कौन हैं फेई फेई ली? जिन्हें कहा जाता है AI की गॉडमदर, टाइम मैग्जीन की पर्सन ऑफ द इयर में से एक बनीं

Fei Fei Li God Mother of AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में डॉ. फेई-फेई ली को AI की गॉडमदर का दर्जा मिला है. फेई-फेई ली उन चंद वैज्ञानिकों में हैं, जिन्होंने इस तकनीक को सिर्फ शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित बनाने की बात सबसे पहले और सबसे जोरदार ढंग से कही. उन्हें टाइम मैग्जीन के पर्सन ऑफ द इयर 2025 के आठ प्रभावशाली लोगों में से एक के रूप में चुना गया है.

Fei Fei Li God Mother of AI: लोकप्रिय टीवी सीरीज गेम ऑफ थ्रोन्स में ‘मदर ऑफ ड्रैगन्स’ का किरदार ताकत, भविष्य और बदलाव का प्रतीक था. कुछ वैसा ही प्रतीकात्मक दर्जा आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में डॉ. फेई-फेई ली को मिला है. उन्हें यूं ही ‘AI की गॉडमदर’ नहीं कहा जाता. जिस तरह ड्रैगन नई दुनिया की दिशा तय करते हैं, उसी तरह फेई-फेई ली ने मशीनों को देखना, समझना और सीखना सिखाकर आधुनिक AI की नींव रखी. आज जब AI हर क्षेत्र- स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, मीडिया और रक्षा में गहराई से प्रवेश कर चुका है, फेई-फेई ली उन चंद वैज्ञानिकों में हैं, जिन्होंने इस तकनीक को सिर्फ शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित बनाने की बात सबसे पहले और सबसे जोरदार ढंग से कही.

टाइम मैगजीन का फैसला: व्यक्ति नहीं, “AI के वास्तुकार”

साल 2025 में टाइम मैगजीन ने परंपरा से हटकर एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक समूह को ‘Person of the Year’ घोषित किया. इस समूह को नाम दिया गया, “The Architects of Artificial Intelligence”. मैगजीन के मुताबिक, 2025 में दुनिया पर सबसे गहरा असर उन्हीं लोगों का रहा, जिन्होंने AI की कल्पना की, उसे डिजाइन किया और उसे तेजी से दुनिया में उतार दिया.

इन आठ प्रभावशाली नामों में शामिल हैं-  एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग, मेटा के प्रमुख मार्क ज़ुकरबर्ग, टेस्ला और X के मालिक एलन मस्क, ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, गूगल डीपमाइंड के प्रमुख सर डेमिस हैसबिस, एएमडी की सीईओ लिसा सू, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई, और AI की गॉडमदर फेई-फेई ली.

टाइम ने लिखा कि अब AI को लेकर बहस जिम्मेदारी से ज्यादा तेजी से तैनाती पर आ गई है. दुनिया मानो ऑल गैस, नो ब्रेक की रफ्तार से एक अत्यधिक स्वचालित भविष्य की ओर बढ़ रही है. ऐसे में इन वास्तुकारों की भूमिका ऐतिहासिक हो जाती है.

टाइम पर्सन ऑफ द इयर 2025 में सबसे किनारे बैठीं फेई फेई ली. फोटो- एक्स.

फेई-फेई ली: संघर्ष से शिखर तक

डॉ. फेई-फेई ली का जन्म 1976 में बीजिंग, चीन में हुआ. महज़ 15 साल की उम्र में वे अपने परिवार के साथ अमेरिका पहुंचीं. शुरुआती दिन आसान नहीं थे. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, इसलिए उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ सात साल तक एक ड्राई-क्लीनिंग दुकान में काम किया. यही अनुभव उनके भीतर मेहनत, जिज्ञासा और जमीन से जुड़ा नजरिया लेकर आया. उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया और फिर कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी हासिल की. आगे चलकर वे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर बनीं और 2013 से 2018 तक स्टैनफोर्ड AI लैब की डायरेक्टर रहीं.

ImageNet: जिसने AI को आंखें दीं

फेई-फेई ली को वैश्विक पहचान उनके ImageNet प्रोजेक्ट से मिली, जिसकी शुरुआत उन्होंने 2006 में की थी. यह लाखों तस्वीरों का विशाल डेटासेट था, जिन्हें व्यवस्थित और वर्गीकृत किया गया. आज भले ही AI मॉडल, चिप्स और एल्गोरिदम की बात होती हो, लेकिन फेई-फेई ली का मानना है कि डेटा ही असली ईंधन है. 2012 में ImageNet Challenge के बाद डीप लर्निंग में जो विस्फोट हुआ, वही आधुनिक AI क्रांति की असली शुरुआत माना जाता है. मशीनें पहली बार इंसानों की तरह तस्वीरों को पहचानने और समझने लगीं. इसी वजह से ImageNet को आधुनिक AI की जन्मकुंडली भी कहा जाता है.

गूगल से वर्ल्ड लैब्स तक

2017–2018 के दौरान फेई-फेई ली Google Cloud में Vice President और Chief Scientist (AI/ML) रहीं. वहां उन्होंने बड़े पैमाने पर AI सिस्टम्स को व्यावहारिक और जिम्मेदार बनाने पर काम किया. इसके बाद उन्होंने एक नया अध्याय शुरू किया. वे World Labs की को-फाउंडर और CEO बनीं, एक ऐसा AI स्टार्टअप, जो महज एक साल पुराना है, लेकिन जिसकी वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर (करीब 90 अरब रुपये) से ज्यादा पहुंच चुकी है.

फेई फेई ली.

वर्ल्ड मॉडल और AI का भविष्य

World Labs में फेई-फेई ली जिस तकनीक पर काम कर रही हैं, उसे कहा जाता है World Model. इसका उद्देश्य AI को केवल टेक्स्ट या तस्वीरें समझने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे 3D दुनिया को समझने और उससे इंटरैक्ट करने में सक्षम बनाना है. कंपनी का पहला प्रोडक्ट Marble टेक्स्ट, फोटो या वीडियो को एक एडिटेबल 3D वातावरण में बदल देता है. फेई-फेई ली का मानना है कि यही अगला बड़ा AI अध्याय है, जो रोबोटिक्स, डिजाइन, हेल्थकेयर और वैज्ञानिक रिसर्च में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा.

मानव-केंद्रित AI की आवाज

फेई-फेई ली सिर्फ टेक्नोलॉजिस्ट नहीं, बल्कि AI की नैतिक दिशा तय करने वाली प्रमुख आवाज़ भी हैं. उन्होंने स्टैनफोर्ड के Human-Centered AI Institute (HAI) की सह-स्थापना की. वे अमेरिकी सीनेट, संयुक्त राष्ट्र और नीति-निर्माताओं के साथ AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर काम कर चुकी हैं. आज जब दुनिया AI के भविष्य को लेकर उत्साह और चिंता दोनों से भरी है, वहां फेई-फेई ली उस पुल की तरह हैं, जो तकनीक और मानवता को जोड़ता है. शायद इसी वजह से, AI की इस नई दुनिया में उन्हें सही मायनों में ‘गॉडमदर’ कहा जाता है.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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