक प्रवासी भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं और इनकी कुल आबादी लगभग 40 लाख के करीब बताई जाती है.

किसे कहा जाता है गल्फ कंट्री जो GCC के सदस्य हैं?

फारस की खाड़ी के आसपास स्थित छह देशों को गल्फ कंट्री या खाड़ी देश कहा जाता है. इनमें शामिल हैं–बहरीन,कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, सउदी अरब और कतर. ये छह देश जीसीसी (Gulf Cooperation Council) के सदस्य हैं. इस कौंसिल का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है. जीसीसी की स्थापना 25 मई 1981 को हुई है, इसका मुख्यालय रियाद सऊदी अरब में है.

खाड़ी देशों में इतने भारतीय क्यों रहते हैं?

खाड़ी देशों में भारतीयों की आबादी

खाड़ी देशों में भारतीयों की एक बड़ी आबादी रोजगार के लिए जाती है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं. इनके वहां जाने की वजह है रोजगार की उपलब्धता और बेहतर वेतन. 1970 के दशक में जब इन देशों में तेल की खोज हुई और निर्यात में तेजी आई तो इन देशों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य की जरूरत पड़ी ताकि सड़क, बंदरगाह और अन्य जरूरी निर्माण कार्य कराए जा सकें, लेकिन इन देशों की आबादी बहुत कम थी,तब इन्होंने बाहर दे श्रमिक बुलाया और उसी दौरान भारत से बेहतर वेतन की चाह में मजदूर गए. बाद में स्वास्थ्य, होटल और आईटी सेक्टर में भी काम करने के लिए भारत से लोग खाड़ी देशों में गए. खाड़ी देशों में वेतन अन्य देशों की अपेक्षा ज्यादा मिलता है और यहां आय पर टैक्स नहीं देना पड़ता है, इस वजह से भारतीय खाड़ी देशों में नौकरी करना पसंद करते हैं.

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खाड़ी देशों में कितने भारतीय रहते हैं?

खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं. इनकी संख्या सबसे अधिक संयुक्त अरब अमीरात में है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात में 3419875 प्रवासी भारतीय और कुल 3425144 भारतीय रहते हैं. सऊदी अरब में प्रवासी भारतीयों की संख्या 2592166 है, जबकि कुल भारतीयों की संख्या 2594947 है.

गल्फ देशों में नागरिक से ज्यादा रहते हैं विदेशी

खाड़ी देशों की जनसंख्या का अनुपात

गल्फ देशों की खासियत यह है कि यहां की कुल आबादी में नागरिकों से ज्यादा संख्या विदेशियों की है, जो यहां रोजगार की तलाश में आते हैं. खाड़ी देशों में कतर एक ऐसा देश है, जहां नागरिकों की संख्या मात्र 12.1 प्रतिशत है और विदेशी यहां 87.9 प्रतिशत रहते हैं. दूसरे स्थान पर संयुक्त अरब अमीरात है जहां नागरिक 12.9 प्रतिशत और विदेशी 87.1 प्रतिशत रहते हैं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

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रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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