Mojtaba Khamenei: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि खुफिया एजेंसी CIA ने उन्हें जानकारी दी है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ‘गे’ (समलैंगिक) हैं. जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वाकई CIA ने उन्हें यह बताया है, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘हां, उन्होंने ऐसा कहा है, लेकिन मुझे लगता है कि सिर्फ वही नहीं, बल्कि और भी बहुत से लोग यह बात कह रहे हैं.’
ईरान में मोजतबा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
ट्रंप ने कहा कि इस जानकारी के बाद मोजतबा के लिए अपने देश में काम करना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने इसे मोजतबा के लिए एक “खराब शुरुआत” बताया. बता दें कि ईरान में समलैंगिकता को इस्लाम के खिलाफ माना जाता है और वहां इसके लिए मौत की सजा तक का प्रावधान है. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, जब ट्रंप को पहली बार खुफिया ब्रीफिंग में यह बात पता चली थी, तो वह काफी हैरान हुए थे और हंसने लगे थे.
ट्रंप का दावा- हम ईरान से जंग जीत चुके हैं
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि सैन्य तौर पर अमेरिका ईरान से युद्ध जीत चुका है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरान की नौसेना और मिसाइल ताकत को पूरी तरह खत्म कर दिया है. ट्रंप के मुताबिक, ‘हमने उनकी नेवी और एयरफोर्स को तबाह कर दिया है. हमने उनके 154 जहाज डुबो दिए हैं. अब उनके पास सिर्फ 9% मिसाइलें ही बची हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने ईरान के मिसाइल लॉन्चर्स को भी नष्ट कर दिया है, जिसके बिना मिसाइलें किसी काम की नहीं हैं.
ईरान में LGBTQ+ समुदाय पर जुल्म
ईरान में समलैंगिकों की स्थिति बेहद खराब है. हेनगाओ ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने मई 2025 की अपनी रिपोर्ट में ईरान को ‘जेंडर अपार्थेड स्टेट’ (लिंग आधारित भेदभाव वाला देश) कहा है. रिपोर्ट के अनुसार, वहां जेंडर और सेक्सुअल ओरिएंटेशन के आधार पर लोगों के साथ बहुत भेदभाव होता है. सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान के मुताबिक, वहां गे लोगों का जबरन इलाज (Conversion therapy) कराने की कोशिश की जाती है.
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हजारों लोगों को दी जा चुकी है मौत की सजा
विकीलीक्स के 2008 के एक केबल के अनुसार, 1979 की क्रांति के बाद से ईरान में लगभग 4,000 से 6,000 LGBTQ+ लोगों को फांसी दी जा चुकी है. हालांकि डेटा की कमी के कारण सटीक नंबर बताना मुश्किल है. जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि जनवरी 2022 में दो पुरुषों को समलैंगिकता के आरोप में फांसी दी गई थी. उसी साल उर्मिया की एक अदालत ने दो एक्टिविस्ट्स को ‘धरती पर भ्रष्टाचार’ फैलाने और समलैंगिकता को बढ़ावा देने के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी.
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