क्या आपको याद है चरखी दादरी की दुर्घटना, जिसमें हुई थी दो विमानों में टक्कर और 349 मौत

Charkhi Dadri : चरखी दादरी का विमान दुर्घटना विमानन क्षेत्र में आए कई बड़े परिवर्तनों के लिए याद किया जाता है. यह दुर्घटना इतनी भयावह थी कि दोनों विमान पर सवार कुल 349 लोगों की मौत हो गई थी. यह दुर्घटना आसमान में 14000 फीट की ऊंचाई पर दो विमानों के टकराने से हुई थी.

Charkhi Dadri : दिल्ली से 100 किलोमीटर की दूरी पर हरियाणा में स्थित है चरखी दादरी. 12 नवंबर 1996 को शाम 6:40 का समय हो रहा था, लोग अपने खेतों में काम खत्म कर रहे थे, अचानक उन्होंने तेज आवाज सुनी और शायद देखा कि आसमान से आग के गोले बरस रहे हैं, कुछ देर में चारों तरह धुआं ही धुआं था. इस दृश्य की वजह थी हवा में दो विमान का 10 से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर टक्कर हो जाना.

कैसे हुई थी टक्कर दो विमानों के बीच टक्कर

चरखी दादरी में हुई विमान दुर्घटना इतिहास में घटित सबसे भयंकर विमान दुर्घटनाओं में से एक है. इस दुर्घटना में Mid-Air Collision हुआ था, जब दो विमान आपस में टकरा गए थे. जिन विमानों में टक्कर हुई थी वे हैं- सऊदी अरब एयरलाइंस फ्लाइट 763 (Saudi Arabian Airlines Flight 763) बोइंग 747-168B. यह विमान दिल्ली से सऊदी अरब की ओर जा रहा था. इस विमान पर 312 यात्री क्रू मेंबर्स शामिल थे. दूसरा विमान कजाकिस्तान एयरलाइंस का था. फ्लाइट 1907 (Kazakhstan Airlines Flight 1907). यह विमान कजाकिस्तान से दिल्ली आ रहा था. इस विमान पर 37 यात्री और क्रू मेंबर्स सवार थे. इस दुर्घटना में दोनों विमान पर सवार सभी 349 व्यक्ति मारे गए थे. टक्कर की वजह यह थी कि दोनों विमान एक ही ऊंचाई पर गए थे.

कैसे और क्यों हुआ था एक्सीडेंट

चरखी दादरी विमान दुर्घटना के बारे में यह कहा जाता है कि यह कम्युनिकेशन में गलती होने की वजह से हुआ था.दिल्ली एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने कजाकिस्तान के विमान को 15,000 फीट पर आने का निर्देश दिया और उससे यह कहा था कि वह 14,000 फीट की ऊंचाई तक ही विमान को रखे, लेकिन पायलट ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देश को समझ नहीं सका और 14,000 फीट से नीचे गया. इसी वजह से दो विमान एक ऊंचाई पर आ गए और उनके बीच सीधी टक्कर हो गई.

भाषा की समस्या भी बनी थी दुर्घटना की वजह

चरखी दादरी विमान दुर्घटना से पहले विमानन क्षेत्र के लोगों के लिए पूरी दुनिया में अंग्रेजी का ज्ञान अनिवार्य नहीं था, लेकिन इस दुर्घटना से उसे अनिवार्य बना दिया. दरअसल हुआ यह था कि कजाकिस्तान एयरलाइंस के पायलट और को पायलट रूसी भाषा में बात कर रहे थे. दिल्ली एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लोगों के लिए उनसे अंग्रेजी में संपर्क बनाना संभव नहीं हो रहा था, जिसकी वजह से कुछ भ्रम की स्थिति बनी और एक भयंकर आकाशीय विमान दुर्घटना घटी, जिसने पूरी दुनिया को सुरक्षा के मानकों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया.

दुर्घटना के बाद क्या हुए बड़े बदलाव

चरखी दादरी में हुई दुर्घटना के बाद पूरी दुनिया के एविशन इंडस्ट्री में बड़े बदलाव किए गए. भारत में TCAS (Traffic Collision Avoidance System) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया. यह एक ऐसा सुरक्षा उपकरण है जो पायलट को इस बात की जानकारी देता है कि उसके आस-पास दूसरा कोई विमान है, ताकि हवा में टक्कर से बचा जा सके. चूंकि दुर्घटना के लिए भाषा को भी जिम्मेदार माना गया था इसलिए एविशन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए अंग्रेजी का ज्ञान अनिवार्य किया गया. खासकर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के लिए. भारतीय एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम का आधुनिकीकरण किया गया, साथ ही यह नियम भी बनाया गया कि कोई दो नियम एक ऊंचाई पर उड़ान नहीं भरेंगे.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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