Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi 2: ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में एक बार फिर परिवार के रिश्तों में नया मोड़ देखने को मिला. एपिसोड की शुरुआत तुलसी और वैष्णवी की बातचीत से होती है. तुलसी, वैष्णवी को बताती हैं कि पार्थ बचपन से बहुत आराम और प्यार में पला-बढ़ा है. उसे कभी किसी चीज के लिए ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा, इसलिए वह मुश्किल हालात को संभालना नहीं सीख पाया. तुलसी यह भी मानती हैं कि उन्होंने पार्थ को रिश्तों और भावनाओं को सही तरीके से समझना नहीं सिखाया. तुलसी की बात सुनने के बाद वैष्णवी पार्थ से बात करती है और दोनों के बीच की नाराजगी कम हो जाती है. दोनों साथ में केक भी काटते हैं, लेकिन पार्थ अभी भी अंदर से परेशान रहता है.
पार्थ का दर्द सुनकर तुलसी ने दिया साथ
इसके बाद तुलसी पार्थ के कमरे में जाती हैं. वहां पार्थ अपनी परेशानी उनके सामने रखता है. वह कहता है कि रिओ को पावर ऑफ अटॉर्नी मिलने से नंदिनी बहुत दुखी हैं. पार्थ खुद को भी कमजोर महसूस करता है. तब तुलसी उसे समझाती हैं कि गुस्सा किसी समस्या का हल नहीं है. वह उसे धैर्य और समझदारी से काम लेने की सलाह देती हैं. तुलसी की बातें सुनकर पार्थ थोड़ा शांत हो जाता है.
करण के आते ही शुरू हुई नई बहस
कुछ देर बाद करण घर पहुंचता है. परिवार के कई सदस्य उसे देखकर खुश हो जाते हैं. इस बीच पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर फिर चर्चा शुरू हो जाती है. करण साफ कहता है कि रिओ के आइडिया कंपनी के लिए अच्छे थे और इसी वजह से वह इस जिम्मेदारी का हकदार है. करण की यह बात सुनकर नंदिनी नाराज हो जाती हैं और फैसले पर सवाल उठाती हैं.
नंदिनी ने सबके सामने बताई बड़ी बात
गुस्से में नंदिनी परिवार के सामने एक बड़ा खुलासा कर देती हैं. वह कहती हैं कि शांति निकेतन और परिवार के कारोबार को संभालने में करण का बड़ा योगदान है. नंदिनी बताती हैं कि करण हर महीने पैसे भेजकर कारोबार के नुकसान को पूरा करता है. यह बात सुनकर घर के सभी लोग चुप हो जाते हैं. आने वाले एपिसोड में करण, नंदिनी को समझाएगा कि रिओ उम्र और अनुभव दोनों में पार्थ से आगे है, इसलिए तुलसी का फैसला गलत नहीं है.
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