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  • Mar 26 2019 5:34PM

कोलकाता में हर साल निकलता है 45000 टन ई-कचरा, 5% ही होता है रिसाइकल

कोलकाता में हर साल निकलता है 45000 टन ई-कचरा, 5% ही होता है रिसाइकल
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।। अजय विद्यार्थी ।।

कोलकाता : प्रतिदिन घरों और कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर, लैपटॉप, टीवी, फ्रिज, एसी, वासिंग मशीन, इलेक्ट्रिक तार आदि खराब होने पर ई-कचरा में तब्दील हो जाते हैं. इससे केवल कोलकाता में प्रत्येक वर्ष लगभग 45 हजार टन ई-कचरा इकट्ठा होता है, जबकि पूरे राज्य में एक लाख टन तथा पूरे देश में लगभग 12 लाख टन इ-कचरा इकट्ठा होता है.
 
 
इनमें से मात्र पांच फीसदी ही रिसाइकल होता है. बाकी 95 फीसदी इ-कचरा से पर्यावरण प्रदूषण फैलता है, जिनसे श्वांस सहित अन्य बीमारियों के लोग शिकार होते हैं. ई-कचरा इकट्ठा व रिसाइकल करने वाली कंपनी हुल्लाडेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व संस्थापक नंदन माल ने प्रभात खबर को बताया कि प्रत्येक वर्ष ई-कचरा में 20 से 30 फीसदी इजाफा हो रहा है तथा दिन प्रतिदिन यह बढ़ता जा रहा है. 

उन्होंने कहा कि ई-कचरा स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है तथा इससे कई तरह की बीमारियां होती है. इसे देखते हुए भारत सरकार ने 2018 में एक कानून बनाया है. इस कानून के अनुसार प्रत्येक संस्थान व उत्पादक को ई-कचरा के रिसाइकल को प्रोत्साहित करने के लिए काम करना होगा. 

उत्पादक कंपनियों को अपनी बनायी और बेची गयी जीचों को खराब होने पर उसे संग्रह कर सुरक्षित तरीके से उनका रिसाइकल करना होगा, लेकिन अभी तक मात्र सात से आठ फीसदी ही बेचे गये खराब उत्पाद वापस आ रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे इस बाबत कंपनियों व उपभोक्ताओं दोनों में जागरूकता बढ़ रही है. 

श्री माल ने बताया कि जितना ई-कचरा इकट्ठा होता है, उसमें मात्र पांच फीसदी का ही रिसाइकल होता है, बाकी ई-कचरा पर्यावरण को प्रदूषित करने का काम करता है. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी इ-कचरा को रिसाइकल करने के लिए अभियान चला रही है. 

पिछले वर्ष कंपनी ने लगभग 550 टन ई-कचरा का संग्रह किया है तथा उनका रिसाइकल किया है. अगले वर्ष 1000 टन इ-कचरा इकट्ठा करने और उन्हें रिसाइकल करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका मौद्रिक मूल्य लगभग छह से आठ करोड़ रुपये की है.

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