ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंप ने रात में खुद फोन कर दी जानकारी; ईरानी राजदूत का दावा

पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने दावा किया कि बुधवार रात लगभग 1 बजे डोनाल्ड ट्रंप ने फोन किया. उन्होंने इस कॉल के दौरान तेहरान से कहा कि अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा. यह अपडेट ईरान की ओर से हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की फांसी रोकने के बाद सामने आया है.

ईरान में वर्तमान इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ काफी तेज विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इनमें मरने वालों की संख्या अलग-अलग रिपोर्ट्स में 800-2000 के बीच बताई जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विरोध प्रदर्शनों को दबाने पर ईरानी सत्ता को लगातार हमले की धमकी दे रहे हैं. इसी बीच कई घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा, जैसे- मिडिल ईस्ट में अपने सबसे बड़े सैन्य बेस से अमेरिकी सैनिकों का हटना, नागरिकों के लिए एजवाइजरी जारी करना, यूएसएस अब्राहम लिंकन का साउथ चाइना सी से पर्शियन गल्फ की ओर मूव करना. ऐसा लगा कि हमला हो ही जाएगा, लेकिन ऐन वक्त पर सब शांत हो गया. हमला टल गया. इसके पीछे कोई और नहीं बल्कि डोनाल्ड ट्रंप खुद थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ईरान को यह जानकारी दी. 

उन्होंने ईरान को बताया कि उनका हमला करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने तेहरान से संयम बरतने को कहा है. यह जानकारी पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने दी. मोघदम ने बताया कि उन्हें यह सूचना बुधवार को पाकिस्तान समयानुसार रात लगभग 1 बजे मिली. इसके अनुसार ट्रंप युद्ध नहीं चाहते और उन्होंने ईरान से अपील की है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना न बनाए. यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान हाल के वर्षों की सबसे गंभीर अशांति का सामना कर रहा है और वॉशिंगटन संकेत दे रहा है कि हवाई हमले अभी भी एक विकल्प बने हुए हैं.

800 लोगों को दी जाने वाली थी फांसी

ईरानी राजदूत ने यह भी कहा कि ईरान में लोगों को विरोध प्रदर्शन करने का वैध अधिकार है. ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत भी की है. मोघदम ने आरोप लगाया कि ईरान में हिंसा के पीछे सशस्त्र समूह शामिल हैं, जिन पर हत्याओं और मस्जिदों पर हमलों के आरोप हैं. इस हमले के बाद हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसकी संख्या 10000 से ऊपर बताई जा रही है. वहीं इनमें से कई लोगों को फांसी की भी सजा देने का ऐलान किया गया था. बुधवार तक अमेरिका धमकी दे रहा था कि अगर ईरान ने प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों को मौत की सजा दी, तो वह सैन्य कार्रवाई करेगा. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीना लेविट ने कहा कि ईरान में 800 लोगों को फांसी दी जाने वाली थी. 

टली फांसी, एयरबेस पर लौटे सैनिक

अमेरिकी हमले की जानकारी ईरान को स्पष्ट रूप से मिल गई थी. क्योंकि जिस हिसाब से अमेरिका ने कार्रवाई की तैयारी की थी, उसका अंदेशा भी साफ झलक रहा था. हालांकि, बाद में व्हाइट हाउस में एक घोषणा के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें दूसरी तरफ के बहुत महत्वपूर्ण स्रोतों से आश्वासन मिला है कि फांसी नहीं दी जाएगी. अलग-अलग न्यूज एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद अमेरिकी सैनिक कतर के अपने अल उदैद बेस पर लौट आए. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कहा है कि हत्याएं रुक गई हैं और फांसी नहीं होगी. आज कई फांसी होनी थीं, लेकिन अब वे नहीं होंगी और हम इसकी पुष्टि करेंगे. 

अब भी अमेरिका के लिए खुला है सैन्य विकल्प

हालांकि व्हाइट हाउस ने अब भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं किया है.  ओवल ऑफिस में एक रिपोर्टर से बात करते हुए  ट्रंप ने कहा कि हम इसे देखेंगे और यह देखेंगे कि प्रक्रिया क्या होती है. वहीं गुरुवार को ईरान ने किसी भी विदेशी खतरे के खिलाफ आत्मरक्षा करने की कसम खाई. ऐसे में दोनों देशों के बीच स्थिति अब भी सामान्य नहीं हुई है. आने वाले समय में बयानबाजी चलती रहने की संभावना है. 

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