Trump Praised By Pakistan Minister Khawaja Asif: दुनिया की सियासत में पाकिस्तान का रोल अक्सर पहेलियों से भरा रहता है. कभी खुद को शांति का पैरोकार बताता है, तो कभी उसी सांस में भारत पर आरोपों की झड़ी लगा देता है. इस बार पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कुछ ऐसा ही किया है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए उन्हें “पहले ऐसे राष्ट्रपति बताया जिन्होंने युद्ध रोके हैं” और साथ ही भारत पर तालिबान को प्रायोजित करने का आरोप जड़ दिया.
गुरुवार को जियो टीवी पर दिए इंटरव्यू में आसिफ ने तालिबान नियंत्रित अफगानिस्तान से बढ़ते तनाव पर बात करते हुए अमेरिका से मदद मांगी. उन्होंने कहा कि ट्रंप अगर चाहें तो पाकिस्तान और उसके उत्तरी पड़ोसी के बीच शांति स्थापित करने में भूमिका निभा सकते हैं.
Trump Praised By Pakistan Minister Khawaja Asif: ट्रंप की तारीफों में पुल बांध दिए आसिफ ने
ख्वाजा आसिफ ने डोनाल्ड ट्रंप की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अमेरिका में राष्ट्रपति आमतौर पर युद्धों के लिए जिम्मेदार रहे हैं. यह पहले राष्ट्रपति (ट्रंप) हैं जिन्होंने युद्ध रोके हैं. पिछले 15-20 वर्षों में अमेरिका ने युद्धों को प्रायोजित किया है, और वह (ट्रंप) शांति वार्ता करने वाले पहले राष्ट्रपति हैं.” आसिफ ने यह भी कहा कि अगर ट्रंप पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष को सुलझाने की कोशिश करते हैं, तो पाकिस्तान उनका स्वागत करेगा. यानी साफ है कि इस्लामाबाद अब भी ट्रंप को एक तरह के ‘शांति मध्यस्थ’ के रूप में देखता है.
Trump Praised By Pakistan Minister Khawaja Asif: भारत पर तालिबान को प्रायोजित करने का आरोप
इंटरव्यू के दौरान ख्वाजा आसिफ ने भारत को लेकर एक विवादित बयान दे डाला. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली तालिबान को प्रायोजित कर रही है और पाकिस्तान के खिलाफ छल से युद्ध छेड़े हुए है. यह बयान पाकिस्तान की उसी पुरानी नीति की याद दिलाता है कि जब भी घरेलू हालात खराब होते हैं या अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है, तो भारत-विरोधी बयानबाजी से ध्यान हटाने की कोशिश की जाती है.
ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की मांग
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के नेता ट्रंप की तारीफ कर रहे हों. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर पहले भी ट्रंप को “युद्ध समाप्त करने वाला नेता” बता चुके हैं. ख्वाजा आसिफ ने भी उसी लाइन को दोहराया, और बताया कि इस्लामाबाद के शीर्ष नेतृत्व ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की बात कही है. असल में, पाकिस्तान में ट्रंप को लेकर यह ‘फैन क्लब’ तब से बना जब उन्होंने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और तालिबान के साथ शांति वार्ता की पहल की थी.
ऑपरेशन सिंदूर और भारत की प्रतिक्रिया
आसिफ के बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में एक और मुद्दा उठा. हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर. खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि इस ऑपरेशन के दौरान ट्रंप की मध्यस्थता का स्वागत किया गया. लेकिन भारत ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में स्पष्ट कहा है, ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के भारत के फैसले में किसी विदेशी नेता की कोई भूमिका नहीं थी.” भारत का संदेश साफ था कि हमारी आतंकवाद विरोधी नीतियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं, और कोई विदेशी नेता उन्हें प्रभावित नहीं कर सकता. पाकिस्तान की सियासत में यह एक पुराना पैटर्न है. जब-जब घरेलू दबाव बढ़ता है, तब-तब वहां के नेता भारत विरोधी बयान देकर राष्ट्रवाद का कार्ड खेलते हैं. ख्वाजा आसिफ का बयान उसी स्क्रिप्ट का नया अध्याय है.
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