Tarique Rahman: बांग्लादेश की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. 2024 में शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद, अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. वह पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं और 17 साल बाद विदेश से लौटकर अपनी पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई है. ‘प्रोथोम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह शपथ ग्रहण समारोह ढाका के संसद भवन (जातीय संसद) के साउथ प्लाजा में होगा.
सुबह सांसद और शाम को पीएम लेंगे शपथ
शपथ ग्रहण का कार्यक्रम दो हिस्सों में बंटा है. निर्वाचित सांसद राशिदुज्जमान मिल्लत ने एएनआई को बताया कि:
- सुबह 10:00 बजे: मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दिन सभी 297 नए सांसदों को शपथ दिलाएंगे.
- शाम 04:00 बजे: राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन, तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद की और उनके मंत्रियों को गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे.
- इस बार यह कार्यक्रम पारंपरिक जगह के बजाय संसद के साउथ प्लाजा में हो रहा है, ताकि लगभग 1200 मेहमान इसमें शामिल हो सकें.
भारत से ओम बिरला शामिल हो रहे हैं
इस समारोह में भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला शामिल हो रहे हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, उनकी मौजूदगी दोनों देशों की दोस्ती और लोकतंत्र के प्रति सम्मान को दिखाती है. हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और पीएम मोदी इस इवेंट में नहीं आ रहे हैं. पाकिस्तान की तरफ से वहां के योजना मंत्री अहसान इकबाल शिरकत करेंगे. इनके अलावा भूटान, नेपाल, मालदीव और श्रीलंका के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे.
BNP को मिला भारी बहुमत
चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक, 300 सीटों वाली संसद में BNP गठबंधन ने 212 सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया है.
- BNP (अकेले): 209 सीटें.
- जमात-ए-इस्लामी: 68 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है.
- अन्य: गानो अधिकार परिषद और बीजेपी (बांग्लादेश) जैसी पार्टियों को 1-1 सीट मिली है.
- शेख हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ को इन चुनावों में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं थी.
क्या सांसदों को दोबारा लेनी होगी शपथ?
‘प्रोथोम आलो’ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सांसदों की शपथ को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है. चर्चा है कि क्या सांसदों को ‘संवैधानिक सुधार परिषद’ के सदस्य के रूप में दूसरी बार शपथ लेनी होगी? BNP के सूत्रों का कहना है कि वे मौजूदा संविधान को ही मानना चाहते हैं और किसी भी नए ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ या सुधार परिषद की कानूनी वैधता पर उन्होंने सवाल उठाए हैं.
तारीक रहमान के सामने चुनौतियां
करीब दो दशक बाद सत्ता में वापसी कर रही BNP के लिए आगे की राह आसान नहीं है. दो साल पहले हुए छात्र आंदोलन के बाद देश की स्थिति काफी बदली है. तारीक रहमान के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश की डगमगाती इकोनॉमी को संभालना, महंगाई कम करना और कानून व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना है.
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