NEET UG 2026 Success Story: एक ही परिवार के 3 बच्चों ने NEET UG 2026 की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है. यह कहानी बिहार के सहरसा जिले के एक साधारण परिवार की है. इस परिवार के तीन भाई-बहन रजनीश कुमार, प्रह्लाद कुमार और उनकी बहन साक्षी ने एक साथ NEET परीक्षा क्रैक की है.
तीनों भाई-बहन कोटा या दिल्ली जैसे शहरों में महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे, ऐसे में उनलोगों ने घर के पास एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से पढाई की और सफलता प्राप्त किया.
NEET Rank and Score: क्या थी उनकी रैंक व स्कोर?
NEET UG 2026 में रजनीश कुमार ने 633 मार्क्स और AIR 3122 के साथ NEET UG 2026 क्रैक किया है. वही साक्षी कुमारी ने 601 मार्क्स व AIR 9672 और प्रह्लाद कुमार ने 565 मार्क्स और 26751 हासिल किया है.
| छात्र का नाम | प्राप्त अंक (Marks) | ऑल इंडिया रैंक (AIR) |
| रजनीश कुमार | 633 | 3122 |
| साक्षी कुमारी | 601 | 9672 |
| प्रह्लाद कुमार | 565 | 26751 |
Education Qualification: क्या है उनकी एजुकेशन क्वालिफिकेशन?
रजनीश और प्रह्लाद, दोनों भाइयों ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. वहीं साक्षी ने बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) से पढ़ाई की. अलग-अलग एजुकेशनल बैकग्राउंड होने के बावजूद, तीनों का डॉक्टर बनने का सपना एक ही था. तीनों भाई बहनों ने सहरसा के एक स्थानीय कोचिंग संस्थान, 'प्रगति क्लासेस' से NEET परीक्षा की तयारी की.
ये भी पढ़ें: गरीबी नहीं रोक सकी सपना, सब्जी बेचने वाले की बेटी ने किया NEET क्रैक
Family Background: क्या है उनका फैमिली बैकग्राउंड?
वे एक साधारण परिवार से बिलॉन्ग करते हैं. उनके पिता रोहित आनंद किराने की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, जिससे परिवार का गुजारा चलता है. सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण, बच्चों को कोटा या दिल्ली जैसे कोचिंग हब में भेजना परिवार की क्षमता से बाहर था. मीडिया से बातचीत में उनकी मां पूनम देवी ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को ईमानदारी से बता दिया था, कि वे उन्हें कोचिंग के लिए जिले से बाहर भेजने का खर्च नहीं उठा सकते. हालांकि वे बच्चों की पढ़ाई में मदद के लिए हर संभव प्रयास करते थे.
NEET Journey Motivation: क्या थी उनकी मोटिवेशन?
तीनों भाई बहनों के लिए उनके माता-पिता प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत थे. मीडिया के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि तैयारी के दौर में उनके माता-पिता ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें याद दिलाया कि सच्ची कोशिश कभी बेकार नहीं जाती. इस उपलब्धि से उनके घर में जश्न का माहौल है. रिश्तेदार, पड़ोसी और शुभचिंतक परिवार को बधाई देने आ रहे हैं. तैयारी के दौरान उनके शिक्षकों का भी उन्हें पूरा सपोर्ट मिला था.
ये भी पढ़ें: खेत की मिट्टी से निकला डॉक्टरी का सपना, किसान के बेटे को NEET में 617 मार्क्स
