.. इसलिए डूबी टीम इंडिया की लुटिया

By Prabhat Khabar Digital Desk
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इन दिनों भारतीय क्रिकेट टीम चौतरफ़ा आलोचनाओं से घिरी है. वजह है इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ में 1-3 से करारी मात.

25 अगस्त से एकदिवसीय सिरीज़ शुरू होने वाली है. लेकिन ये सवाल भी बराबर उठ रहे हैं कि भारतीय बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी में कहां और कैसे चूक हुई.

इन्हीं सवालों से टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ियों के कोच भी जूझ रहे हैं. उनके अनुसार भारतीय टीम की अनुभवहीनता और देसी घरेलू पिचों का केवल बल्लेबाज़ों के अनुरूप होना मुख्य कारण रहा.

राजकुमार शर्मा, विराट कोहली के कोच

भारत के बल्लेबाज़ जेम्स एंडरसन और उनके साथियों की 140 से 145 की रफ़्तार से सही लाइन और लैंग्थ के साथ स्विंग करती गेंदों का सामना नहीं कर पाए.

इसके अलावा पूरी भारतीय बल्लेबाज़ी में समर्पण की भावना की कमी भी रही. शुरुआत में एंडरसन और जेम्स ब्रॉड ने जो दबाव बनाया, उसी को बाद में वोक्स और क्रिस जॉर्डन ने बनाए रखा.

उन्हें पता था कि भारतीय बल्लेबाज़ तेज़ गेंदों को नहीं खेल पाते.

भारत में रणजी ट्रॉफी में पहले ही दिन लंच के बाद से विकेट बल्लेबाज़ों के सहायक हो जाते है. निश्चित रूप से इसके लिए बीसीसीआई ज़िम्मेदार है जो स्पिन के लिए मददगार घरेलू विकेट बनवाता है.

इसके अलावा हमारे स्टार खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी खेलते नहीं है, बस एकदिवसीय और टवेंटी-टवेटी क्रिकेट खेलते है. ऐसे में टेस्ट मैच की बुनियादी तकनीक की कमी विदेशों में कमी बनकर उभरती है.

रोबिन सिंह जूनियर, पूर्व टेस्ट तेज़ गेंदबाज़

इशांत शर्मा और भुवनेश्वर कुमार ने दो-तीन अवसरों पर अच्छी गेंदबाज़ी की लेकिन बाद में वह भी अपना असर खो बैठे.

भारतीय गेंदबाज़ों की ना तो दिशा ही सही रही और ना ही उन्होंने उस तरह से गेंद को स्विंग और कट कराया जैसे इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने किया.

इंग्लैंड में कैसे गेंदबाज़ी की जाए, इसके लिए वहां का अनुभव जरूरी है जो माइनर काउंटी खेलकर आता है.

भारत के विकेटों पर चाहे कोई कितना भी बेहतर गेंदबाज़ हो वह इंग्लैंड जाकर एकदम कामयाब नहीं हो सकता.

अब यही हाल बल्लेबाज़ों का है. जो भारत में 200-300 रन बनाते हैं, वहीं उनसे सजी पूरी टीम इंग्लैंड में 30 ओवरों में ऑलआउट हो रही है.

मदन शर्मा, कोच शिखर धवन

शिखर अच्छी शुरूआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके लेकिन बुरा हाल तो पूरी टीम का रहा.

भारतीय टीम में अनुभव की कमी खली. भारतीय बल्लेबाज़ वैसे भी उन पिचों पर नहीं खेलते जहां 150 रन बनते हों जैसे मोहाली या हिमाचल प्रदेश के मैदान पर, वह तो वहां खेलते हैं जहां 750 रन बनते हैं.

इसके अलावा इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने चाहे पहला ओवर किया या फिर पचासवां, सही लाइन और लैंग्थ से किया.

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