'इस्लामाबाद या भारत नहीं है', अमेरिका में 90 फुट की हनुमान मूर्ति देख भड़का एक्टिविस्ट

Hanuman Statue Texas Controversy: अमेरिका के टेक्सास में बनी 90 फुट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा पर विवाद छिड़ गया है. रिपब्लिकन एक्टिविस्ट कार्लोस टर्सियोस ने इसे 'विदेशी घुसपैठ' बताकर सोशल मीडिया पर तीखा हमला किया. भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने इसे धार्मिक आजादी और आस्था का प्रतीक बताकर करारा जवाब दिया है.

Hanuman Statue Texas Controversy: अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता कार्लोस टर्सियोस ने इस प्रतिमा का वीडियो शेयर करते हुए इसे ‘विदेशी घुसपैठ’ करार दिया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्यों सोशल मीडिया पर लोग भिड़ गए हैं.

‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ को लेकर एक्टिविस्ट को हुई दिक्कत

टेक्सास के शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में अगस्त 2024 में भगवान हनुमान की एक विशाल प्रतिमा का अनावरण किया गया था. ‘पंचलोह अभय हनुमान’ नाम की यह प्रतिमा 90 फुट ऊंची है और इसे उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा माना जाता है. इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ का नाम दिया गया है.

हाल ही में, MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) मूवमेंट से जुड़े लातिनी रूढ़िवादी कार्यकर्ता कार्लोस टर्सियोस ने इसका एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा कि यह इस्लामाबाद या नई दिल्ली नहीं, बल्कि शुगर लैंड, टेक्सास है. थर्ड वर्ल्ड के एलियंस (विदेशी) धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं. अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति यह क्यों है? इस घुसपैठ को रोकें!

मंदिर प्रशासन और समर्थकों का करारा जवाब

टर्सियोस के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. मंदिर से जुड़े लोगों और समर्थकों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उनके अनुसार:

  • यह मूर्ति हिंदू-अमेरिकियों की धार्मिक पहचान का प्रतीक है.
  • पूरा मंदिर परिसर निजी दान (प्राइवेट डोनेशन) से बनाया गया है.
  • यह किसी राजनीतिक संदेश के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक बहुलवाद (रिलीजियस प्लूरेलिज्म) का उदाहरण है.
  • समर्थकों ने तर्क दिया कि जैसे अमेरिका में चर्च के ऊंचे शिखर या बड़ी क्रॉस की मूर्तियां होती हैं, वैसे ही यह भी आस्था का प्रतीक है.

इंडियंस और मुस्लिमों को पहले भी बना चुके हैं निशाना

यह पहली बार नहीं है जब टर्सियोस ने प्रवासियों के खिलाफ जहर उगला हो. रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पहले भी भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स (H-1B वीजा धारक) और मुस्लिम समुदाय की आलोचना कर चुके हैं.

  • H-1B वीजा पर टिप्पणी: उन्होंने एक बार लिखा था कि फ्रिस्को के निवासी भारतीय कामगारों के आने से परेशान हैं क्योंकि अमेरिकियों को नौकरियां और घर नहीं मिल रहे.
  • इस्लाम को लेकर दावा: उन्होंने ह्यूस्टन का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां ‘शरिया कानून’ का प्रभाव बढ़ रहा है और इसे भी उन्होंने ‘घुसपैठ’ (Invasion) का नाम दिया था.

टेक्सास में भारतीयों का योगदान

अगर आंकड़ों की बात करें, तो टेक्सास में भारतीय समुदाय का बड़ा प्रभाव है.

  • आबादी: टेक्सास में एशियाई मूल के करीब 22 लाख लोग रहते हैं (2025 के अनुमानित डेटा के अनुसार), जिनमें भारतीयों की संख्या काफी ज्यादा है.
  • H-1B वीजा: टेक्सास में 40,000 से ज्यादा लोग H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं. कॉग्निजेंट और इंफोसिस जैसी कंपनियां यहां बड़ी संख्या में रोजगार देती हैं.
  • इकोनॉमी: भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका की अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले और शिक्षित समूहों में से एक माना जाता है.

कौन हैं कार्लोस टर्सियोस?

कार्लोस टर्सियोस उत्तरी टेक्सास के एक लातिनी रूढ़िवादी कार्यकर्ता हैं. उनकी बायोग्राफी के अनुसार, उन्होंने ‘क्रिटिकल रेस थ्योरी’ के खिलाफ अभियान चलाकर और पुलिस के समर्थन में रैलियां निकालकर पहचान बनाई है. वह डोनाल्ड ट्रम्प और टेड क्रूज जैसे रिपब्लिकन नेताओं के बड़े समर्थक माने जाते हैं.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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