Jet Airways के संस्थापक नरेश गोयल ने अनीता गोयल से मुलाकात के 9 साल बाद की थी शादी, आज हुआ लव-स्टोरी का अंत

जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल की पत्नी का निधन कैंसर से हो गया. दोनों ने मुलाकात के नौ वर्ष बाद शादी की थी.

Jet Airways : जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल की पत्नी अनीता गोयल का बृहस्पतिवार को निधन हो गया, वे कैंसर से पीड़ित थी. उनका निधन 16 मई को अहले सुबह हुआ. उनकी उम्र 70 वर्ष थी. हाल ही में उन्हें कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी ताकि वे अपनी पत्नी के साथ रह पाएं. गौरतलब है कि नरेश गोयल खुद भी कैंसर से पीड़ित हैं और अस्पताल में भर्ती भी हैं.

नरेश गोयल को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया था


नरेश गोयल और अनीता गोयल एक दूसरे से 1979 में मिले थे. दोनों सहकर्मी थे. मुलाकात के नौ वर्ष बाद इन्होंने शादी की थी. इनके दो बच्चे हैं. परिवार के करीबी मित्रों ने यह सूचना दी कि अनीता गोयल का जब निधन हुआ, उनके परिवार के लोग मौजूद थे. ज्ञात हो कि नरेश गोयल को ईडी ने 2023 में मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया था. उन्होंने केनरा बैंक द्वारा दिये गए 538.62 करोड़ के ऋण की हेराफेरी की थी. अनीता गोयल को भी नवंबर 2023 में गिरफ्तार किया गया था जब जांच एजेंसी ने इस केस में चार्जशीट दाखिल किया था, लेकिन उनके स्वास्थ्य की स्थिति और उम्र को देखते हुए उसी वक्त बेल दे दी गई थी.

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बंद पड़ी है जेट एयरवेज

नरेश गोयल ने जेट एयरवेज की शुरुआत की थी और कर्ज संकट में फंसने से पहले तक यह देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनी बन चुकी थी. कंपनी के दिवालिया होने के बाद से इसे फिर से चालू करने की कोशिशें तो बहुत हुईं, लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई. जेट एयरवेज का परिचालन 2019 में बंद किया गया था, बाद में इसका परिचालन फिर से शुरू करने के लिए 2020 एक निवेश कंपनी कलरॉक ने टेक ओवर कर लिया, लेकिन वित्तीय समस्याओं की वजह से अब तक इसका परिचालन शुरू नहीं हो पाया है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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