Iran Nuclear Weapons: अमेरिका इस हफ्ते के अंत तक ईरान पर सैन्य हमले पर विचार कर रहा है. हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इस पर कोई आखिरी मुहर नहीं लगाई है. यह हलचल तब तेज हुई है जब जिनेवा में परमाणु समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट का कहना है कि बातचीत में थोड़ी प्रगति तो हुई है, लेकिन दोनों देश अभी भी कई मुद्दों पर एक-दूसरे से काफी अलग हैं. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वे कूटनीति को मौका देना चाहते हैं, लेकिन सैन्य विकल्प भी मेज पर है.
ईरान के भीतर सुलगती आग
ईरान इस वक्त केवल बाहरी खतरों से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी संकट से भी जूझ रहा है. 28 दिसंबर 2025 को ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. इसकी वजह रियाल (ईरानी करेंसी) की गिरती कीमत और आसमान छूती महंगाई थी. दुकानदारों से शुरू हुआ यह विरोध पूरे देश में फैल गया, जिसे 1979 की क्रांति के बाद सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है. सरकार ने इसे दबाने के लिए 8 जनवरी 2026 को इंटरनेट और फोन सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी थीं. अमेरिका ने इन प्रदर्शनों का समर्थन किया है, जबकि ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल देश में अस्थिरता फैला रहे हैं.
परमाणु बम बना तो क्या होगा? एक्सपर्ट्स की चेतावनी
काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो यह इजरायल और अमेरिका के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा.
आक्रामक विदेश नीति: डर है कि परमाणु ताकत बनने के बाद ईरान रूस और चीन के साथ मिलकर और ज्यादा आक्रामक हो जाएगा. हाल ही में ईरान ने यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को ड्रोन और मिसाइलें भी दी हैं.
हथियारों की होड़: सऊदी अरब जैसे पड़ोसी देश भी परमाणु हथियार बनाने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में खतरनाक स्थिति पैदा हो जाएगी.
समझौते की राह में रोड़े: CFR के अध्यक्ष माइकल फ्रोमैन के अनुसार, ट्रंप का पिछला रिकॉर्ड (समझौते रद्द करना) बातचीत को मुश्किल बना रहा है. ट्रंप अब ईरान के पूरे परमाणु प्रोग्राम को खत्म करने के बजाय सिर्फ परमाणु हथियार नहीं की बात कर रहे हैं, लेकिन सैन्य हमले की धमकी अभी भी बरकरार है.
कहां छिपे हैं ईरान के परमाणु ठिकाने?
यूएन (IAEA) के मुताबिक, ईरान के पास 4-5 मुख्य परमाणु साइट्स हैं:
- नतांज (Natanz): यहां यूरेनियम को समृद्ध (Enrichment) किया जाता है.
- फोर्डो (Fordow): यह पहाड़ों के अंदर बना एक सुरक्षित प्लांट है.
- इस्फहान (Isfahan): यहां परमाणु ईंधन तैयार करने का काम होता है.
- अराक (Arak): यहां भारी पानी का प्लांट और रिएक्टर है.
- बुशहर (Bushehr): यह बिजली बनाने वाला मुख्य प्लांट है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने 2025 में नतांज, फोर्डो और इस्फहान पर बमबारी की थी, जिससे प्रोग्राम कुछ महीने पीछे तो गया, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. रिसर्च बताती है कि ईरान के पास अब भी लगभग 408 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम बचा है.
सुरक्षा के लिए ‘मिट्टी का कवच’ और सुरंगें
ईरान अपने ठिकानों को बचाने के लिए नए तरीके अपना रहा है. एक्सपर्ट डेविड अलब्राइट के अनुसार, परचिन सैन्य परिसर में एक खास ढांचा बनाया गया है जिसे मिट्टी से ढक दिया गया है ताकि वह हवाई हमलों में नजर न आए. वहीं, ISIS (Institute for Science and International Security) का कहना है कि इस्फहान में सुरंगों को मिट्टी से भर दिया गया है ताकि कोई जमीनी हमला कर यूरेनियम न छीन सके. नतांज में भी पहाड़ों के नीचे की सुरंगों को और मजबूत किया जा रहा है.
समुद्र में अमेरिका की ताकत और ईरान की धमकी
अमेरिका ने दबाव बनाने के लिए मिडिल ईस्ट में अपने दो सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है और USS Abraham Lincoln पहले से ही तैनात है. इसके साथ ही 50 से ज्यादा फाइटर जेट्स भी तैयार हैं.
दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके हथियार अमेरिकी युद्धपोतों को समुद्र की गहराई में भेजने की ताकत रखते हैं. इसी तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को कुछ घंटों के लिए बंद कर अपनी ताकत का अहसास भी कराया.
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