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  • Sep 10 2019 1:14AM
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जमीन माफिया ने जिन्हें बताया था खरीदार, वही मुकर गये

जमीन माफिया ने जिन्हें बताया था खरीदार, वही मुकर गये

 रांची : फॉरेंसिक लैब द्वारा फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन की खरीद बिक्री करने की पुष्टि किये जाने के बाद जारी जांच के दौरान नया खुलासा हुआ. जमीन माफिया द्वारा दस्तावेज में खरीदार बताये गये लोगों ने जमीन खरीदने और म्यूटेशन के लिए आवेदन देने की घटना से इंकार कर दिया है. इसके बाद से रजिस्ट्री ऑफिस से मूल दस्तावेज गायब कर उसकी जगह नकली दस्तावेज रख कर जमीन की खरीद-बिक्री करनेवाले गिरोह में हड़कंप मचा हुआ है.

       
 फॉरेंसिक लैब द्वारा वर्ष 1966 के डीड नंबर 397,415 वॉल्यूम नंबर-25 को फर्जी करार दिया था. फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट के बाद जारी जांच के दौरान दशरथ साहू परिवार के सदस्यों ने जमीन खरीदने और म्यूटेशन के लिए आवेदन देने से इंकार कर दिया है. 
 
 वॉल्यूम नंबर-25 के खाता नंबर 119 के सेल डीड संख्या 415 के 45.32 एकड़ जमीन के  सिलसिले में किशोर गंज निवासी विजय चंद्रा, शंभु एस कुमार, अजय कुमार और अरुण कुमार ने शपथ पत्र(12977) में यह कहा है कि संबंधित जमीन  कभी उनके या उनके पारिवारिक सदस्यों ने न तो कभी खरीदी है न ही म्यूटेशन के लिए आवेदन दिया है. हेहल के अंचलाधिकारी ने अभिलेख संख्या 01/2018 उनके पारिवारिक सदस्यों के नाम कैसे जारी किया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. संबंधित जमीन पर उनका कभी कोई दावा नहीं था.
 
खरीदार बताये गये दूसरे व्यक्ति ने भी किया इनकार
हेहल के ही वॉल्यूम संख्या-25/1966 के डीड नंबर 397 के सिलसिले में दशरथ साहू के पुत्र गुलाब साहू ने लिखित तौर पर यह स्वीकार किया है कि इस डीड या उससे संबंधित जमीन की जानकारी उन्हें नहीं है. उन्होंने या उनके पारिवारिक सदस्यों ने यह जमीन नहीं खरीदी है.  
 
फॉरेंसिक जांच के दौरान यह पाया गया था कि वॉल्यूम संख्या-25/1966 के मूल डीड को गायब कर उसके बदले फर्जी डीड संख्या 397 तैयार कर पंडित देवकी नंदन की जमीन दशरथ साहू के नाम बिक्री दिखा दी गयी थी. इसी तरह वॉल्यूम संख्या-25/1966 के दूसरे डीड को हटा कर उसके बदले इस वॉल्यूम में फर्जी डीड संख्या रख कर इस जमीन की बिक्री गणेश साहू के नाम दिखायी गयी.
 
गड़बड़झाला
हेहल अंचल की 45.32 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा है मामला
वर्ष 1966 के डीड नंबर 397, 415 वॉल्यूम नंबर-25 को फर्जी करार दिया था फॉरेंसिक लैब ने
खरीदार बताये गये परिवार ने कहा : सीओ ने उनके नाम से अभिलेख कैसे जारी किया, पता नहीं
 
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