kartavya film:अभिनेता सैफ अली खान की फिल्म कर्त्तव्य ने ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स पर दस्तक दे दी है. इस फिल्म में सैफ रस्टिक पुलिस ऑफिसर के देशी अवतार में नजर आ रहे हैं. उनके इस किरदार ,उससे जुड़ी तैयारी और फिल्म से जुड़े पहलुओं पर उन्होंने फिल्म के ट्रेलर लांच पर बातचीत की.बातचीत के प्रमुख अंश
कर्तव्य फ़िल्म को हाँ कहने की क्या वजह थी ?
निश्चित तौर पर इसकी कहानी और किरदार मुझे बहुत अच्छा लगा . जब इंसान दबाव से गुजरता है ,तब उसकी असली पहचान सामने आती है और यह किरदार अलग-अलग तरह के दबावों से गुजरता है, चाहे वह काम से जुड़ा हो या परिवार से। मुझे यह बहुत पहलू बहुत दिलचस्प लगा. मैं स्क्रिप्ट पढ़ते हुए सोच रहा था कि मेरा किरदार इससे कैसे बाहर निकलेगा, वह क्या फैसले लेगा?’ मुझे लगा कि यह बहुत ही बढ़िया है और कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। पुलकित एक शानदार निर्देशक हैं.
फिल्म में आपका किरदार एक ख़ास लहजे में बात कर रहा है ,उसे सीखने का अनुभव कैसा रहा?
मैंने वैसा एक्सेंट पटौदी में सुना हुआ था. इसके बावजूद कहूंगा कि लहजा सीखना मुश्किल था. आमतौर पर किरदार निभाते-निभाते धीरे-धीरे आ जाता है, लेकिन मुझे बहुत प्रैक्टिस करनी पड़ती है. डबिंग के दौरान भी मैं लगातार सुधार करता हूं.मैंने तो डबिंग के बाद निर्देशक पुलकित को बोला एक बार फिर करते हैं. उन्होंने कहा कि मैंने परफेक्ट डबिंग की है. मैं इस तरह के देशी किरदारों की भाषा को आसानी से नहीं कर पाता हूं, मुझे इस पर मेहनत करनी पड़ती है. कुछ नया सीखना मजेदार होता है. अर्बन किरदार मेरे लिए आसान होते हैं. देशी किरदार करना मुश्किल रहता है.
फिल्म के ट्रेलर में आपके किरदार और महाभारत के अभिमन्यु के बीच समानता बताई जा रही है ?
महाभारत में अभिमन्यु की कहानी मेरी सबसे पसंदीदा है. जिस तरह से वह मुश्किलों में फंसा हुआ था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि उनसे कैसे बाहर निकले. वैसे ही पवन है. उसके कर्त्तव्य के सामने भी उसका अपना दोस्त और पिता है. हम चाहते हैं कि वह मुश्किलों से बाहर निकले, यह मुश्किल है और कोई नहीं जानता कि यह कैसे होगा. यही अभिमन्यु और पवन के बीच का यही जुड़ाव है.
किसी फिल्म के लिए ही सही पुलिस की वर्दी पहनने पर आपको कितनी ज़िम्मेदारी महसूस होती है?
मैं बताना चाहूँगा कि विशाल भारद्वाज ने ‘दिल चाहता है’ देखने के बाद मुझे ‘ओमकारा’ ऑफर की थी. मैं कह सकता हूं कि लोगों ने मुझे गंभीर और रोमांटिक दोनों तरह की भूमिकाओं में पसंद किया है. मुझे याद है कि ‘तू अनाड़ी मैं खिलाड़ी’ के क्लाइमेक्स सीन में मैं दो मिनट के लिए पुलिसवाले का रोल कर रहा था. मुझे याद है कि निर्देशक ने मुझसे कहा था, ‘फिर कभी पुलिसवाले का रोल मत करना, तुम नहीं कर सकते, तुम बहुत खराब हो, तुममें वो गंभीरता नहीं है. तुम इसे कॉमेडी बना देते हो.’ अब मैं कई फिल्मों में पुलिस वाला बन चुका हूं. सेक्रेड गेम्स से कर्तव्य तक तो यह कमाल की बात है कि आप लगातार काम करते रहते हैं, अभ्यास करते रहते हैं, सीखते रहते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं. यह एक शानदार अनुभव है क्योंकि मैंने इन सालों में बेहतरीन निर्देशकों से सीखकर खुद को निखारा है.जहाँ तक बात वर्दी पहनने की है तो जब आप वर्दी पहनते हैं तो आपको गर्व, ज़िम्मेदारी और ताकत का एहसास होता है. मैं पुलिसवालों की बहुत इज़्ज़त करता हूं.
शाहरुख़ खान की कम्पनी रेड चिलीज फिल्म की निर्माता है क्या शाहरुख़ से फिल्म को लेकर कोई बातचीत हुई ?
इस फ़िल्म के सिलसिले में शाहरुख खान से मेरी बहुत छोटी सी बातचीत हुई थी. शाहरुख खान के साथ मेरा बहुत अच्छा और लंबा रिश्ता रहा है, मैं कई मायनों में उन्हें अपना आदर्श मानता हूं. उन्होंने कहा कि एक बहुत अच्छी स्क्रिप्ट है, और मैं चाहता हूं कि तुम सुनों और इसमें काम करो. मैंने स्क्रिप्ट सुनी और निर्देशक से मिला. फिल्म पूरी होने पर उन्होंने कहा कि यह एक बहुत अच्छी फिल्म बनकर तैयार हुई है.वे बहुत खुश थे. बस इतना ही. सेट पर वह कभी नहीं आये क्योंकि अच्छे निर्माता अपनी फ़िल्मों के निर्देशक पर भरोसा करते हैं और चाहते हैं कि वह पूरी आजादी से काम करें और अपनी मनचाही फिल्म बनाएं.
ये फिल्म कर्त्तव्य की बात करती है,एक कलाकार का कर्तव्य क्या है?
किरदार को यथासंभव ईमानदारी से निभाने का प्रयास करना, उसकी कमियों साथ. कलाकार का मतलब सिर्फ किरदार से जुड़ी अच्छी बात ही दिखाना नहीं होता है, बल्कि वास्तविक चीजें दिखाने का प्रयास करना है.
निजी जिंदगी के कौन से कर्त्तव्य हैं, जो आप नहीं भूलते हैं?
बच्चो की जिम्मेदारी.उनके स्कूल से जुडी जिम्मेदारियां. परिवार की जिम्मेदारी.अपनी माँ से जुड़ी जिम्मेदारी.मैं इन जिम्मेदारियों को किसी भी हाल में पूरा करना चाहता हूं, हाल ही में माँ को मेरे पिता से जुड़े एक क्रिकेट टॉक में जाना है.वह नहीं जा पायी थी तो मैं उनकी जगह पर गया था.
आप अलग अलग तरह के किरदार कर रहे हैं लेकिन एक वक़्त था जब इंडस्ट्री ने आपको टाइपकास्ट कर दिया था क्या आपको उसका अफ़सोस होता है ?
काम होना ही बहुत बड़ी बात है. कभी-कभी दर्शक आपको एक खास अंदाज में देखना पसंद करते हैं. उस वक़्त लोगों में मेरी एक पसंदीदा छवि थी.मुझे उससे कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन मैं खुशकिस्मत हूं कि लोगों ने मुझे अलग-अलग भूमिकाएँ निभाने का भी मौका दिया और दर्शकों ने मुझे उसमें भी पसंद किया.
