China Nuclear Test: अमेरिका और चीन के बीच एक बार फिर ठन गई है. अमेरिका ने कुछ नए सबूत पेश करते हुए दावा किया है कि चीन ने 2020 में छिपकर परमाणु परीक्षण (न्यूक्लियर टेस्ट) किया था. अमेरिका के मुताबिक, चीन ने लोप नुर (Lop Nur) नाम की जगह पर जमीन के नीचे यह ‘गैर-कानूनी’ टेस्टिंग की थी. अब मामला इतना बढ़ गया है कि अमेरिका ने भी ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए फिर से न्यूक्लियर टेस्ट शुरू करने के संकेत दे दिए हैं.
कजाकिस्तान के सिग्नल से पकड़ी गई चोरी
अमेरिकी विदेश विभाग के सीनियर अधिकारी क्रिस्टोफर येव के अनुसार, 22 जून 2020 को कजाकिस्तान के एक मॉनिटरिंग स्टेशन ने रिक्टर स्केल पर 2.75 तीव्रता का एक झटका महसूस किया था. जांच में पता चला कि इस झटके का असली केंद्र वहां से 450 मील दूर चीन का परमाणु परीक्षण केंद्र ‘लोप नुर’ था. हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में येव ने कहा कि यह कोई भूकंप नहीं बल्कि एक जोरदार धमाका था, जो बिल्कुल परमाणु टेस्ट जैसा ही है.
अमेरिका की दो टूक: हम पीछे नहीं रहेंगे
अमेरिका के ‘आर्म्स कंट्रोल’ विभाग के थॉमस डिनैनो ने सोशल मीडिया (एक्स) पर कहा कि चीन का बार-बार मना करना मामले को और बिगाड़ रहा है. उन्होंने साफ किया कि अगर दूसरे देश परमाणु टेस्ट करेंगे, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. वहीं, क्रिस्टोफर येव ने ट्रंप प्रशासन का हवाला देते हुए कहा कि अगर दुश्मन देश टेस्टिंग करेंगे और अमेरिका नहीं, तो इससे हमें भारी नुकसान होगा. इसलिए अब अमेरिका भी बराबरी का मुकाबला करने के लिए तैयार है.
चीन ने कहा- सब झूठ है
चीन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. बीजिंग का कहना है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरा पालन किया है और अमेरिका के ये आरोप ‘सफेद झूठ’ हैं. चीन के मुताबिक, अमेरिका खुद दोबारा परमाणु परीक्षण शुरू करना चाहता है, इसलिए वह चीन पर ऐसे इल्जाम लगा रहा है ताकि उसे एक बहाना मिल जाए.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और सैटेलाइट?
इस पूरे विवाद पर CTBTO (परमाणु परीक्षण पर नजर रखने वाली संस्था) का कहना है कि उस दिन दो छोटे झटके जरूर महसूस हुए थे, लेकिन डेटा इतना कमजोर है कि दावे के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता. वहीं, वाशिंगटन के थिंक टैंक CSIS ने सैटेलाइट तस्वीरों की जांच के बाद कहा कि फोटो देखकर यह तय करना मुश्किल है कि वहां टेस्ट हुआ था या नहीं.
बढ़ सकता है परमाणु युद्ध का खतरा
‘आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन’ के डायरेक्टर डेरिल किमबॉल ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने दोबारा टेस्टिंग शुरू की, तो दुनिया के बाकी परमाणु संपन्न देशों में भी होड़ मच जाएगी. किमबॉल का मानना है कि रूस और चीन के साथ बातचीत करके इस तनाव को कम करना चाहिए. हाल ही में रूस के साथ परमाणु हथियारों को कम करने वाली ‘न्यू स्टार्ट’ (New START) संधि भी 5 फरवरी को खत्म हो चुकी है और ट्रंप प्रशासन इसमें चीन को भी शामिल करने की जिद पर अड़ा है.
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