Advertisement

ranchi

  • Jun 12 2019 8:02AM
Advertisement

रांची : इस तपती गर्मी में रुला रही बिजली, लोड शेडिंग का सिलसिला जारी

रांची : इस तपती गर्मी में रुला रही बिजली, लोड शेडिंग का सिलसिला जारी
रांची : तपती गर्मी में झारखंड की जनता बिजली की आंख मिचौली से त्रस्त है. राजधानी रांची समेत राज्य के बड़े हिस्सों में जमकर बिजली की लोड शेडिंग हो रही है. 
 
रांची का पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है और लोग गर्मी से छटपटा रहे हैं, लेकिन में मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिल पा रही है. दूसरी ओर खूंटी, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार और गढ़वा में जमकर लोड शेडिंग हो रही है. गढ़वा में जहां दो से तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है, वहीं शेष जिलों में आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है. 
 
रांची में हालात यह है कि सुबह पांच बजे से जो शेडिंग का सिलसिला शुरू होता है, वह अगले दिन रात दो बजे तक चलता रहता है. कारण पूछने पर सिर्फ इतना ही कहा जाता है कि शेडिंग चल रही है. दूसरी ओर रांची को 300 मेगावाट बिजली मिल भी रही है. इसके बावजूद शहरी क्षेत्र में जमकर शेडिंग हो रही है. वहीं, रांची जिले के ग्रामीण इलाकों ओरमांझी, सिल्ली, बुंडू, तमाड़, बेड़ो, मांडर, कांके, पिठोरिया में आठ घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है. 
 
क्यों हैं ऐसे हालात
 
ऊर्जा विभाग के सूत्रों ने बताया कि टीवीएनएल की दो यूनिट में दो नंबर यूनिट से उत्पादन बंद है. एक नंबर यूनिट से 160 से 170 मेगावाट उत्पादन हो रहा है. टीवीएनएल की बिजली अमूमन ललपनिया-पतरातू होते हुए रांची तक आती है. टीवीएनएल दूसरे छोड़ से बिहार के बिहारशरीफ ग्रिड से जुड़ा हुआ है. बिहार में भी बिजली की मांग बढ़ चुकी है. 
जिसके कारण टीवीएनएल की बिजली बिहार ओवर ड्राॅ कर लेता है. दूसरी ओर ललपनिया-पतरातू-हटिया लाइन में बिजली न आने से हटिया ग्रिड में दूसरे सोर्स से मिली बिजली भी उल्टा प्रवाह होकर इस लाइन में आ जाती है, जिसका खामियाजा रांची को भुगतना पड़ता है. रांची में गर्मी के मौसम में 50 मेगावाट से अतिरिक्त मांग बढ़ गयी है. जनवरी के मौसम में रांची में 263 मेगावाट में फुल लोड बिजली मिलती थी. अभी रांची में 322 मेगावाट की जरूरत है और 290 से 300 मेगावाट तक आपूर्ति हो रही है. 
 
लगभग 25 से 30 मेगावाट की शेडिंग हो रही है. जिसके चलते कई इलाकों में एक-एक घंटे पर बिजली की कटौती होती है. एक दूसरी वजह हटिया टू ग्रिड में भी है. अत्याधिक बिजली की मांग की वजह से ग्रिड का ट्रांसफारमर गर्म हो जाता है. तब लोड कम करने कहा जाता है. इसके बाद दिन में भी लोड शेडिंग रांची में होने लगती है. यही वजह है कि पिछले चार दिनों से रांची में जमकर लोड शेडिंग हो रही है. इसका प्रभाव अन्य जिलों पर भी पड़ रहा है. खासकर हटिया ग्रिड से जुड़े जिलों पर ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है. 

बारिश और फेस्टिवल के दौरान होगी परेशानी 
 
टीवीएनएल  के एमडी अरविंद कुमार सिन्हा ने कहा कि  सीसीएल आये दिन बकाया का कारण बताकर कोयले की आपूर्ति रोक देता है. इसके कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है. टयूब लीकेज या अन्य समस्या तो एक दो दिनों में दूर की जा सकती है, मगर कोयले की कमी को दूर करना संभव नहीं है. 
 
बकाया निश्चित ही एक फैक्टर है. सीसीसीएल, टीटीपीएस एवं जेबीवीएनएल को बैठकर इस मसले का हल निकालना चाहिए. बारिश का मौसम शुरू होने वाला है. इसके बाद फेस्टिवल का मौसम शुरू हो जायेगा.  अगर समय रहते इसका समाधान नहीं ढूंढ़ा गया तो फिर बारिश एवं फेस्टिवल के दौरान बिजली की दिक्कत हो सकती है. श्री सिन्हा ने कहा कि बिजली निगम महीना 80 करोड़ रुपये का बिजली लेता है और भुगतान 55 से 60 करोड़ रुपये देता है. हर महीना 20 से 30 करोड़ रुपये बकाया रह जाता है. ऐसे में वे लोग नियमित रूप से सीसीएल को भुगतान नहीं कर पाते हैं. 
 
गढ़वा को दो-तीन घंटे ही मिल रही बिजली, खूंटी, कामडरा, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा व लातेहार को आठ से 10 घंटे
राजधानी में औसतन 12 से 14 घंटे ही मिल रही बिजली, गर्मी के मौसम में 50 मेगावाट तक अतिरिक्त िबजली की मांग बढ़ी
जनवरी में 263 मेगावाट और जून में 322 मेगावाट बिजली की मांग, लेकिन मिल रही 290 से 300 मेगावाट बिजली
क्या है उत्पादन की स्थिति
टीटीपीएस 157 मेगावाट
सीपीपी 38 मेगावाट
इनलैंड पावर 53 मेगावाट
सेंट्रल पूल 547 मेगावाट
एपीएनआरएल 186 मेगावाट
एसइआर 38 मेगावाट
एसइएक्स 79 मेगावाट
कुल बिजली 1098 मेगावाट
कुल मांग 1250 मेगावाट
कमी 152 मेगावाट
 
कोयले की कमी की वजह से बंद है तेनुघाट
 
टीटीपीएस (तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन ) एक यूनिट कोयले की कमी के कारण बंद है.इस समय वहां  30 हजार टन ही कोयला बचा है. 
इस कारण एक ही यूनिट चल सकती है. जिसके कारण दूसरी यूनिट ट्यूब लीकेज के बाद ठीक होने के बावजूद चालू नहीं हो पा रही है.  इसके कारण चार दिनों से बिजली कमी हो गयी है.कहा जा रहा है कि यदि दोनों यूनिट चलती भी तो बिहार में बिजली जाने के बावजूद झारखंड में भी मिलती. इस वजह से पूरे राज्य में शेडिंग करके बिजली आपूर्ति की जा रही है.
 
Advertisement

Comments

Advertisement
Advertisement