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  • Sep 22 2019 7:47AM
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खास बातचीत: बोले कीर्ति आजाद- डीडीसीए में हुए घोटाले पर भी बनाऊंगा फिल्म

खास बातचीत: बोले कीर्ति आजाद- डीडीसीए में हुए घोटाले पर भी बनाऊंगा फिल्म

क्रिकेटर और राजनीतिज्ञ कीर्ति आजाद बिहार के क्रिकेट पर आधारित फिल्म ‘किरकेट- बिहार के अपमान से सम्मान तक’ लेकर आ रहे हैं. फिल्म में मूल रूप से बिहार क्रिकेट संघ के बंटवारे और उसकी रणजी टीम की मान्यता रद्द करने की कहानी दिखायी गयी है. कीर्ति आजाद की मानें तो बिहार क्रिकेट संघ की स्थिति आज भी कमोबेश वैसी ही है. बिहारी युवाओं को मौका नहीं मिल रहा बाहर से खिलाड़ी आ रहे हैं. पेश है कीर्ति आजाद की उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश.

-फिल्म ‘किरकेट’ से आपको किस तरह से जुड़ना हुआ?

प्रोडयूसर एक्टर सोनू झा मुझसे बार-बार मिलने की कोशिश कर रहे थे. मैंने सेक्रेटरी से पूछा कि क्यों वे मुझसे मिलना चाहते हैं. उनका कहना था कि वे मिलकर ही मुझे बतायेंगे. फिर मैंने उन्हें फोन किया तो उन्होंने बताया कि मेरे पास एक स्क्रिप्ट है. आपकी परमिशन चाहिए. उन्होंने मेरे बिहार के स्ट्रगल को बहुत फॉलो किया है. मैंने पीछा छुड़ाने के इरादे से बुला लिया था, लेकिन जब मैंने फिल्म की सिनोप्सिस सुनी तो मुझे बहुत अच्छी लगी. मैंने हां कह दिया कि फिल्म बनाइए. स्टोरी राइटर विशाल विजय कुमार फिर मुझसे मिले. मैंने उन्हें कहानी नरेट की. दिल से जुड़ी कहानी थी बिहार क्रिकेट की. मेरे इस जुड़ाव को देखते हुए उन्होंने कहा कि आप ही इस फिल्म में अभिनय भी कर लीजिए. मैंने कहा कि मैंने एक्टिंग कभी नहीं की है. उन्होंने कहा कि आपको एक्टिंग नहीं करना है. आपने जो किया है उसी को निभाना है. जैसे टीवी पर आप बोलते हैं. वैसे ही आपको बोलना है. ऐसे मैं आ गया फिल्म में.

-एक्टिंग को अब आप अपना करियर बनाने वाले हैं? ऐसी चर्चा है.

सबसे पहली बात तो मैं एक खिलाड़ी हूं. चूंकि ये सच्ची घटनाओं पर आधारित है इसलिए मैंने इस फिल्म को किया. इस फिल्म के बाद तो मेरा मन है कि जो ‘डीडीसीए’ में हुआ वो क्रिकेट 2 में सबको बताऊं. डीडीसीए में जो घोटाले हुए. मैं अरुण जेटली को भी इसके बारे में बताया था.

-अरुण जेटली अब रहे नहीं तो आपको लगता है कि ये फिल्म बननी चाहिए?

मेरी व्यक्तिगत लड़ाई अरुण जी से नहीं थी. अरुण जेटली मेरा एक अच्छा दोस्त जैसे थे. मैं उसको खबर करता रहा था जो भी गड़बड़ियां हो रही थी, लेकिन वे उस पर ध्यान नहीं दे पाये ये दुर्भाग्यपूर्ण था . दो-दो रिपोर्टस बाहर निकली. एक सरकारी रिपोर्टस थी एसएफआइ की, जस्टिस विक्रमजीत सेन की एक रिपोर्ट थी फॉरेंसिक आॅडिट. मेरे कहने पर एडमिनिस्टर्स बिठाये गये थे हाईकोर्ट द्वारा तब निकली थी. उसमें भी यही कहा गया था कि चार सौ करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था.

-फिल्म ‘किरकेट’ को आप कितना समसामयिक मानते है?

आज भी बिहार में खेल को लेकर कोई इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. जिस तरह का स्ट्रांग आर्गेनाईजेशन चाहिए वो नहीं है. वहां अभी भी बाहर के खिलाड़ी आ रहे हैं. 2000 के करीब आर्गेनाईजेशन को बिहार के क्रि केट को बढ़ावा देने के लिए 50 लाख रुपए मिले थे. पर उन पैसों का सही जगह पर उपयोग नहीं किया गया. बिहार क्रिकेट के विकास में कुछ नहीं किया. बिहार का यूथ खेलना चाहता है, लेकिन लोग उन्हें खेलने नहीं देते हैं. आज भी परिस्थिति वही है. फिल्म के जरिये हमने यही बताने की कोशिश कि है कि हमने किस तरह की लड़ाई लड़ी. मान्यता मिलने के बाद हमें लगा था कि बदलाव आयेगा लेकिन कोई बदलाव नहीं आया.

-सेंसर बोर्ड ने डिस्क्लेमर में सत्य घटनाओं को हटाने को कहा है आपका इस पर क्या कहना है?

उन्होंने कहा कि जो भी घटनाएं हुई हैं. उनका एफिडेफिट लेकर आइए. मैं कहां से लेकर आऊंगा. फिक्शन इस फिल्म में कुछ नहीं है. वास्तविक घटनाएं सभी हैं. हां कुछ चीजों को थोड़ा अलग से दिखाया गया है जैसे कोर्ट जाकर हमने झारखंड को सपोर्ट किया था और वहीं झारखंड के वकील ने हमारे खिलाफ पटना हाईकोर्ट में दावा दायर कर दिया था. तो वो हम नहीं दिखा सकते हैं तो हमने दूसरे तरीके से दिखाया है.

-फिल्म में बिहार के एक्टर्स कितने हैं?

इस फिल्म में सभी बिहार के एक्टर्स हैं. शूटिंग में भी बिहार का ज्यादा इस्तेमाल हुआ है. दरभंगा, पटना और दिल्ली में इस फिल्म की शूटिंग हुई है.

-बिहार के युथ से आप क्या कहना चाहते हैं?
हमारे पास आज से नहीं बहुत पहले से प्रतिभाएं हैं. उनको उभारने की जरूरत है. दुर्भाग्य रहा है कि ये प्रतिभाएं उभर नहीं पाएं कभी राजनीति के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर. मैं युवाओं से यही कहूंगा कि हताश न हो लड़ते रहें. एक दिन अवसर जरूर मिलेगा.

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