बेईमान मौसम से किसान हुए बेहाल

Published at :18 Apr 2015 5:34 AM (IST)
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बेईमान मौसम से किसान हुए बेहाल

जब सूरज तपना चाहिए, तब पूरे उत्तर भारत में सावन की झड़ी लगी हुई है. कई बार की बारिश ने किसानों और खेतिहर मजदूरों की कमर तोड़ दी है. वैशाख के महीने की इस बारिश ने दशकों पुराने रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर डाला है. खेतों में तैयार फसल बरबाद. किसान का चेहरा मुरझाया हुआ. […]

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जब सूरज तपना चाहिए, तब पूरे उत्तर भारत में सावन की झड़ी लगी हुई है. कई बार की बारिश ने किसानों और खेतिहर मजदूरों की कमर तोड़ दी है. वैशाख के महीने की इस बारिश ने दशकों पुराने रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर डाला है.
खेतों में तैयार फसल बरबाद. किसान का चेहरा मुरझाया हुआ. सब्जियां भी खेतों में सड़ चुकी हैं. किसानों के अरमानों पर पानी फिरने से विकास का पहिया भी थमता है. इसलिए, इसे लेकर सरकारें भी चिंतित हैं.
मंडियों में अनाज-सब्जी की आवक नहीं होगी, तो महंगाई बढ़ेगी ही. इसी चिंता में आम के साथ-साथ खास लोग भी दुबले हुए जा रहे हैं. झारखंड की राजधानी रांची और अन्य क्षेत्रों में पिछले आठ दिनों से हो रही बारिश ने पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ डाला है. मौसम विभाग का कहना है कि 16 अप्रैल 1975 को रांची में 300 मिलीमीटर बारिश हुई थी. इसके बाद 17 अप्रैल 1977 को रांची में 73.3 और 2001 में 135.0 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गयी थी.
इस बार के रिकॉर्ड पर गौर करें, तो बीती सात अप्रैल को एक ही दिन में झारखंड के कई इलाकों में 60-70 मिलीमीटर बारिश हुई. तकरीबन हर रोज, हल्की से लेकर भारी बारिश हो रही है. 17 अप्रैल को भी दोपहर बाद जम कर बारिश हुई. मौसम विभाग की मानें, तो 18 अप्रैल से मौसम साफ होना शुरू होगा.
लेकिन बेईमान मौसम को जितना नुकसान पहुंचाना था, पहुंचा चुका है. मूलत: सब्जियां उगा कर जीविकोपाजर्न करने वाले झारखंड के किसानों को इस असमय बारिश से काठ मार गया है. ओले और बारिश ने आम-जामुन-महुआ को भी काफी नुकसान पहुंचाया है. इस साल शायद ही आम आदमी आम का मजा ले सके.
हां, इस बारिश के सकारात्मक पक्ष भी हैं. राज्य के लोगों को अभी तक गरमी का अहसास नहीं हो पाया है. अप्रैल बीतने जा रहा है, लेकिन रात में गुलाबी ठंड बनी हुई है. इसके अलावा पानी का संकट भी अभी नहीं पैदा हुआ है.
वैशाख की बारिश के चलते कुओं से पानी मिल रहा है. तालाबों-पोखरों में भी पानी दिख रहा है. कुछ भी हो वैशाख की बारिश ने नुकसान ही नुकसान किया है. ऐसा ही रहा तो कहीं मॉनसून भी न दगा दे जाये, क्योंकि जब तक प्रचंड गरमी नहीं पड़ेगी, मॉनसून की अच्छी बारिश कैसे होगी?
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