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calcutta

  • Jul 21 2019 1:00AM
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बंगाल आकर पता चला कि मैं कवि हूं : राज्यपाल

 कोलकाता : अपने को कवि नहीं समझा, जब जो विचार आये उन्हें व्यक्त करते हुए लिख दिया, लेकिन सच पूछा जाये तो कवि के रूप  में मुझे स्वीकृति कोलकाता में ही मिली, जो भारत में व इससे बाहर अन्य 29 देशों में भी नहीं मिली. साहित्य के माध्यम से समाज की घटनाओं व अपनी कल्पनाओं को सुंदर शब्द देकर मानवता का  कल्याण के लिए लिखना ही साहित्य का लक्ष्य है. प्रत्येक व्यक्ति को इसके लिये समर्पित होना चाहिए.

ये बातें पश्‍चिम बंगाल के राज्यपाल  डॉ केशरीनाथ त्रिपाठी ने शनिवार को भारतीय भाषा परिषद द्वारा अपने अभिनंदन की कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कही. इस अवसर पर उन्हें भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम  खेमानी ने भारतीय भाषा परिषद की ओर से ‘साहित्य सेवी सम्मान’ प्रदान किया और अभिनंदन पत्र का वाचन किया.

डॉ खेमानी ने  उन्हें सम्मान के रूप में कुछ  राशि देने की बात कही, जिसे श्री त्रिपाठी ने इलाहाबाद के एक शिक्षण संस्थान पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी विद्यापीठ  को अर्पित कर दिया. इस अवसर पर डॉ केशरीनाथ त्रिपाठी ने कथाकार कुसुम खेमानी के नये  उपन्यास ‘लालबत्ती की अमृतकन्याएं’ का लोकार्पण करते हुए अपने भाषण में  कहा कि लालबत्ती एक चौंकाने वाला शब्द है, लेकिन हम सिर्फ आदर्शों की दुनिया में नहीं रह सकते, हमें यथार्थ  का  भी सामना करना होगा. यह उपन्यास निश्‍चय ही  पाठकों को यह बताने में समर्थ होगी. आदर्शों के साथ यथार्थ भी जरूरी है. इस मौके पर कवि गिरिधर राय को कविता सम्मान दिया गया.

श्री राय ने कहा कि राज्यपाल श्री त्रिपाठी के हाथों मिला ये सम्मान उनके लिए पद्मश्री जितना ही महत्वपूर्ण है. राज्यपाल डॉ. केशरीनाथ त्रिपाठी के  अभिनंदन के बाद लिटिल थेस्पियन की ओर से राज्यपाल की कविता ‘विहान’ की  नाट्य प्रस्तुति दी गयी, जिसका निर्देशन उमा झुनझुनवाला ने किया. साथ ही नीलांबर द्वारा उनकी कुछ कविताओं का मोंताज भी प्रस्तुत  हुआ. मोंताज का निर्देशन विशाल पांडेय ने किया. समारोह में स्वागत भाषण परिषद  के निदेशक डॉ शंभुनाथ ने दिया. कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर राजश्री शुक्ला व धन्यवाद ज्ञापन परिषद की  मंत्री डॉ बिमला पोद्दार ने किया.

 

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