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  • Jan 25 2020 10:58PM
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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए छह दिन में बनेगा अस्पताल !

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए छह दिन में बनेगा अस्पताल !
वुहान शहर में अस्पताल का निर्माण कार्य
Getty Images

घातक कोरोनावायरस से जूझ रहे चीन के वुहान शहर में छह दिनों के भीतर एक अस्पताल बनाने का काम जारी है, ताकि समय रहते मरीज़ों की इलाज किया जा सके.

चीन में अब तक कोरोनावायरस के 830 मामले दर्ज किए गए हैं. देश में इस वायरस के कारण 41 मौतें हो चुकी हैं.

बताया जाता है कि 110 लाख की आबादी वाले वुहान से ही इस घातक वायरस का फैलना शुरु हुआ था.

वुहान में अस्पतालों की स्थिति फिलहाल चिंताजनक हैं, वहां मरीज़ों की भीड़ लगी हुई है. दवाइयों की दुकानों पर स्टॉक ख़त्म हो चुका है लेकिन मांग थम नहीं रही.

चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार ये नया अस्पताल 1000 बेड वाला होगा.

वुहान शहर में अस्पताल का निर्माण कार्य
Getty Images

चीनी सरकारी मीडिया द्वारा जारी किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि अस्पताल के लिए 25 हज़ार वर्ग मीटर वाले एक इलाके में खुदाई का काम शुरु हो चुका है.

इसी तरह साल 2003 में चीन ने बीजिंग में सार्स वायरस के निपटने के लिए आनन-फानन में एक अस्पताल बनाया था.

हॉवर्ड मेडिकल स्कूल में ग्लोबल हेल्थ एंड सोशल मेडिसिन पढ़ाने वाली जोआन कॉफ़मैन का कहना है, "ये अस्पताल इस ख़ास बीमारी के मद्देनज़र बनाया जा रहा है और इसमें इस वायरस से संक्रमित लोग ही आएंगे. इस कारण यहां सुरक्षा इंतज़ाम मौजूद होंगे."

वुहान शहर में अस्पताल का निर्माण कार्य
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क्याछह दिन में बन पाएगा अस्पताल ?

काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशन्स में ग्लोबल हेल्थ के सीनियर फैलो यानजोंग हुआंग कहते हैं, "बड़ी से बड़ी परियोजना को जल्द से जल्द ख़त्म करने में चीन का रिकॉर्ड रहा है."

वो कहते हैं कि साल 2003 में सात दिनों के भीतर बीजिंग में अस्पताल बनाया गया था और अब शायद उसी रिकॉर्ड को तोड़ने की कोशिश हो रही है. बीजिंग के अस्पताल की तरह वुहान का अस्पताल भी पहले से बनाई गई इमारत बनाने की चीज़ों (प्री-फैब्रिकेटेड मटैरियल) से बनाया जाएगा.

वो कहते हैं, "ऐसे कामों में ये देश लाल-फीताशाही और आर्थिक रुकावटों को पार करने और संसाधन जुटाने में पूरी तरह सक्षम है."

वुहान शहर में अस्पताल का निर्माण कार्य
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हुआंग का कहना है कि इस काम को वक्त पर ख़त्म करने के लिए पूरे देश के अलग-अलग इलाकों से इंजीनियरों को बुलाया गया है.

वो कहते हैं, "इंजीनियरिंग के काम में चीन काफी बेहतर है. तेज़ी से गगनचुंबी इमारतें बनाने में इस देश का कोई सानी नहीं. पश्चिमी देशों को ये बात समझने में मुश्किल होगी लेकिन ये बिल्कुल संभव है."

दवाइयों की आपूर्ति के मामले में वुहान या तो अन्य अस्पतालों से आपूर्ति ले सकता है या सीधे कारखानों से दवाइयां मंगवा सकता है.

शुक्रवार को ग्लोबल टाइम्स ने पुष्टि की थी कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के 150 स्वास्थ्यकर्मी वुहान पहुंच चुके हैं.

हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि नया अस्पताल बनने के बाद वो यहां काम करेंगे या नहीं.

कोरोनावायरस की जांच
EPA
चीन में एयरपोर्ट और सभी महत्वपूर्ण जगहों पर कोरोनावायरस के संक्रमण के लक्षणों की जांच की जा रही है

सार्स महामारी के दौरान क्या हुआ?

साल 2003 में सार्स बीमारी के लक्षणों से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए बीजिंग में ज़ियोतांगशान अस्पताल बनाया गया था.

इसके निर्माण का काम सात दिनों में किया गया था. कथित तौर पर इसने किसी अस्पताल के सबसे तेज निर्माण के लिए विश्व रिकॉर्ड बनाया था.

चाइना डॉट कॉम के अनुसार इस अस्पताल को बनाने के लिए लगभग 4,000 लोगों ने दिन-रात काम किया था.

इस अस्पताल में एक एक्स-रे कमरा, सीटी रूम, गहन-देखभाल के लिए इंटेन्सिव केयर यूनिट और एक प्रयोगशाला थी. अस्पताल के प्रत्येक वार्ड में एक बाथरूम था.

बनने के दो महीनों के भीतर देश में मौजूद कुल सार्स रोगियों का सातवां हिस्सा इस अस्पताल में था. देश की मीडिया में इसे "चिकित्सा के इतिहास में चमत्कार" कहा था.

कोरोनावायरस के मरीज़ का इलाज
EPA
वुहान के एक अस्पताल में कोरोनावायरस के मरीज़ का इलाज करते एक डॉक्टर

जोआन कॉफ़मैन कहती हैं, "स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बनाने का आदेश दिया था और दूसरे अस्पतालों से नर्सों और मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं के लगे अन्य डॉक्टरों को यहां काम पर लगाया गया था. उनके पास संक्रामित मरीज़ों की पहचान, ख़ासकर सार्स संक्रमित और मरीज़ों के इलाज के लिए ज़रूरी दिशानिर्देश थे. "

वो कहती हैं कि सार्स महामारी के दौरान, संगठन और लागत के खर्चे स्थानीय क्षेत्रों ने पूरे किए, लेकिन सरकार ने उनके लिए ख़ास सब्सिडी व्यवस्था की जिसके तहत कर्मचारियों के वेतन से लेकर निर्माण कार्य तक के खर्चों की व्यवस्था की गई थी.

कोरोनावायरस
EPA

कॉफ़मैन कहती हैं, "मेरे लिए ये सोचना भी मुश्किल है कि इसका भार फिलहाल वुहान सरकार पर पड़ने वाला है, लेकिन ये उनके लिए अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता है."

हुआंग बताते हैं कि, "महामारी के ख़त्म होने के बाद बीजिंग के अस्पताल को चुपचाप खाली कर दिया गया था."

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