गाजा के लिए ट्रंप का ‘पीस प्लान’: बोर्ड ने जुटाए ₹42000 करोड़, 8000 सैनिक भेजेगा इंडोनेशिया

Trump Gaza Peace Plan: गाजा की किस्मत बदलने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने अपना ‘पावर प्लान’ तैयार कर लिया है. ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए वे 5 अरब डॉलर का फंड और हजारों सैनिकों की तैनाती कर रहे हैं. हालांकि, दुनिया के कई ताकतवर देशों ने इस मिशन से दूरी बना ली है. क्या ट्रंप का यह नया संगठन यूनाइटेड नेशंस की जगह ले पाएगा?

Trump Gaza Peace Plan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी घोषणा की है. उन्होंने अपने नए बनाए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए युद्ध से जूझ रहे गाजा को फिर से बसाने के लिए 5 अरब डॉलर (करीब 42,000 करोड़ रुपये) जुटाने का दावा किया है. ट्रंप ने इसे इतिहास का सबसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन बताया है और वे खुद इसके चेयरमैन हैं. इस बोर्ड का मकसद सिर्फ गाजा ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति लाना है.

कौन देगा पैसा और कौन भेजेगा सेना?

ट्रंप के अनुसार, इस गुरुवार को वॉशिंगटन में होने वाली पहली मीटिंग में इन फंड्स का आधिकारिक ऐलान होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि ये देश न केवल पैसा देंगे, बल्कि गाजा में सुरक्षा के लिए अपनी सेना और पुलिस भी भेजेंगे. हालांकि ट्रंप ने अभी तक देशों के नाम नहीं खोले हैं, लेकिन इंडोनेशिया की सेना ने साफ कर दिया है कि उनके 8,000 सैनिक जून के अंत तक गाजा में शांति बनाए रखने के लिए तैयार रहेंगे.

कौन-कौन है इस टीम में शामिल?

इस बोर्ड में इजरायल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे 25 से ज्यादा देश शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि इसमें हंगरी, अर्जेंटीना और वियतनाम जैसे देश भी साथ आए हैं. ट्रंप का कहना है कि एक बार यह बोर्ड पूरी तरह बन जाए, तो वे दुनिया में कहीं भी कुछ भी कर सकते हैं.

इन बड़े देशों ने फेरा मुंह 

जहां कई मुस्लिम और एशियाई देश ट्रंप के साथ हैं, वहीं जर्मनी, फ्रांस, इटली और नॉर्वे जैसे पुराने साथी देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने से मना कर दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप इस बोर्ड के जरिए यूनाइटेड नेशंस (UN) की ताकत कम करना चाहते हैं. कई यूरोपीय देशों को डर है कि यह संगठन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की जगह लेने की कोशिश कर रहा है.

गाजा में क्या है जमीनी हकीकत?

संयुक्त राष्ट्र और वर्ल्ड बैंक के अनुसार, गाजा को पूरी तरह ठीक करने में लगभग 70 अरब डॉलर का खर्च आएगा. पिछले साल अक्टूबर में सीजफायर (युद्धविराम) हुआ था, लेकिन हिंसा रुकी नहीं है. गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सीजफायर के बाद भी इजरायली हमलों में 590 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं, वहीं इजरायल के भी 4 सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं.

विवादों के बीच पहली मीटिंग की तैयारी

यह मीटिंग ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप यू.एस. इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ में होगी. इस बिल्डिंग को लेकर पहले ही विवाद चल रहा है क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल इसके पुराने स्टाफ को हटाकर इस पर कब्जा कर लिया था. खास बात यह है कि इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, जो हाल ही में ट्रंप से मिले थे, इस मीटिंग में शामिल नहीं होंगे.

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लेखक के बारे में

By Govind jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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