क्लास रूम में कैमरे लगाने से क्या हासिल होगा?

By Prabhat Khabar Digital Desk
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क्लास रूम में कैमरे लगाने से क्या हासिल होगा?
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आने वाले तीन महीनों में दिल्ली का हर सरकारी स्कूल 'बिग-बॉस का घर बन जाएगा.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीन महीने के भीतर हर क्लास रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने की घोषणा की है.

ये घोषणा करते हुए केजरीवाल ने कहा, 'इससे हर अभिभावक मोबाइल पर किसी भी समय अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाई करते हुए देख सकेंगे. सिस्टम में पारदर्शिता आएगी. साथ ही बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी.'

सीसीटीवी से बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी?

ये फ़ैसला ऐसे वक्त में आया है, जब कुछ वक्त पहले ही गुरुग्राम के रेयान स्कूल में सात साल के प्रद्युम्न की हत्या और दिल्ली के एक स्कूल में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी.

लेकिन क्या सीसीटीवी कैमरा लग जाने से बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी और क्या ये मां-बाप पर एक और दबाव डालने जैसा नहीं?

ये सवाल अहम इसलिए है, क्योंकि प्रद्युम्न की हत्या वॉशरूम में हुई.

अमूमन बच्चों को स्कूल भेजकर मां-बाप बेफिक्र हो जाते हैं कि बच्चा टीचर्स की निगरानी में है. लेकिन इस फ़ैसले से कहीं स्कूल की ज़िम्मेदारी भी अभिभावकों पर ही तो नहीं आ जाएगी?

एक बड़ा सवाल ये भी है कि यूं तो हम बच्चों को स्वस्थ माहौल देने के बात करते हैं, ऐसे में बच्चे को क़रीब आठ घंटे कैमरे की निगरानी में रखना कितना सही होगा?

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AAP का तर्क क्या है?

आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष मानते हैं कि ये एक अच्छी पहल है, सीसीटीवी कैमरे लग जाने से बच्चों को लगेगा कि उन पर किसी की नज़र है तो वो ज़्यादा अनुशासित रहेंगे. साथ ही बेहतर तरीक़े से पढ़ाई करेंगे.

  • मुझे नहीं लगता कि इससे बच्चों की ग्रोथ पर कोई असर पड़ेगा बल्कि इससे बच्चा खुद को ज़्यादा कॉन्फ़िडेंट महसूस करेगा. अभिभावकों को भी काफ़ी सुविधा रहेगी.
  • आज के समय में बच्चों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण हो गई है और जिस तरह से बीते दिनों कुछ मामले सामने आए, तो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी हो जाता है. मुझे नहीं लगता कि ये कोई डराने वाली बात बल्कि इससे बच्चों को बढ़ावा मिलेगा कि वो और बेहतर तरीक़े से प्रदर्शन करें.
  • स्कूल में कैमरे लग जाने से आपराधिक घटनाओं में कमी आएगी क्योंकि कोई भी शख़्स कुछ भी ग़लत करने से पहले सोचेगा.
  • इससे मां-बाप पर कोई अतिरिक्त ज़िम्मेदारी नहीं आएगी. साथ ही पढ़ाई पर भी बेहतर असर होगा.'
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साइकोलॉजिस्ट्स और अभिभावकों का क्या कहना है?

डॉ नीतू राणा मानती हैं कि मुमकिन है इससे बच्चे की ग्रोथ पर असर न पड़े लेकिन हो सकता है कि वो उस दौरान अच्छा बना रहे और जैसे ही कैमरे की नज़र से दूर हो कुछ ऐसा कर जाए जो नुकसानदेह हो.

हालांकि डॉक्टर प्रवीण त्रिपाठी का मानना है कि यह एक अच्छा क़दम है.

गरिमा दो बच्चियों की मां हैं. उनकी बड़ी बेटी ग्यारहवीं में है और छोटी बेटी पांचवी में. दोनों सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं.

गरिमा का कहना है कि ये फ़ैसला सही है, हमें पता चलता रहेगा कि स्कूल में कितनी पढ़ाई हो रही है और टीचर बच्चों के साथ कैसे हैं?

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'दूसरे कामों पर होगा असर'

गरिमा कहती हैं, 'जब तक लोगों के पास मोबाइल नहीं था तो उनके पास बहुत सा खाली वक्त होता था. सबके हाथ में मोबाइल आ गया, उसके बाद इंटरनेट, तो आधा वक्त इसी में निकल जाता है. अब जबकि ये पता है कि हम अपने बच्चे को देख सकते हैं तो हर थोड़ी देर में देखते रहेंगे.'

दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल में पांचवी क्लास में पढ़ने वाले चिन्मय के पिता मानते हैं, 'हर क्लास रूम में सीसीटीवी कैमरा लगाना सही है. इससे बच्चों के साथ-साथ टीचरों पर भी नज़र रखी जा सकेगी. आजकल के बच्चे बहुत होशियार हैं. वो आपके सामने सीधे बने रहेंगे और मौक़ा मिलते ही कुछ कर बैठेंगे. इससे अपराध पूरी तरह से रुकेंगे नहीं.'

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'भरोसे पर आधारित शिक्षा क्षेत्र'

वहीं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस क़दम को सही नहीं मानते हैं.

द प्रिंट को दिए इंटरव्यू में आदित्य बिड़ला ग्रुप के शैक्षणिक विंग के मुख्य शिक्षा अधिकारी श्यामलाल गांगुली ने कहा कि अगर आप सिद्धांतों की बात करते हैं तो यह कदम तो बिल्कुल ही असैद्धांतिक है. अगर हम अपने अध्यापकों पर भरोसा नहीं कर सकते तो जो वे हमारे बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उस पर कैसे करेंगे?

श्यामलाल गांगुली मानते हैं कि शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जो पूरी तरह भरोसे पर आधारित है.

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