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  • Aug 15 2019 8:32AM
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प्रभात खबर से इन बॉलीवुड स्टार्स ने कहा: भारत हमको जान से प्यारा है...

प्रभात खबर से इन बॉलीवुड स्टार्स ने कहा: भारत हमको जान से प्यारा है...

स्वतंत्रता दिवस, हर साल 15 अगस्त को पूरे भारत में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. यह हर भारतीय को एक नयी शुरुआत और एक नये युग की याद दिलाता है. भारत अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, जिसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. यह केवल एक दिन या घटना नहीं है, बल्कि भारतीयों के लिए एक राष्ट्रीय त्योहार है. 15 अगस्त यानी देश की आजादी के दिन हिंदी सिनेमा के कई कलाकारों इस दिन से जुड़ी खास बातें प्रभात खबर के साथ साझा कीं.

 
अक्षय कुमार
स्वतंत्रता दिवस पर हम सुबह जल्दी स्कूल जाते थे. झंडा फहराया जाता था. नेशनल एंथम गाते थे और मिठाई खाते थे. जिसके बाद घर लौटते थे. स्कूल से आने के बाद पूरा दिन हॉलीडे होता था. जब मैं एक्टर बन गया तो अपनी बिल्डिंग की सोसाइटी में कई बार स्वतंत्रता दिवस के दिन मैं वहां शामिल होता था और झंडा फहराया जाता था. लेकिन सच कहूं तो अब स्वतंत्रता दिवस मेरे लिए हर दिन है. यह नेकनीयत और ईमानदारी के साथ अपना काम करना ही सच्ची देशभक्ति है.
 
जॉन अब्राहम
स्कूल में जाना फ्लैग होस्टिंग करना मेरी बचपन की स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी यादें हैं. मुझे झंडे से बहुत लगाव है. मैं चाहता था कि मैं स्वतंत्रता दिवस के अलावा भी दूसरे दिन भी झंड़ा फहराऊं, लेकिन ये उस वक्त संभव नहीं था. नवीन जिंदल के प्रयासों के बाद ये बाद में संभव हुआ तो अपने बचपन में झंड़ा फहराने के बाद मैं फुटबॉल खेलने चला जाता था. मेरे सेलिब्रेशन का यही तरीका था. स्वन्त्रता दिवस पर मैं यही कहूंगा कि आज के युवाओं को मिलेनियल्स कहा जाता है. वो भले ही सोशल मीडिया के गुलाम हैं, लेकिन वो बहुत ही जागरूक भी हैं.
 
हिमेश रेशमिया
इस स्वतंत्रता दिवस पर मैं सभी से यह आग्रह करना चाहता हूं कि जितना हो सके सभी स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े. इससे हम भारत को एक अलग ही लेवल पर ले जा सकते हैं. आजकल देश में एक के बाद एक कई सारे घटनाएं सुनने को देखने को मिल रही है. एक दूसरे पर दोष देने से अच्छा है कि हम मिलकर एक साथ हर समस्या से लड़े. एकता से बड़ी कोई ताकत नहीं है.
 
पंकज त्रिपाठी
बचपन में स्वतंत्रता दिवस का मतलब बस मस्ती और धमाल था क्योंकि उसी दिन स्कूल में लड्डू और जलेबी मिलता था और बिना पढ़े ही स्कूल से आ जाते थे. बाद के समय में स्वतंत्रता दिवस के असली मायने समझ में आया. अपने देश की खासियत को भी समझा. भारत की खासियत अनेकता में एकता है. हर सौ किलोमीटर पर खान-पान, रहन-सहन, कपड़े और भाषा बदल जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद सभी भारतीय एक सूत्र में बंधे हैं. वही हमारे मुल्क की सबसे खास बात है, लेकिन कुछ खामियां भी हैं इस स्वतंत्रता दिवस पर महिलाओं पर हो रहे अत्याचार से आजादी की जरूरत है. यह सब बातें मन को बहुत दुखी कर देते हैं. मुझे लगता है कि इस पर काम होना चाहिए.
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