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पतंजलि अस्पताल में कोरोना संक्रमितों का आयुर्वेदिक धुएं, कोरोनिल आदि से हो रहा इलाज, सोशल मीडिया पर वीडियो देख उलझन में लोग

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
आयुर्वेदिक धुआं देता कर्मी
आयुर्वेदिक धुआं देता कर्मी
सोशल मीडिया

हरिद्वार : कोरोना संक्रमित लोगों में गंभीर और खतरनाक सामान्य लक्षण सांस की तकलीफ या सांस लेने में कठिनाई है. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन एक मूल्यवान वस्तु बन गयी है, जिसकी कई गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ती है. इसी बीच, पतंजलि के कोविड-19 अस्पताल से एक वीडियो पतंजलि आयुर्वेद के सह संस्थापक ने ट्वीट किया. इसमें आयुर्वेदिक स्मोक करते दिखाया गया है. इससे कई लोग उलझन में थे.

हरिद्वार स्थित पतंजलि के एक प्रतिनिधि के मुताबिक, स्मोक कंटेनर में एक आयुर्वेदिक मिश्रण था, जो वार्डों में ऑक्सीजन बढ़ायेगा. वीडियो में एक आदमी रस्सी के सहारे बर्तन में मिश्रण के धुएं को मरीजों के बीच से गुजार रहा है. यहां कई बिस्तरों पर मरीज भी उपस्थित हैं. साल 2021 की शुरुआत में ही पतंजलि आयुर्वेद ने उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर हरिद्वार में 150 बेड का कोविड-19 केयर अस्पताल स्थापित किया था.

अस्पताल के उद्घाटन के समय योग गुरु बाबा रामदेव ने भी आश्वासन दिया था कि सभी बिस्तरों के लिए ऑक्सीजन सुविधा है. साथ ही गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू की बात कही थी. हालांकि, उद्घाटन के समय की खबरों के मुताबिक, अस्पताल में 10 आपातकालीन बेड और चार वेंटिलेटर की बात कही गयी थी. हालांकि, उसके बाद से लगातार विरोधी रिपोर्ट ही सामने आयी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पतंजलि के कोविड-19 केयर अस्पताल में कई असामान्य उपचार का उपयोग किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि शिरोधारा का उपयोग प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. इसमें मरीजों पर चिकित्सीय तरल पदार्थ का ड्रिप किया जा रहा है. वहीं, सभी मरीजों को त्वचा की समस्याओं का इलाज करने के लिए कोरोनिल दी जा रही है.

पतंजलि कोविड-19 केयर अस्पताल की सुविधाओं के बारे में किये गये दावों के संबंध में भी भ्रामक सूचनाएं सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि अस्पताल में आईसीयू बेड कार्य नहीं कर रहे हैं. वहीं, अस्पताल के 150 बेड में से मात्र 50 बेड ही ऑक्सीजन की आपूर्ति के साथ काम कर रहे हैं. वहीं, अस्पताल में चिकित्सक, तकनीशियन और वार्ड ब्वॉय की भी कमी है. गंभीर रूप से कोविड-19 संक्रमितों के अस्पताल पहुंचने पर उन्हें रेफर कर दिया जा रहा है.

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