आचार्य चाणक्य ने जीवन की सच्चाइयों को सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में समझाया है. चाणक्य नीति में बताई गयी बातें आज भी लोगों का सही और गलत का अंतर बतलाती है साथ ही जीवन से जुड़ी घरी बातें बतलाती है. चाणक्य नीति में उन्होंने विद्या को कामधेनु के समान बताया है. आखिर विद्या को कामधेनु क्यों कहा गया? क्या सच में ज्ञान हर परिस्थिति में फल देता है? चाणक्य नीति के श्लोक से जानें –
चाणक्य नीति का श्लोक
कामधेनुगुणा विद्या ह्यकाले फलदायिनी।
प्रवासे मातृसदृशी विद्या गुप्तं धनं स्मृतम्॥”
अर्थ
इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि विद्या कामधेनु के समान गुणों वाली होती है, जो हर समय फल देने वाली है. जैसे कामधेनु से व्यक्ति की हर इच्छा पूर्ण होती है, वैसे ही विद्या व्यक्ति को हर परिस्थिति में लाभ देती है.
प्रवास (विदेश या घर से दूर) में विद्या मां के समान रक्षा करती है. साथ ही, विद्या को गुप्त धन कहा गया है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता.
जीवन में शिक्षा का महत्व
चाणक्य ने विद्या (ज्ञान) को कामधेनु कहा है. कारण स्पष्ट है – धन, संपत्ति या आभूषण छिन सकते हैं, लेकिन ज्ञान हमेशा व्यक्ति के साथ रहता है. संकट के समय वही मार्गदर्शन करता है, सम्मान दिलाता है और सफलता का द्वार खोलता है.
विद्या ऐसा धन है जो खर्च करने से बढ़ता है. यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है और समाज में प्रतिष्ठा दिलाती है. इसलिए चाणक्य के अनुसार, यदि जीवन में स्थायी सुख, सम्मान और सुरक्षा चाहिए.
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