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UP Election 2022: बीजेपी राज में गरीबों की जिंदगी के साथ खिलवाड़, 'सबका साथ' नारे से गरीब गायब- अखिलेश यादव

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी राज में गरीबों के साथ खिलवाड़ आम बात है. उसके 'सबका साथ' नारे से गरीब गायब हैं. इसलिए उनके अनाज पर भी डाका पड़ने लगा है.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Lucknow
Updated Date
UP Election 2022: पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
UP Election 2022: पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
फाइल फोटो

UP Election 2022: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा राज में गरीबों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ आम बात है. उसके ‘सबका साथ‘ नारे में गरीब गायब हैं. इसलिए गरीबों का पेट भरने वाले अनाज पर भी डाका पड़ने लगा है. अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य भंडारण निगम में करोड़ों की धांधली सामने आई है. 23,148 बोरे अनाज का सीतापुर के नेरी कला केन्द्र पर गबन होने की रिपोर्ट है, जिसकी कीमत सात से आठ करोड़ रुपये की बताई जाती है. इस डिपों से गरीबों में बंटने वाला चावल भी खराब किस्म का पाया गया है. 20-20 किलों की बोरियों में भरा गया चावल का रंग भी पीला बताया गया.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, सत्ता संरक्षित घोटालेबाजों ने गरीब बच्चों के निवाले को भी नहीं छोड़ा. मिड-डे-मील योजना में भ्रष्टाचार में उत्तर प्रदेश नम्बर एक पर है. बच्चों को पौष्टिक आहार देने की जो व्यवस्था समाजवादी सरकार में शुरू हुई थी, भाजपा सरकार ने आते ही उसमें भी घोटाला कर दिया. कानपुर में भीतरगांव के एकीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालय में जहरीला मिड-डे-मील खाने से 50 बच्चों की हालत बिगड़ गई. ऐसी शिकायतें अन्य स्थानों से भी मिलती रही हैं.

गरीबों को कम्बल बांटने की सुध अफसरों को नहीं है

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, गरीबों को राहत का झूठा दिखावा करने वाली भाजपा सरकार की संवेदनशून्यता चरम पर है. जाड़े में गरीब ठिठुर रहा है. उन्हें कम्बल बांटने की सुध अफसरों को नहीं है. अस्पतालों में बनाए गए रैनबसेरों में अव्यवस्था के चलते लोग उसमें ठहरने से परहेज करते हैं. यही भाजपा का अमानवीय आचरण है.

केवल कागजों में होती है रैन-बसेरों की सफाई

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, तमाम रैन बसेरों में साफ-सफाई केवल कागजों में होती है. गरीबों को फटे पुराने गद्दों में लेटना पड़ता है. वहीं, अस्पतालों में तो हालत और खराब है. मरीजों के रिश्तेदार वार्ड के बाहर ही रात बिताने को मजबूर हैं. तीमारदारों को ठंड से बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है. जो हालात हैं, उनमें कोरोना प्रोटोकॉल के पालन की तो उम्मीद ही नहीं की जा सकती है. संक्रमण का खतरा तो हर जगह बना हुआ है.

Posted By: Achyut Kumar

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Published Date

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