Economic Survey 2025–26 : जंकफूड फैला रहा मोटापा, स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ रही हैं चुनौतियां

Economic Survey 2025–26 : आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. सर्वेक्षण में यह बताया गया है कि मोटापा, देश के सामने एक चुनौती बनकर खड़ा है. इसे रोकने के लिए आम लोगों की जीवनशैली और खानपान में परिवर्तन करने की जरूरत है. अन्यथा मोटापा भारतीय बच्चों को अपने कब्जे में ले लेगा.

Economic Survey 2025–26 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2025–26 का आर्थिक सर्वेक्षण गुरुवार को संसद में पेश किया. इस सर्वेक्षण में देश की आर्थिक स्थिति की बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है, साथ ही भविष्य की योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया है. आर्थिक सर्वे में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति और चुनौतियों के बारे में भी विस्तृत चर्चा की गई है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य हमारे सामने उभर कर आते हैं.

आयुष्मान भारत ने बदला का स्वास्थ्य क्षेत्र

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि देश गंभीर स्वास्थ्य संक्रमण के दौर से गुजर रहा है. इस दौर में कई उपलब्धियां सामने हैं, तो कई चुनौतियां भी साफ नजर आ रही हैं. आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार ने इलाज को तो आसान कराया ही है, बीमारी को रोकने की कोशिश भी शुरू की है. इसी सोच के साथ देशभर में आयुष्मान आरोग्य मंदिर विकसित किए, जो मुफ्त इलाज और जांच उपलब्ध कराता है. आयुष्मान भारत भारत जन आरोग्य योजना के तहत गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो पा रहा है. अबतक 42.78 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं और 10.98 करोड़ अस्पताल में भर्ती हुए हैं. इस कार्ड का लाभ लेने वालों में 49 प्रतिशत महिलाएं हैं. इस कार्ड के तहत 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक भी रजिस्टर हुए हैं.

स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ने से बेहतर हुआ इलाज

आर्थिक सर्वेक्षण में यह बताया गया है कि देश में स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या लगातार बढ़ी है. इसका फायदा यह मिला है कि आम लोगों को इलाज सुलभ हुआ है. हेल्थ सेंटर पर इलाज के लिए आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. 1.82 एएनएम कार्यरत हैं, इनकी मदद से 1.51 लाख केंद्रों पर कई तरह की सेवाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें काफी विस्तार दिया गया है. टेली मेडिसीन के जरिए 42 करोड़ लोगों को चिकित्सा सलाह दी जा चुकी है. आर्थिक सर्वेक्षण यह बताता है कि चिकित्सा सुविधाएं अब काफी विस्तार पा चुकी हैं और आम और गरीब लोगों तक इसकी पहुंच हो गई है. राज्यों को लगभग 3.78 लाख स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें सामान्य चिकित्सक, विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सें और एएनएम शामिल हैं.

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मोटापा बना बड़ी चुनौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले के प्राचीर से यह कहा था कि मोटापा भारत के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने इस मुद्दे को लेकर अपनी चिंता जताई थी और यह भी कहा था कि हर परिवार को यह तय करना चाहिए कि वे मोटापे के खिलाफ जंग लड़ेंगे. आर्थिक सर्वेक्षण में भी देश में मोटापे को लेकर बढ़ती समस्या पर फोकस किया गया है. सर्वे में बताया गया है कि NFHS के अनुसार लगभग 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट हैं. बच्चों में भी मोटापा तेजी से बढ़ा है. जंक फूड और जीवनशैली इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है. आर्थिक सर्वेक्षण में इस संस्कृति के विस्तार को रोकने और सही जीवनशैली और खानपान के विस्तार की जरूरत को समझा गया है और उनके प्रचार की बात भी कही गई है, क्योंकि जंक फूड आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों और बच्चों को खासकर आकर्षित करते हैं. इनके पैकेट पर यह चेतावनी भी नहीं होती है कि वे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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