bhojpur

  • Jan 22 2020 6:15AM
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शहर में तीन दवा दुकानें खुली रहेंगी

 आरा : राज्य के थोक एवं खुदरा दवा दुकानों को फार्मासिस्ट उपलब्धता एवं तकनीकी गलती के नाम पर विभाग द्वारा उत्पीड़न एवं शोषण किया जा रहा है. जिसके विरोध में बिहार के केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर तीन दिवसीय बंदी की घोषणा की गयी है.

 
 दवा दुकानें 22, 23 तथा 24 जनवरी तक बंद रहेंगी. इस बंदी के दौरान थोक एवं खुदरा दवा दुकानदार शामिल होंगे. इस दौरान जिले के सभी दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन मरीजों के हित को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा तीन अलग-अलग दुकानें खोलने का निर्णय लिया गया है.
 
 इस संबंध में भोजपुर जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह तथा सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि 22,23 व 24 को तीन दुकानें खुली रहेंगी. जिसमें 22 जनवरी को सदर अस्पताल के सामने न्यू जैन मेडिकल, 23 जनवरी को नागेंद्र मेडिकल तथा 24 जनवरी को केशरी मेडिकल खुली रहेगी. 
 
ये सभी दुकानें सदर अस्पताल के समीप स्थित हैं. हालांकि बाकी सभी दुकानें बंद रहेंगी. इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर कुमार संजय ने बताया कि मरीजों के हित में तीन दुकानों को खोलने का  निर्णय लिया गया है. बता दें कि सरकार द्वारा 29 मार्च 2019 को दवा दुकानदारों को प्रतिदुकान में फार्मासिस्ट की उपलब्धता को लेकर नये नियम बनाये गये थे. 
 
जिसको लेकर संगठन द्वारा विरोध किया जा रहा है. संगठन के लोगों का कहना है कि नियम के आड़ में विभाग द्वारा दवा दुकानदारों को उत्पीड़न और शोषण किया जा रहा है.  बता दें कि बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के द्वारा सात सूत्री मांगों को लेकर तीन दिवसीय बंद का आह्वान किया गया है. 
 
जिसमें फार्मासिस्ट समस्या का जब तक सरकार के द्वारा समाधान नहीं हो जाता, जब तक विभाग द्वारा जारी किये गये सभी लाइसेंसधारियों के साथ इस नियम के आड़ में विभागीय उत्पीड़न एवं शोषण को बंद किया जाये, दवा दुकानों में निरीक्षण, ड्रग एक्ट में फॉर्म 35 के अनुसार होना चाहिए. निरीक्षण के लिए जारी किये गये विभागीय आदेश को अविलंब निरस्त किया जाये. निरीक्षण के क्रम में पहली बार तकनीकी गलतियों के ऊपर यदि दवा दुकानदार द्वारा कुछ गलती को सुधारने का प्रमाण पत्र दिया जाये. 
 
कोई विभागीय दंड नहीं दिया जाये, राज्य के दवा दुकानों ने विभागीय निरीक्षण में एकरूपता एवं पारदर्शिता कायम रखने के लिए नियमानुसार मापदंड निर्धारित किया जाये, अनुज्ञप्ति के नवीनीकरण में केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के आलोक में राज्य औषधी नियंत्रक द्वारा चालान जामा करने में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया जाये तथा विभागीय  निरीक्षण का उद्देश्य सुधार करना होना चाहिए न की उसके नाम पर उत्पीड़न एवं शोषण किया जाये.
 
दुकानदारों ने की हैं सात सूत्री मांगें
शाहपुर : सरकार की नया दवा नीति के विरोध में दवा विक्रेता संघ की शाहपुर इकाई द्वारा तीन दिवसीय बंद का आह्वान किया गया, जिसको लेकर शाहपुर दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष मंटू दुबे द्वारा क्षेत्र के दवा विक्रेताओं के साथ बैठक की गयी. अध्यक्ष ने बताया कि दवा दुकानदारों के लिए फार्मासिस्ट की अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए. 
 
फार्मासिस्ट की अनिवार्यता पहले होती थी, जब कोई दवाओं को मिलाकर दुकानों में ही दवाएं बनायी जाती थी. जब पहले की पद्धति नहीं रही तो पहले की कानून क्यों लागू हो. हमारी सात सूत्री मांगों को सरकार को माननी होगी. बैठक में उपस्थित थोक व खुदरा विक्रेताओं द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार द्वारा जब तक नया दवा नीति को वापस नहीं लिया जाता. 
 
यह बंद प्रदेश इकाई के दिशा निर्देश के अनुसार कार्य करता रहेगा. बैठक में संजय कुमार ठाकुर, राजेंद्र साह, अरविंद तिवारी, दिनेश कुमार, दिनेश कुमार सिंह,  लालनारायण ओझा, मो जमील अख्तर, बब्लू गुप्ता, शशिभूषण ओझा, वकील यादव, बड़क महतो, मनोज कुमार, अजय कुमार सिंह, फिरोज शाह सहित दुकानदार शामिल रहे.
 
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