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  • Apr 16 2019 5:15AM
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दुमका संसदीय सीट : इस बार चुनाव जीते, तो शिबू के नाम बन सकता है रिकॉर्ड

दुमका संसदीय सीट : इस बार चुनाव जीते, तो शिबू के नाम बन सकता है रिकॉर्ड
मनोज लाल
 
रांची : झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन इस बार भी दुमका संसदीय सीट से चुनावी मैदान में हैं. श्री सोरेन अब तक आठ बार संसदीय चुनाव जीत चुके हैं. इस बार भी वह विजयी हुए, तो उनके नाम रिकॉर्ड बन सकता है. 
 
यानी झारखंड से सबसे ज्यादा  बार सांसद बनने का गौरव उन्हें प्राप्त होगा. अब तक आठ बार सांसद बनने का गौरव श्री सोरेन के साथ ही खूंटी सांसद कड़िया मुंडा को भी प्राप्त था.  16 वीं लोकसभा चुनाव में दोनों जीत कर आये थे और दोनों को आठ-आठ बार सांसद बनने का मौका मिला. इस बार चुनावी मैदान में कड़िया मुंडा नहीं हैं. ऐसे में नौवीं बार बनने का अवसर केवल शिबू सोरेन के सामने है. 
 
श्री सोरेन सबसे पहले 1980 में लोकसभा चुनाव जीते थे. इसके बाद उन्होंने 1989, 1991, 1996, 2002, 2004, 2009 व 2014 में  लोकसभा का चुनाव जीता. 2002 में दुमका से उप चुनाव जीत कर वह सांसद बने थे. इसके पहले बाबूलाल मरांडी वहां सांसद बने थे, लेकिन वह झारखंड के मुख्यमंत्री बने, इसलिए यहां उप चुनाव हुआ. तब शिबू सोरेन वहां से चुनाव लड़ कर जीत हासिल की. 
 
शिबू सोरेन व कड़िया एक ही सीट से जीतते रहे : शिबू सोरेन व कड़िया मुंडा दोनों एक ही सीट से चुनाव जीतते रहे हैं. शिबू सोरेन दुमका से ही सांसद बनते रहे हैं. वहीं कड़िया मुंडा ने भी खूंटी नहीं छोड़ा. वह भी इसी सीट से चुनाव जीतते रहे. झारखंड के दोनों दिग्गज नेता देश के बड़े ओहदे पर भी रहे. कड़िया मुंडा केंद्रीय मंत्री तो रहे ही लोकसभा के उपाध्यक्ष के पद पर भी रहे. वहीं शिबू सोरेन भी केंद्रीय मंत्री रहे. 

रवींद्र पांडेय व रामटहल पांच-पांच बार रहे हैं सांसद
 
रवींद्र पांडेय व रामटहल चौधरी पांच-पांच बार सांसद रहे हैं. राम टहल चौधरी 1991 (10 वीं लोकसभा), 1996( 11 वीं लोकसभा), 1998 (12 वीं  लोकसभा), 1999 (13 वीं लोकसभा) व 2014 (16 वीं लोकसभा) चुनाव में जीत कर सांसद बने थे. वहीं रवींद्र पांडेय ने भी गिरिडीह सीट से इतनी ही बार जीत हासिल की. वहीं धनबाद सीट से रीता वर्मा चार बार सांसद रही हैं. वह  1991 (10वीं), 1996 (11वींं), 1998 (12वीं ) व 1999 (13वीं ) में  लोकसभा चुनाव जीत कर सांसद बनी थीं.  जयपाल सिंह ने भी चार बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है. 
 
रांची व खूंटी मिला कर जब एक सीट था, तो उन्होंने  यहां से तीन बार 1951, 1957 व 1962 में जीत हासिल की थी. फिर बाद में जब रांची व खूंटी अलग हुआ, तो उन्होंने खूंटी संसदीय सीट से 1967 में जीत हासिल की. इनके बाद तीन बार  सांसद बननेवालों में कइयों के नाम हैं.
 

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