टेंशन के बीच फिर शुरू हुई सुलह की कोशिश, तेहरान पहुंचा कतर का प्रतिनिधिमंडल

Iran US Tension: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं. कतर ने दोनों देशों के बीच सुलह कराने की पहल की है. सैन्य गतिविधियों में नरमी के बाद बातचीत की संभावना फिर बनी है.

Iran US Tension: मिडिल ईस्ट में हालिया सैन्य टकराव के बाद अब एक बार फिर कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के कुछ दिनों बाद कि ईरान के साथ युद्धविराम समझौता उनके लिए "खत्म" हो चुका है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कतर ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की पहल शुरू की है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कतर के वार्ताकार शुक्रवार (10 जुलाई ) को तेहरान ( ईरान ) पहुंचे ताकि अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत दोबारा शुरू कराई जा सके.

अमेरिका की सहमति से शुरू हुई पहल

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कतर की यह यात्रा अमेरिका के साथ समन्वय में की गई है. मध्यस्थों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़े अविश्वास को कम करना और वार्ता का रास्ता फिर से खोलना है. हाल के दिनों (9 जुलाई ) में सैन्य गतिविधियों में आई कुछ नरमी के बाद माना जा रहा है कि बातचीत की संभावना फिर बन सकती है.

कैसे बढ़ा था दोनों देशों के बीच टकराव

यह तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों में शामिल था. इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने तेहरान से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए.

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पर्दे के पीछे जारी है कूटनीति

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वॉशिंगटन सीमित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद विराम की रणनीति अपनाकर तनाव को नियंत्रण में रखना चाहता है, ताकि कूटनीतिक प्रयासों को मौका मिल सके.US अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प तैयार हैं, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता बातचीत के जरिए समाधान निकालने की है.

पुरानी वार्ता को फिर पटरी पर लाने की कोशिश

इससे पहले भी कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं की मेजबानी की थी. हालांकि हालिया ( 7-8 जुलाई ) सैन्य संघर्ष के कारण बातचीत ठप पड़ गई थी. अब क्षेत्रीय देशों की कोशिश है कि दोनों पक्ष फिर से बातचीत की टेबल पर लौटें और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को स्थायी रूप से कम किया जा सके.

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Published by: Satyendra Giri

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