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  • Dec 3 2019 12:22AM
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गिरिडीह विधानसभा : ट्रेड यूनियनों के साथ खत्म हो गया सीपीआइ और कांग्रेस का दबदबा, 90 के बाद वापसी नहीं

गिरिडीह  विधानसभा :  ट्रेड यूनियनों के साथ खत्म हो गया सीपीआइ और कांग्रेस का दबदबा, 90 के बाद वापसी नहीं

राकेश सिन्हा, गिरिडीह : समय के साथ गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक फिजा भी तेजी से बदल गयी. माइका और कोयला के लिए चर्चित गिरिडीह में ट्रेड यूनियन की गतिविधियां काफी तेज थीं. माइका और कोयला उद्योग के मृतप्राय होने के साथ ही ट्रेड यूनियनों का वर्चस्व काफी कम हो गया और इसी के साथ ही सीपीआइ और कांग्रेस पार्टी का दबदबा भी यहां खत्म हो गया. वहीं उद्योगों के बंद होने का असर यहां की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा. 

 
1952 से लेकर वर्ष 2014 के चुनावी परिणाम को देखें तो 15 विधानसभा चुनावों में से पांच बार कांग्रेस और चार बार सीपीआइ प्रत्याशियों ने बाजी मारी. 1990 के बाद कांग्रेस और सीपीआइ की वापसी इस सीट पर नहीं हो पायी. 1990 के बाद इस सीट पर भाजपा का दबदबा कायम हुआ और पांच बार हुए विधानसभा चुनावों में से तीन बार भाजपा जीती, जबकि एक बार जेवीएम और एक बार जेएमएम ने भी जीत दर्ज कर अपना खाता खोला. 
 
वर्ष 2009 के चुनाव में जेवीएम के टिकट पर जीत दर्ज कराने वाले निर्भय कुमार शाहाबादी के भाजपा में शामिल होने के बाद 2014 के चुनाव में उन्हे शिकस्त देने के लिए खुद झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी चुनावी में मैदान में उतरे थे,लेकिन इस सीट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे स्थान पर जा पहुंचे.
 
क्षेत्र का लेखा-जोखा
कुल वोटर 260770
पुरुष वोटर 137592
महिला वोटर  123178
 
तीन महत्वपूर्ण कार्य जो हुए
1. 38 करोड़ की ग्रामीण जलापूर्ति योजना
2. नर्सिंग व डिग्री कॉलेजों की स्वीकृति
3. पावर ग्रिड, पावर सब स्टेशन बना
 
तीन महत्वपूर्ण कार्य जो नहीं हुए 
1. अपग्रेड नहीं हुआ सदर अस्पताल
2. डिवाटरिंग प्रोजेक्ट ठप
3. नहीं स्थापित हुआ रेलवे रैक प्वाइंट
 
कई योजनाएं लायें : निर्भय
विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी ने दावा किया कि कई कार्य किये हैं. पुल, पुलिया, सड़क और सिंचाई की कई योजनाओं को धरातल पर उतारा. नर्सिंग कॉलेज, डिग्री कॉलेज, एकलव्य विद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज की स्वीकृति दिलायी. 
 
विकास का दावा गलत : सुदिव्य 
जेएमएम के सुदिव्य कुमार कहते हैं कि विधायक कोटा के अलावा कुछ भी नहीं हुआ है. शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में भी सुधार नहीं हुआ. न ही गिरिडीह सदर अस्पताल में सुधार हुआ और न ही ट्रॉमा सेंटर खुलवा पाये. विकास का उनका दावा गलत है.
 
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