US मिलिट्री पावर: ईरान में 1000 ठिकाने तबाह, इन हथियारों से बरसाए बम-बारूद; पूरी लिस्ट

US Weapons used to attack Iran: अमेरिका ने ईरान में 48 घंटे में भीषण तबाही मचाई. इजरायल के साथ मिलकर किए गए इस हमले में ईरान की राजधानी समेत लगभग 1000 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गई. इस अटैक के दौरान अमेरिका ने अपने कई घातक हथियारों का इस्तेमाल किया.

US Weapons used to attack Iran: अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान पर किए गए सैन्य हमलों में कई तरह के आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया. 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया था, जिसे Operation Epic Fury और Operation Roaring Lion नाम दिया है. इसके तहत अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर अटैक किया, जिनमें सुप्रीम लीडर खामेनेई और आईआरजीसी के ऑफिस को निशाना बनाया गया.  इन हमलों में अमेरिका ने नई तकनीक का भी सहारा लिया गया, जिसमें खतरनाक हथियारों से लेकर एआई टेक्निक भी शामिल रही. 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर हमले के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने Anthropic नाम की कंपनी की कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवाओं का उपयोग किया. इनमें उसके ‘क्लॉड’ नाम के टूल भी शामिल थे. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल युद्ध में किस तरह किया गया. इस मामले में न तो पेंटागन और न ही कंपनी ने कोई आधिकारिक बयान दिया. दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में अमेरिका ने Anthropic को सप्लाई चेन के लिए जोखिम और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से संभावित खतरा बताया था, और इसके बावजूद उसी की तकनीक का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई में किया गया.

हवाई हमले और लड़ाकू क्षमता

हवाई हमलों के लिए अमेरिका ने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और बमवर्षकों की तैनाती की. इसमें B-2 स्टील्थ बॉम्बर जैसे लंबी दूरी के स्टील्थ बमवर्षक शामिल रहे, जो गहरे और सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने में सक्षम हैं. इनके साथ F-35 स्टील्थ फाइटर, F-22 स्टील्थ फाइटर, F-18 फाइटर जेट और F-16 फाइटर जेट जैसे तेज़ और बहु-भूमिका वाले विमान भी शामिल थे. जमीन पर सीधे हमलों के लिए A-10 अटैक जेट का इस्तेमाल किया गया, जबकि दुश्मन की रडार और संचार क्षमताओं को कमजोर करने के लिए EA-18G इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट को तैनात किया गया.

रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अमेरिका ने अपने B-2 स्टील्थ बॉम्बर विमानों को सीधे अमेरिका से उड़ाकर ईरान के बेहद सुरक्षित और ज़मीन के नीचे बने मिसाइल ठिकानों पर भारी बम गिराए. इन बमों का वजन करीब 2000 पाउंड था. इससे पहले भी जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान ऐसे विमानों का इस्तेमाल किया गया था.

ड्रोन, निगरानी और रक्षा प्रणाली

हमलों के दौरान निगरानी और सटीक स्ट्राइक के लिए ड्रोन और जासूसी प्लेटफॉर्म अहम भूमिका में रहे. इनमें MQ-9 रीपर ड्रोन और लुकास (LUCAS) ड्रोन शामिल थे, जिनसे लंबी अवधि तक निगरानी और सटीक हमला संभव हुआ. खुफिया जानकारी जुटाने के लिए RC-135 टोही विमान और समुद्री इलाकों की निगरानी के लिए P-8 मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया. हवाई क्षेत्र की निगरानी और कमांड के लिए AWACS तैनात रहे, जबकि सुरक्षा के लिहाज से THAAD, पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम, M-142 HIMARS और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का सहारा लिया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ऐसे ड्रोन भी इस्तेमाल किए, जो खुद को निशाने पर टकराकर विस्फोट कर देते हैं. ये ड्रोन दिखने में ईरान के शाहेद ड्रोन जैसे बताए जा रहे हैं. पहली बार US Central Command ने इस तरह के एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन इस्तेमाल करने की पुष्टि की. साथ ही, ईरान पर हमलों में F/A-18 और F-35 लड़ाकू विमानों की तस्वीरें और वीडियो भी जारी किए गए. सेना ने कहा कि हमले अभी भी जारी हैं.

नौसैनिक शक्ति और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट

समुद्र से संचालन और क्षेत्रीय नियंत्रण के लिए नौसैनिक शक्ति को भी सक्रिय रखा गया. इसमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमान वाहक पोत और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल थे, जिन्हें रिफ्यूलिंग शिप्स से लगातार समर्थन मिला. लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए C-17 ग्लोबमास्टर और C-130 कार्गो विमान का उपयोग किया गया. इसके अलावा, लंबी उड़ानों के दौरान लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन देने के लिए रिफ्यूलिंग टैंकर एयरक्राफ्ट और संपर्क बनाए रखने के लिए एयरबोर्न कम्युनिकेशन रिले तैनात रहे. अमेरिकी नौसेना के जहाज़ों पर लगे एजिस कॉम्बैट सिस्टम से लैस स्टैंडर्ड मिसाइलों का इस्तेमाल समुद्र से आने वाले खतरों को रोकने के लिए किया गया. इन मिसाइलों से खाड़ी क्षेत्र में हवाई सुरक्षा को और मजबूती मिली.

ये भी पढ़ें:- ईरान के खिलाफ हुए ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी, देंगे US-इजरायल का साथ, यूके पीएम ने दिए अपने मिलिट्री बेस

रॉकेट मिसाइल और प्रतिरक्षा

Business Insider की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि इस ऑपरेशन में अमेरिका ने कई अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया. इनमें प्रमुख रूप से अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं. ये मिसाइलें समुद्री जहाज़ों, पनडुब्बियों और जमीन से लॉन्च की जा सकती हैं और करीब 1,000 मील दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होती हैं, चाहे दुश्मन की हवाई सुरक्षा कितनी भी मजबूत क्यों न हो. 

जमीन पर तैनात अमेरिकी बलों ने HIMARS रॉकेट सिस्टम का उपयोग किया. यह एक हल्का और तेजी से मूव करने वाला मल्टी-रॉकेट लॉन्चर है, जो कम समय में हमला कर तुरंत स्थान बदल सकता है, ताकि जवाबी हमले से बचा जा सके. 

ईरान की ओर से आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए अमेरिका ने पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया. यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है. 

टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम (THAAD) का इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में मार गिराने के लिए किया गया. यह छोटी, मध्यम और इंटरमीडिएट रेंज की मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है.

बातचीत की टेबल पर आ रहा ईरान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड और ईरान के सरकारी मीडिया ने यह पुष्टि की है कि इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. इस हमले में उनके परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी मारे गए. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरानी नौसेना के नौ जहाजों को नष्ट कर दिया गया है और उनका नौसेना मुख्यालय भी लगभग पूरी तरह तबाह हो चुका है. 

ये भी पढ़ें:- ईरान में तबाही के बीच अमेरिका में गोलीबारी, 3 की मौत 14 घायल; हमलावर ने ‘पॉपर्टी ऑफ अल्लाह’ वाली हुडी पहनी थी

इसी बीच, ईरान में उभर रहा ‘संभावित नया नेतृत्व’ अमेरिका से बातचीत के संकेत दे रहा है. व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ट्रंप बातचीत के लिए तैयार हैं, हालांकि सैन्य अभियान जारी रहेगा. ट्रंप ने द अटलांटिक को दिए इंटरव्यू में भी ईरान के नए नेतृत्व से बात करने की योजना की पुष्टि की है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >