बोरिया तो छोड़ जाते...!

Updated at : 01 Jul 2016 12:28 AM (IST)
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बोरिया तो छोड़ जाते...!

डॉ सुरेश कांत वरिष्ठ व्यंग्यकार यह साल बिग एग्जिट्स यानी महाभिनिष्क्रमणों का है. महाभिनिष्क्रमण यानी खाली-पीली निष्क्रमण नहीं, बल्कि ‘महा’ और ‘अभि’ के बोरिया-बिस्तर समेत इस तरह से बाहर निकल जाना कि लोग सोचते ही रह जायें कि यह क्या हुआ! और फिर सोचते-सोचते गाने पर मजबूर हो जायें कि तेरा जाना… दिल के अरमानों […]

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डॉ सुरेश कांत

वरिष्ठ व्यंग्यकार

यह साल बिग एग्जिट्स यानी महाभिनिष्क्रमणों का है. महाभिनिष्क्रमण यानी खाली-पीली निष्क्रमण नहीं, बल्कि ‘महा’ और ‘अभि’ के बोरिया-बिस्तर समेत इस तरह से बाहर निकल जाना कि लोग सोचते ही रह जायें कि यह क्या हुआ! और फिर सोचते-सोचते गाने पर मजबूर हो जायें कि तेरा जाना… दिल के अरमानों का लुट जाना! गालिब होते तो अपने एक शेर को कुछ यों कहते- थी खबर गर्म उनके जाने की, आज घर से बोरिया भी गया. मानो कह रहे हों कि जाना था तो चले जाते, पर बोरिया तो छोड़ जाते.

पहला महाभिनिष्क्रमण रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन का रहा, जिन्होंने अंतत: घोषित कर दिया कि वे वापस अध्यापन की दुनिया में लौट जायेंगे. हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि अगर सुब्रमण्यम स्वामी उनके पीछे न पड़े होते, तो भी क्या वे यही करते. स्वामी भी उनके पीछे ऐसे पड़े, और कुछ अन्य अधिकारियों के पीछे भी, कि लोग यह समझ कर कि ये शायद दबंगों द्वारा जबरन कब्जाये हुए मकान-दुकान खाली कराने का काम करते हैं, उनसे यही सेवा लेने की सोचने लगे.

राजन के बाद इडियोसिंक्रेटिक जापानी टेलीकॉम-कंपनी सॉफ्टबैंक के दूसरे सबसे बड़े अधिकारी निकेश अरोड़ा अचानक कंपनी को टाटा-बायबाय कर गये. उन्होंने इतना ही तब चौंकाया था, जब दो साल पहले वे गूगल के मुख्य व्यवसाय अधिकारी का पद छोड़ कर सॉफ्टबैंक में आये थे. इसके बाद मल्टी-बिजनेस कैंग्लोमरेट आइटीसी के बीस साल तक अध्यक्ष रहे योगी देवेश्वर, आनंद बाजार पत्रिका यानी एबीपी मीडिया ग्रुप के संपादक व मालिक अवीक सरकार और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन का महाभिनिष्क्रमण सामने आया.

पर सबसे अनोखा महाभिनिष्क्रमण रहा ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से, जिसे ब्रिटेन और एग्जिट को मिला कर ‘ब्रेग्जिट’ नाम दिया गया. कभी ‘बांटो और राज करो’ की नीति पर चलनेवाला देश इस मामले में खुद ही बंट गया. हमने जिस ब्रिटिश-राज से आधी रात को आजादी पायी थी, वह दिन चढ़े इयू से आजादी का जश्न मनाता दिखा. कभी हमने अंगरेजों से कहा था कि अंगरेजों, भारत छोड़ो, अब अंगरेजों ने यूरोप से कह दिया कि यूरोपियों, हम तुम्हें छोड़ते हैं!

कहते हैं कि अंगरेजों ने प्रवासियों की बढ़ती संख्या से डर कर ऐसा किया. तो क्या अब उनकी प्रवासियों से ‘गॉड सेव द क्वीन’ सुनने में रुचि नहीं रही? बेलारूसियों द्वारा होटल और भारतीयों द्वारा किराने की दुकानें चलाते देख शायद इंग्लैडर डर गये कि वे अब लहरों पर राज नहीं कर पायेंगे. ब्रेग्जिट से सारे अंगरेज खुश नहीं हैं. करीब आधे अंगरेज ‘यूनियन’ के अभाव में ‘जैक’ यानी गधे का-सा अनुभव कर रहे हैं.

ब्रिटेन भले ही अपने भव्य एकाकीपन का जश्न मना रहा हो, लेकिन क्या युवा अंगरेजों को यूरोपीय स्टाइल के नूवेल कूजिन का स्वाद ले चुकने के बाद केवल यॉर्कशायर पुडिंग की डाइट पर लौटने के लिए विवश किया जा सकता है?

एक परस्पर निर्भर दुनिया में कोई राष्ट्र अपनी खिचड़ी अलग पका भी ले, पर क्या वह उतनी स्वादिष्ट बन पायेगी? अंगरेजी अपने अमेरिकी और हिंगलिश रूपों में ज्यादा जानी जाती है. अगर ब्रिटेन ने प्रवासियों को बाहर रखा होता, तो उसे उसका राष्ट्रीय पकवान चिकन टिक्का मसाला कभी न मिला होता. फ्रेंच रोल और अमेरिकी मफिन बहुत पहले सैंडविच की जगह ले चुके होते. ब्रिटेन का सबसे प्रसिद्ध ब्रॉडकास्टर ट्रेवर मैकडोनल्ड त्रिनिदाद का है.

विंबलडन-टेनिस में अकेला ब्रिटिश चैलेंजर एंडी मरे एक स्कॉट है. भले ही स्कॉट्स अब ह्विस्की और आयरिश अपनी तेज मदिरा गिनीज पर अपना एक्सक्लूसिव अधिकार पा लें, पर अंगरेजों ने यह गाने में काफी देर कर दी कि ये दुनिया, ये महफिल मेरे काम की नहीं.

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