RSS ने कहा-अगर 1947 में संघ मजबूत होता, तो देश का बंटवारा नहीं होता; कॉकरोच जनता पार्टी पर भी दी राय

RSS Sunil Ambekar : आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने नागपुर में देश के कई अहम मुद्दों पर मीडिया से बात की. उन्होंने इंटरनेट पर वायरल पेज कॉकरोच जनता पार्टी पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि हम लोकतांत्रिक देश में रहते हैं, जहां सबको अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने कहा कि हमें अपने देश के युवाओं पर भरोसा है, वह संविधान के अनुसार ही काम करते हैं. इस मौके पर सुनील आंबेकर ने देश के बंटवारे पर भी चर्चा की.

RSS Sunil Ambekar : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि अगर 1947 में संघ मजबूत होता तो देश का बंटवारा नहीं होता. एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार सुनील आंबेकर ने मीडिया के साथ बात करते हुए कहा कि बंटवारा बहुत ही दर्दनाक घटना थी, अगर उस वक्त संघ उतना मजबूत होता, जितना आज है, तो कभी भी देश का बंटवारा नहीं होता.

बंटवारा बहुत ही दर्दनाक घटना थी

सुनील आंबेकर ने कहा कि बंटवारा इतिहास की ऐसी घटना है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस दुखद घटना का असर आज भी देश में दिखता है. उन्होंने कहा कि अगर संघ आजादी के वक्त मजबूत होता, तो कभी भी देश का बंटवारा नहीं होता. बावजूद इसके संघ ने हिंदुओं का बचाव किया है और उनके पुनर्वास की कोशिश की है. उस वक्त देश में आम जनता के मन में सिस्टम के प्रति गुस्सा था.

कॉकरोच जनता पार्टी पर संघ ने कहा-सबको अपनी बात रखने का हक

इंटरनेट पर छाई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि अलग-अलग राय होना और जनता के बीच चर्चा होना, लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है और इसे चिंता की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. सुनील आंबेकर ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में सभी आवाजों और भावनाओं को जगह देने की क्षमता है. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं पर उन्हें भरोसा है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, आंबेकर ने कहा कि हम एक जागरूक समाज का हिस्सा हैं जहां सबकी अपनी-अपनी राय है. बावजूद इसके हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं और उसकी प्रक्रियाओं के अनुसार ही देश चलता है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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