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बोकारो के लुगू बुरू में आयोजित संताल सरना धर्म महासम्मेलन में उठायी गई सरना कोड लागू करने की मांग

Updated at : 10 Nov 2022 8:53 AM (IST)
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बोकारो के लुगू बुरू में आयोजित संताल सरना धर्म महासम्मेलन में उठायी गई सरना कोड लागू करने की मांग

गोमिया प्रखंड के लुगू बुरू घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में आयोजित दो दिवसीय 22वां अंतर्राष्ट्रीय संताल सरना धर्म महासम्मेलन मंगलवार को संपन्न हो गया. मंगलवार को रात भर चले कार्यक्रम में आदिवासियों के संपूर्ण विकास के लिए सरना कोड लागू करने की मांग पुरजोर ढंग से उठायी गयी.

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Bokaro News: गोमिया प्रखंड के लुगू बुरू घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में आयोजित दो दिवसीय 22वां अंतर्राष्ट्रीय संताल सरना धर्म महासम्मेलन मंगलवार को संपन्न हो गया. मंगलवार को रात भर चले कार्यक्रम में आदिवासियों के संपूर्ण विकास के लिए सरना कोड लागू करने की मांग पुरजोर ढंग से उठायी गयी. ओलचिकी लिपि के विकास, विस्तार का आह्वान करते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया गया. सामाजिक जागरूकता अभियान चलाकर पंडित रघुनाथ मुर्मू के सपने को साकार करने पर बल दिया गया.

विभिन्न परगनाओं से आये संताली विशेषज्ञों ने संतालियों को आगाह करते हुए वैसे साजिशों से सावधान रखने का आह्वान भी किया, जिससे उनका मौलिक चिंतन प्रभावित होता है. इसके लिए सामाजिक एकजुटता को चट्टान की तरह कायम रखते हुए अपनी संस्कृति को हजारों वर्षों से जारी उसकी मौलिकता में आगे भी संजोए रखने पर बल दिया. धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान और जाहेरगढ़, धर्म, भाषा लिपि व संस्कृति परंपरा की रक्षा का प्रण लिया गया.

इस दौरान कलाकारों ने विश्व कल्याण के संदेश वाले कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी. संताली जानकार और कलाकार झारग्राम निवासी लोबा मुर्मू ने पारंपरिक गीतों से संस्कृति और परंपरा का बखान किया. असम के पूर्व स्पीकर पृथ्वी मांझी, उदयनाथ सोरेन, बहादुर सोरेन, सोनाराम सोरेन आदि संताली जानकारों ने अपनी बात रखी. इस दौरान लाखों श्रद्धालु दोरबार चट्टानी में मौजूद रहे. समिति के अध्यक्ष बबुली सोरेन व सचिव लॉगिन मुर्मू ने कहा कि लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण और जंगल कटाव से पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लगा है. पूरी दुनिया आज इसकी चिंता में डूबी हुई है और समाधान पर चर्चा की जा रही है. आदिवासी संस्कृति में इन समस्या के उपाय मौजूद हैं. विश्व कल्याण और शांति का मंत्र निहित है.

बुधवार रात तक लौटते रहे श्रद्धालु

धर्म महासम्मेलन में भाग लेने बाहर से आये श्रद्धालु बुधवार की सुबह चार बजे से वापस लौटने लगे थे. हालांकि दिन 10 बजे तक मेला परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था. दोपहर दो बजे तक आधा से अधिक श्रद्धालु लौट चुके थे. देर रात नौ बजे तक श्रद्धालु लौटते दिखे. इधर, सभी सातों वाहन पार्किंग स्थल में गंदगी बिखरी हुई है. मेला परिसर का भी यही हाल है. अब सफाई पर ध्यान दिया जायेगा.

समिति ने जताया आभार

महासम्मेलन को सफल बनाने में जिला प्रशासन और टीटीपीएस प्रबंधन के सहयोग के लिए लुगूबुरू घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ समिति ने आभार जताया है. अध्यक्ष बबुली सोरेन व सचिव लोबीन मुर्मू ने जिला उपायुक्त कुलदीप चौधरी, एसपी चंदन, एसडीओ अनंत कुमार, एसडीपीओ सतीशचंद्र झा, सीआरपीएफ अधिकारियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, थाना प्रभारियों व जवानों समेत टीटीपीएस जीएम अनिल कुमार शर्मा, डीजीएम अशोक प्रसाद, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वॉलिंटियर्स, स्थानीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, दुकानदारों सहित अन्य सभी के प्रति आभार जताया.

पश्चिम बंगाल के दो श्रद्धालु लापता

महासम्मेलन में आये प. बंगाल के कुल्टी थाना क्षेत्र निवासी शनिचर टुडू (50 वर्ष) और नदिया निवासी गोराई हांसदा (55 वर्ष) लापता हैं. इनके परिजनों ने समिति को इसकी जानकारी दी है. वहीं, एक श्रद्धालु सुनील मरांडी, पिता कांदो मांझी अपनों से बिछड़ गया है. वह ललपनिया ओपी में था. पुलिस उसकी भाषा नहीं समझ सकी. पुलिस ने समिति को सौंप दिया.

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