Cyclone Ditwah: चक्रवात दितवाह ने श्रीलंका में मचाई तबाही, 200 से अधिक की मौत, 218 लापता, भारत की मदद से राहत-बचाव कार्य जारी

Cyclone Ditwah: चक्रवात दितवाह की भारत में एंट्री हो चुकी है और अपना भयावह रूप भी दिखाना शुरू कर दिया है. समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठ रही हैं, भारी बारिश के साथ तेज हवाएं भी चल रही हैं. तमिलनाडु में 3 लोगों की मौत भी हो चुकी है. दितवाह ने श्रीलंका में भारी तबाही मचाई है. अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 218 लोग लापता हैं.

Cyclone Ditwah: श्रीलंका ने चक्रवात दितवाह के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही मची है. 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. आपदा में भारत ने पड़ोसी धर्म का पालन किया और एनडीआरएफ की टीम को राहत और बचाव कार्य में लगा दिया है. श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार से अब तक 212 लोगों की मौत हो चुकी है और 218 लोग लापता हैं. डीएमसी ने बताया कि 998918 लोग प्रभावित हुए हैं.

चक्रवात के कारण श्रीलंका में बाढ़ और भूस्खलन

चक्रवात दितवाह के कारण श्रीलंका बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है. भूस्खलन की वजह से कई सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं. चक्रवात की श्रीलंका से विदाई हो गई है, लेकिन बाढ़ की स्थिति अब भी बनी हुई है. कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन विनाश का असली रूप दिखने लगा है.

NDRF और भारतीय सेना राहत-बचाव कार्य में जुटे

भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और भारतीय वायुसेना के कर्मी लोगों की जान बचाने में श्रीलंकाई अधिकारियों की सहायता के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा- एनडीआरएफ के कर्मी श्रीलंका में स्थानीय अधिकारियों के साथ करीबी समन्वय के तहत राहत अभियान जारी रखे हुए हैं. भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत एनडीआरएफ के 80 कर्मियों के दो तलाश एवं बचाव दलों को श्रीलंका भेजा है.

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने आपातकाल की घोषणा की और अंतरराष्ट्रीय मदद की लगाई गुहार

चक्रवात के कारण भारी तबाही को देखते हुए श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने आपातकाल की घोषणा की थी. साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार भी लगाई थी.

2017 के बाद श्रीलंका की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा

2017 के बाद श्रीलंका में यह सबसे बड़ा प्राकृतिक आपदा है. जिसमें 200 से अधिक लोग मारे गए थे. हालांकि 2003 में भीषण बाढ़ आई थी, जिसमें 254 लोगों की मौत हो गई थी.

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

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पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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