Longest Solar Eclipse of 21st Century: आमतौर पर पूर्ण सूर्यग्रहण कई वर्षों या कभी-कभी महीनों के लंबे अंतराल के बाद दिखाई देते हैं, लेकिन वर्ष 2027 में पड़ने वाला सूर्यग्रहण अपनी असाधारण अवधि के कारण इतिहास में दर्ज होने वाला है. इसे 21वीं सदी का सबसे लंबे समय तक चलने वाला पूर्ण सूर्यग्रहण माना जा रहा है, जो वैज्ञानिक नजरिए से भी बेहद अहम होगा. 2 अगस्त 2027 को इस दुर्लभ खगोलीय घटना के दौरान करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक दिन में अंधकार छा जाएगा, जिससे ऐसा लगेगा मानो कुछ पलों के लिए रात उतर आई हो. इस अद्भुत नजारे को लेकर अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ और खगोल प्रेमी अभी से उत्साहित हैं और तैयारियों में जुटे हुए हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिन कई स्थानों पर सूर्य का प्रकाश अचानक कम हो जाएगा, तापमान में स्पष्ट गिरावट महसूस होगी, आकाश में तारे दिखाई देने लगेंगे और वातावरण में एक असामान्य शांति छा सकती है. कुछ क्षणों के लिए ऐसा प्रतीत होगा जैसे समय ठहर गया हो. इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा, जिससे दोपहर का समय सांझ जैसा प्रतीत होगा. यही कारण है कि यह खगोलीय घटना केवल दृश्य रूप से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक प्रभावों के लिहाज से भी बेहद रोचक और विशिष्ट मानी जा रही है.
21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण
यह अनोखी खगोलीय घटना वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड और अंतरिक्ष से जुड़े कई रहस्यों को गहराई से समझने का दुर्लभ अवसर देगी. खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, इतनी लंबी अवधि वाला पूर्ण सूर्यग्रहण न तो पिछले सौ वर्षों में देखा गया है और न ही भविष्य में इसे दोबारा देख पाना आसान होगा. 2 अगस्त 2027 को लगने वाला यह ग्रहण 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण माना जा रहा है.
इसकी शुरुआत अटलांटिक महासागर के ऊपर से होगी, जहां चंद्रमा की छाया सबसे पहले पृथ्वी की सतह को स्पर्श करेगी. इसके बाद यह छाया जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के आसपास से गुजरते हुए दक्षिणी स्पेन, मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र और मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों तक फैलेगी. इन क्षेत्रों में सूर्य लगभग 6 से 6.5 मिनट तक पूरी तरह छिपा रहेगा.
इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा, जिससे दोपहर का समय गोधूलि जैसा दिखाई देगा. तापमान में करीब 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है, हवा की दिशा बदल सकती है और पक्षियों व अन्य जीवों के व्यवहार में भी असामान्य परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. यही प्राकृतिक प्रतिक्रियाएं इस ग्रहण को और भी अधिक रोमांचक बनाती हैं.
वैज्ञानिकों के लिए असाधारण अवसर
हालांकि हर पूर्ण सूर्यग्रहण वैज्ञानिक रूप से महत्त्वपूर्ण होता है, लेकिन अधिकतर ग्रहणों की अवधि तीन मिनट से कम होती है, जिससे अध्ययन का समय सीमित रह जाता है. 2027 का सूर्यग्रहण इस मायने में अलग है कि यह घनी आबादी वाले और अपेक्षाकृत आसानी से पहुंचने योग्य इलाकों से होकर गुजरेगा.
इस ग्रहण के दौरान खगोलविदों को सामान्य से लगभग दोगुना समय मिलेगा, जिससे वे सूर्य, उसके कोरोना और पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाले बदलावों का विस्तार से अध्ययन कर सकेंगे. वैज्ञानिक इसे एक तरह की खुली प्रयोगशाला मान रहे हैं, जहां सूर्य की बाहरी परत, चुंबकीय क्षेत्र और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ी कई अहम जानकारियां जुटाई जा सकेंगी.
यह घटना खगोल विज्ञान के साथ-साथ तापमान में बदलाव, पशु-पक्षियों के व्यवहार और पर्यावरणीय प्रभावों के अध्ययन के लिए भी एक आदर्श अवसर प्रदान करेगी. स्पेस डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, इतनी लंबी अवधि वाला अगला पूर्ण सूर्यग्रहण वर्ष 2114 से पहले संभव नहीं है.
लंबे ग्रहण के पीछे मौजूद दुर्लभ खगोलीय संयोग
सूर्यग्रहण तब घटित होता है, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं. जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की किरणों को रोक देता है, तब धरती पर अंधकार फैल जाता है. यद्यपि पूर्ण सूर्यग्रहण औसतन हर 18 महीनों में पृथ्वी के किसी न किसी हिस्से में दिखाई दे जाते हैं, लेकिन इतनी लंबी अवधि वाला ग्रहण बेहद दुर्लभ होता है.
2 अगस्त 2027 को पृथ्वी अपनी कक्षा में सूर्य से सबसे दूर की स्थिति में होगी, जिससे सूर्य अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देगा. वहीं, चंद्रमा उसी समय अपने परिक्रमा पथ में आगे बढ़ते हुए पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पर पहुंच जाएगा. इस वजह से चंद्रमा आकार में बड़ा दिखाई देगा और सूर्य को लंबे समय तक पूरी तरह ढक सकेगा. यही असामान्य खगोलीय संयोग इस ग्रहण को असाधारण रूप से लंबा बना देता है.
पल-पल बदलता दिखाई देगा नजारा
पूर्णता यानी टोटेलिटी शुरू होने से करीब 60 से 80 मिनट पहले चंद्रमा सूर्य के किनारे को ढकना शुरू कर देगा. धीरे-धीरे सूर्य की रोशनी घटती जाएगी और वह पतली कटी हुई आकृति में नजर आने लगेगा. इसके बाद अचानक अंधकार छा जाएगा, तापमान गिरने लगेगा, तारे दिखने लगेंगे और सूर्य का कोरोना एक चमकीली दूधिया अंगूठी की तरह दिखाई देगा.
वैज्ञानिक इस पूरे घटनाक्रम को वास्तविक समय की वैज्ञानिक प्रयोगशाला की तरह देख रहे हैं, क्योंकि सूर्य के कोरोना को इतनी स्पष्टता और इतने लंबे समय तक देखने का अवसर दशकों में एक बार ही मिलता है.
भारत में पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देगा
यह रहस्यमयी अंधकार लगभग 6 मिनट 23 सेकंड तक बना रहेगा. इसके बाद धीरे-धीरे सूर्य का प्रकाश लौट आएगा, वातावरण सामान्य होगा और दुनिया भर की वेधशालाएं इस ऐतिहासिक क्षण के हर पल को रिकॉर्ड करेंगी. यह सूर्यग्रहण वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होगा.
हालांकि भारत इस ग्रहण के पूर्ण पथ में शामिल नहीं है, इसलिए यहां से पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं देखा जा सकेगा. देश के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्यग्रहण नजर आ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्णता के समय सूर्य को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित होता है, लेकिन आंशिक चरणों में बिना सुरक्षा उपकरण के सूर्य की ओर देखना खतरनाक हो सकता है. इसके लिए प्रमाणित ग्रहण चश्मे, सोलर फिल्टर या अन्य स्वीकृत सुरक्षा साधनों के उपयोग की सलाह दी जाती है.
2 अगस्त 2027 को दिन के समय इतने लंबे अंतराल तक अंधेरा छा जाना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव होगा. सूर्य के गायब होते ही तारे नजर आएंगे, तापमान घटेगा और वातावरण में एक गूढ़ शांति फैल जाएगी. जिन क्षेत्रों से यह ग्रहण गुजरेगा, वहां रहने वाले लोगों के लिए यह जीवनभर याद रहने वाला दृश्य होगा. दुनिया भर से लाखों लोग इस ऐतिहासिक सूर्यग्रहण को देखने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि ऐसा नजारा फिर देखने के लिए एक सदी से भी अधिक इंतजार करना पड़ सकता है.
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