इजराइल की हिरासत में ग्रेटा थनबर्ग समेत कई कार्यकर्ता, गाजा से 75 मील दूर सुमुद फ्लोटिला के जहाजों को रोका

Israel Gaza Conflict: इजराइली नौसेना ने गाजा में सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रही पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग समेत कई एक्टिविस्टों को हिरासत में लिया है. ये सभी सुमुद फ्लोटिला पर सवार थे. इसमें नेल्सन मंडेला के नाती मंडल मंडेला भी थे.

Israel Gaza Conflict: इजराइल ने गाजा की सीमा घुस रहे जहाज सुमुद फ्लोटिला को रोक दिया है. यह गाजा पर इजराइल की सीज को तोड़ने का प्रयास कर रहा था. इसमें सवार लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. इसमें स्वीडन की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग, नेल्सन मंडेला के नाती मंडला मंडेला और यूरोप के तमाम राजनेता भी सवार थे. इजराइली नौसेना ने इन सभी को उस समय गिरफ्तार किया, जब वे गाजा के तट से लगभग 75 मील दूर फिलीस्तीन समर्थक बेड़े पर सवार हो रही थीं. ये सभी युद्धग्रस्त क्षेत्र की नाकाबंदी को तोड़कर सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे.

इजराइल के विदेश मंत्रालय की ओर से इस गिरफ्तारी पर बयान भी आ गया है. मंत्रालय ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए बताया कि कई जहाजों को रोक लिया गया है और उनमें सवार लोगों को इजराइल के बंदरगाह पर ले जाया जा रहा है. विदेश मंत्रालय से इस बयान के साथ एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है, जिसमें थनबर्ग दिखाई दे रही हैं. बयान में यह कहा गया कि ग्रेटा और बाकी कार्यकर्ता सुरक्षित हैं. हालांकि यह समुद्री बेड़ा आतंकी संगठन हमास से जुड़ा है, इसकी पुष्टि इजराइल ने नहीं की है. 

इन कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी के बाद इजराइल की इस कार्रवाई को अवैध बताया है. उन्होंने दुनिया से इस एक्शन के खिलाफ लोगों से आवाज उठाने की अपील की है. उनका कहना है कि वे हथियार नहीं बल्कि लोगों के लिए राहत की सामग्री ले जा रहे थे. गाजा के लोगों को इसकी जरूरत है. थनबर्ग अल्मा नामक फ्लोटिला में थीं, जब उन्हें अशदोद बंदरगाह से गिरफ्तार किया गया. इसके साथ ही इजराइल ने अल्मा समेत सिरस, स्पेक्ट्रा, होगा, अदारा और डेर यासीन जहाज पर भी नियंत्रण कर लिया है. ये सभी फिलिस्तीन तट की ओर जा रहे थे.

इजराइली सेना ने की कार्रवाई

आपको बता दें कि इस ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला में 40 से ज्यादा नावें हैं, जिन पर ग्रेटा थनबर्ग समेत 500 सांसद, वकील और कार्यकर्ता सवार हैं. गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार ये नावें इजिप्ट (मिस्र) के  जल क्षेत्र में चल रही थीं, तभी से इजराइल ने इस पर नजर रखना शुरू कर दिया था. जब इन नावों ने हाई रिस्क जोन में प्रवेश किया, तब इजराइल को कार्रवाई करनी पड़ी. रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 20 इजराइली सैनिक इन पर चढ़े और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया. उन्होंने इंजन को बंद करने का आदेश दिया. फ्लोटिला से मिले फुटेज में यात्री गोल आकार में बैठे थे. इसके बाद लाइव प्रसारण बंद हो गया. 

इटली में विरोध प्रदर्शन शुरू

इजराइल ने इस बेड़े से केवल 6 नावों को रोका है, बाकी नावें संभवतः आगे बढ़ रही हैं. इजराइली नौसेना उन्हें पानी की बौछारों से रोकने का प्रयास कर रही है. इटली की न्यूज संस्था स्काई इटालिया ने कुछ फुटेज जारी किए हैं, जिनमें डेक पर खड़े कार्यकर्ताओं पर पानी की तेज धार से हमला होते दिखाया गया है. इटली ने इजराइल रक्षा बल (आईडीएफ) के खिलाफ कार्यकर्ताओं पर हमला करने के लिए विरोध भी किया है. इसके विरोध में इटली में कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं. इटली के विदेश मंत्री ने बताया कि उनके समकक्ष इजराइली विदेश मंत्री ने किसी भी हिंसा का उपयोग नहीं किया  जाएगा. 

फ्लोटिला क्या है? 

फ्रीडम फ्लोटिला II को गाजा फ्रीडम फ्लोटिला के नए वर्जन के रूप में लांच किया गया था. 2011 में इसे शुरू किया गया था. इसका मकसद इजराइल की नाकाबंदी को तोड़ना है. यह अंतर्राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं और एनजीओ के गठबंधन से चलता है. 2010 से यह काम कर रहा है, लेकिन आज तक कोई भी फ्लोटिला गाजा तक नहीं पहुंच पाया है. इस नए फ्लोटिला को भी कामयाबी नहीं मिली है. 

ये भी पढ़ें:-

अगर न्यूयॉर्क और न्यूजीलैंड नए हैं, तो पुराना यॉर्क और जीलैंड कहां है?

यूक्रेन को यह घातक मिसाइल देने की तैयारी में अमेरिका, रूस ने दी गंभीर नतीजे की चेतावनी

अमेरिकी शिक्षा विभाग में कामकाज हो जाएगा ठप, शटडाउन के बाद ट्रंप सरकार रोक देगी फंडिंग

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >