पाकिस्तानी सेना के नए चीफ का दामन भी 'नापाक', पुलवामा हमले से है कनेक्शन

लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान का नया सेना प्रमुख बन रहे हैं. मुनीर का नाम भारत में हुए पुलवामा हमले से भी जुड़ा है, उस हमले में सेना के 40 जवान शहीद हो गये थे. दरअसल जिस समय पुलवामा अटैक हुआ था उस समय मुनीर पाकिस्तान की खुफिया विभाग आईएसआई के प्रमुख थे.

लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर को पाकिस्तान का नया आर्मी चीफ चुना गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मुनीर को नया सेना प्रमुख चुना है. मुनीर सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की जगह लेंगे. बता दें, बाजवा 29 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने ट्विटर पर घोषणा की कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मुनीर को पाकिस्तान का नया सेना प्रमुख नामित किया है.

बाजवा के पसंदीदा हैं मुनीर: लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर लंबे समय से जनरल बाजवा के करीबी सहयोगी रहे हैं. उन्हें बाजवा का पसंदीदा सहयोगी माना जाता है. बाजवा के बाद मुनीर पाकिस्तान के 17वें सेना प्रमुख नियुक्त होंगे. लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर ने ‘ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल’ के माध्यम से सेवा में प्रवेश किया, जिसके बाद उन्हें ‘फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट’ में नियुक्त किया गया. बाद में उन्हें सैन्य खुफिया महानिदेशक नियुक्त किया गया.

पुलवामा हमले से जुड़ा है नाम: लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान का नया सेना प्रमुख बन रहे हैं. बता दें, मुनीर का कनेक्शन भारत में हुए पुलवामा हमले से भी जुड़ा है, उस हमले में सेना के 40 जवान शहीद हो गये थे. दरअसल जिस समय पुलवामा अटैक हुआ था उस समय मुनीर पाकिस्तान की खुफिया विभाग आईएसआई के प्रमुख थे. पुलवामा हमला आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने कराया था लेकिन यह भी दावा किया जाता रहा है कि इस काम के लिए पाकिस्तान की सेना और आईएसआई का पूरा हाथ रहा है.  

इमरान से हुआ था विवाद: लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मुनीर को पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) का प्रमुख भी बनाया गया था. लेकिन खुफिया विभाग के सर्वोच्च अधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल अब तक का सबसे छोटा कार्यकाल रहा है. उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के दबाव पर महज आठ महीने के भीतर ही पद से हटा दिया गया था और उनके स्थान पर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद को नियुक्त किया गया था.

पाकिस्तान में काफी अहम है आर्मी चीफ का पद: पाकिस्तान में ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी सशस्त्र बलों में सबसे बड़ा पद है. लेकिन सेना में सैनिकों की तैनाती उनकी नियुक्तियों और स्थानांतरण समेत सभी प्रमुख शक्तियां थल सेनाध्यक्ष के पास होती हैं. इस कारण पाकिस्तानी फौज में सेना प्रमुख को सबसे ताकतवर माना जाता है. सेना का पाकिस्तान में क्या रोल है इसका पता इसी बात से चलता है कि आजादी के 75 साल में पाकिस्तान पर आधे से ज्यादा वक्त सेना का शासन रहा है.

भाषा इनपुट से साभार

Also Read: Shraddha Murder Case: क्या है लाई डिटेक्टर टेस्ट, कितना भरोसेमंद हैं नतीजे, जानें कैसे काम करती है यह

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >