ट्रंप की भारत नीतियां भारतीय-अमेरिकियों को नामंजूर, समर्थन में भारी गिरावट; सर्वे का दावा- गुस्सा, चिंता और डर बढ़ा

Donald Trump’s India Policy: भारत को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से इंडियन अमेरिकी लोगों की नारजगी बढ़ रही है. एक सर्वे का दावा है कि 55% लोगों ने पॉलिसीज से असहमति जताई है. सर्वे के अनुसार लोगों को व्यक्तिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है. इससे लोगों में गुस्सा, चिंता और डर बढ़ रहा है.

Donald Trump’s India Policy: अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत के प्रति नीतियों को लेकर इंडियन अमेरिकन लोगों में असहमति बढ़ती जा रही है. कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस द्वारा जारी 2026 इंडियन अमेरिकन एटिट्यूड्स सर्वे में यह सामने आया है. भारतीय अमेरिकी समुदाय ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में खास तौर पर भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को संभालने के उनके तरीके को लेकर गहरी असंतुष्टि महसूस कर रहा है. यह सर्वे Carnegie Endowment for International Peace ने YouGov के सहयोग से किया. इसमें 25 नवंबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच 1,000 भारतीय अमेरिकी वयस्कों से राय ली गई. 

सर्वे के अनुसार, केवल 20 प्रतिशत लोगों ने भारत को लेकर ट्रंप के दृष्टिकोण को मंजूरी दी. यह आंकड़ा 2020 में उनके पहले कार्यकाल के दौरान 35 प्रतिशत था, जबकि 2024 के अंत में जो बाइडेन की भारत नीति को 48 प्रतिशत समर्थन मिला था. ट्रंप की  नीतियों के प्रति यह गिरावट बाइडेन की तुलना में और भी स्पष्ट है. अब बहुमत यानी 55 प्रतिशत उत्तरदाता ट्रंप की भारत नीति से असहमत हैं. 

क्यों घटा समर्थन?

इस सर्वे में उत्तर देने वालों ने व्यापार, टेक्नॉलॉजी ट्रांसफर और रणनीतिक सहयोग में आए संकटों का हवाला दिया है. इसकी वजह से क्वॉड गठबंधन और इंडो-पैसेफिक के लक्ष्यों पर दबाव पड़ा है. हर चार में से एक भारतीय अमेरिकी (25 प्रतिशत) ने इस पर कोई राय नहीं दी.

कैसे घटा समर्थन आंकड़ों में समझें

सर्वे के मिलन वैष्णव, सुमित्रा बद्रीनाथन, देवेश कपूर और एंडी रोबाइना ने पेश किया है. अमेरिका में 46% भारतीय डेमोक्रेट हैं, जबकि 19% रिपब्लिकन हैं. सर्वे के अनुसार, डेमोक्रेटिक झुकाव वाले भारतीय अमेरिकी में से 70 प्रतिशत ट्रंप की भारत नीति से असहमत हैं. वहीं रिपब्लिकन पहचान रखने वाले उत्तरदाता अपेक्षाकृत अधिक समर्थक हैं, इनमें से 50 प्रतिशत ने मंजूरी दी. 

यह विभाजन समुदाय के भीतर व्यापक बदलावों को दर्शाता है. 2020 में 52 प्रतिशत रहे डेमोक्रेटिक समर्थन में नरमी आई है. वहीं 2020 में 15% रहे रिपब्लिकन अब 19% हैं, जबकि स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) मतदाताओं की हिस्सेदारी बढ़कर 29 प्रतिशत हो गई है. यह सर्वे इस ओर इशारा कर रहा है कि निराश मतदाता अब इंडिपेंडेंट को समेट रही है, न कि रिपब्लिकन आधार को मजबूत कर रही है.

डेमोक्रेट्स की ओर लौट रहे भारतीय

2024 के बाद के जनसांख्यिकीय रुझान भारत से रिश्तों में बदलते दृष्टिकोण दिखाते हैं. युवा भारतीय अमेरिकी (18–29 वर्ष) 2024 के चुनाव में युवा पुरुषों के बीच डोनाल्ड ट्रंप-समर्थक झुकाव के बाद फिर से डेमोक्रेट्स की ओर लौटे हैं. इससे सर्वे का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका-भारत संबंधों में नए सिरे से जुड़ाव को लेकर इंडियन अमेरिकन को डेमोक्रेटिक नीतियों से ज्यादा उम्मीद है. हाल के वर्षों में आए प्रवासी या पिछले दो दशकों में अमेरिका में जन्मे भारतीय अमेरिकियों में डेमोक्रेटिक झुकाव थोड़ा बढ़ा है, जबकि लंबे समय से बसे परिवार उससे दूर जाते दिख रहे हैं, जिनकी अमेरिकी जड़ें गहरी हैं.

रिपब्लिन नीति के प्रति धार्मिक आधार पर हिंदू समर्थन घटा, ईसायों का रुझान बढ़ा

धार्मिक आधार पर, सबसे बड़ा समूह हिंदुओं का है. वह मजबूती से डेमोक्रेटिक बने हुए हैं, जबकि भारतीय अमेरिकी ईसाइयों का रुझान रिपब्लिकन की ओर तेजी से बढ़ा है. सर्वे के अनुसार, यह बदलाव भारत के आईटी सेक्टर के लिए अहम H-1B वीजा जैसे मुद्दों पर पैरवी को प्रभावित कर सकता है.

नस्लवाद की वजह से व्यक्तिगत उत्पीड़न/भेदभाव का सामना

इसके अलावा, भारतीय अमेरिकियों ने व्यापक पक्षपात की धारणा, ऑनलाइन नस्लवाद से बार-बार सामना और व्यक्तिगत उत्पीड़न/भेदभाव के अनुभवों की जानकारी दी. हालांकि, 2020 के बाद से सीधे, व्यक्तिगत भेदभाव का अनुभव बताने वालों के अनुपात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है.

आधे उत्तरदाताओं ने 2025 की शुरुआत से व्यक्तिगत भेदभाव की सूचना दी (जो 2020 के स्तर के समान है). यह भेदभाव अक्सर त्वचा के रंग (36 प्रतिशत), मूल देश (21 प्रतिशत) या धर्म (17 प्रतिशत) के आधार पर बताया गया. हर चार में से एक को अपमानजनक शब्द (स्लर) कहे जाने का अनुभव हुआ. ऑनलाइन एंटी-इंडियन नस्लवाद में तेजी आई है.

48 प्रतिशत ने सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेंट से बार-बार सामना होने की बात कही, जिससे गुस्सा (50 प्रतिशत), चिंता (33 प्रतिशत) और डर (31 प्रतिशत) बढ़ा है. कई लोग इससे निपटने के लिए ऑनलाइन राजनीतिक चर्चाओं से दूरी (31 प्रतिशत), राजनीतिक संकेत/चिन्ह दिखाने से परहेज (21 प्रतिशत) या भारतीय परिधान पहनने से बचने (19 प्रतिशत) जैसे तरीके अपना रहे हैं.

ट्रंप की नीति द्विपक्षीय रिश्तों में को कमजोर कर सकती हैं

कुल मिलाकर, ये निष्कर्ष ऐसे प्रवासी समुदाय की तस्वीर पेश करते हैं, जो अमेरिका की घरेलू उथल-पुथल और भारत के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच संतुलन साध रहा है. इसमें विदेश नीति सक्रियता की तुलना में आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है. रिपोर्ट चेतावनी देती है कि मौजूदा अमेरिकी नीतियां द्विपक्षीय रिश्तों में दशकों की प्रगति को कमजोर कर सकती हैं.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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