ईरान ने ठुकराईं ट्रंप की शर्तें, खामेनेई की चेतावनी- डुबो देंगे अमेरिकी युद्धपोत

Iran US Nuclear Deal: जिनेवा में हुई सीक्रेट मीटिंग के बाद अमेरिका-ईरान में ठन गई है. जेडी वेंस ने साफ किया कि ईरान ने ट्रंप की शर्तें नहीं मानी हैं, वहीं खामेनेई ने अमेरिकी युद्धपोतों को डुबोने की खुली धमकी दी है. परमाणु डील पर छिड़ी इस जुबानी जंग और युद्ध की आहट के बीच क्या निकलेगा समाधान?

Iran US Nuclear Deal: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मंगलवार को हाई-लेवल मीटिंग हुई. इस बातचीत के बाद अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने बड़ा बयान दिया है. फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में वेंस ने साफ किया कि ईरान ने अभी तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन सभी ‘रेड लाइन्स’ (शर्तों) को स्वीकार नहीं किया है, जो एक समझौते के लिए जरूरी हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ मायनों में बातचीत सकारात्मक रही क्योंकि दोनों पक्ष आगे भी मिलने के लिए तैयार हो गए हैं.

ट्रंप की सख्त चेतावनी- डील करो वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहो

बातचीत की मेज पर बैठने से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपना रुख साफ कर दिया था. ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर वह परमाणु कार्यक्रम और अन्य चिंताओं पर ‘रीजनेबल’ (तर्कसंगत) नहीं होता है, तो उसे गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. ट्रंप ने पिछले साल जून 2025 में हुए B-2 बॉम्बर हमले की याद दिलाते हुए कहा कि ईरान को समझौता न करने के नतीजों के बारे में सोचना चाहिए. वॉशिंगटन का मुख्य फोकस यह है कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार न बना पाए.

ईरान का पलटवार- हमारे पास अमेरिकी युद्धपोतों को डुबोने वाले हथियार

एक तरफ जिनेवा में बातचीत चल रही थी, तो दूसरी तरफ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप को खुली चुनौती दे दी. खामेनेई ने कहा कि अमेरिका अपनी जिस सैन्य ताकत पर घमंड करता है, उसे एक ही झटके में धराशायी किया जा सकता है. उन्होंने अमेरिका के युद्धपोतों की तैनाती पर चुटकी लेते हुए कहा कि युद्धपोत खतरनाक हो सकते हैं, लेकिन उनसे भी ज्यादा खतरनाक वो हथियार हैं जो इन जहाजों को समुद्र की गहराई में भेज सकते हैं.

किसने की बातचीत और क्या निकला नतीजा?

जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता से हुई इस सीक्रेट बैठक में अमेरिका की ओर से ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हुए. वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने मोर्चा संभाला.

ईरान का पक्ष: अरागची ने कहा कि बातचीत पहले से ज्यादा कंस्ट्रक्टिव (रचनात्मक) रही और दोनों देश कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर सहमत हुए हैं.

अगला कदम: अगले दो हफ्तों में ईरान कुछ विस्तृत प्रस्ताव लेकर वापस आएगा ताकि जो आपसी मतभेद (गैप्स) हैं, उन्हें कम किया जा सके.

अमेरिका का रुख: जेडी वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के पास अभी भी यह फैसला लेने का अधिकार सुरक्षित है कि कूटनीति का रास्ता कब खत्म करना है. यानी अगर ईरान नहीं झुका, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है.

पुरानी यादें- 2015 से 2026 तक का सफर

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते का विवाद बहुत पुराना है.

  • जुलाई 2015: ओबामा के समय JCPOA समझौता हुआ, जिसमें ईरान पर परमाणु पाबंदियां लगीं.
  • 2018: ट्रंप ने इस समझौते को बेकार बताते हुए अमेरिका को इससे बाहर कर लिया.
  • 2025-26: अब फिर से नई शर्तों के साथ बातचीत शुरू हुई है, लेकिन माहौल पहले से ज्यादा गर्म है.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे इस बार किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं हैं. अब सबकी नजरें अगले 14 दिनों पर हैं, जब ईरान अपना नया ड्राफ्ट पेश करेगा.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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