Epic Fury: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केंटकी की एक रैली में खुलासा किया कि ईरान पर हुए हालिया हमले का नाम ‘एपिक फ्यूरी’ कैसे पड़ा. ट्रंप के अनुसार, मिलिट्री अफसरों ने उन्हें करीब 20 नामों की लिस्ट दी थी, जिन्हें पढ़कर उन्हें नींद आ रही थी. ट्रंप ने कहा कि मुझे उनमें से एक भी नाम पसंद नहीं आया, फिर मैंने ‘एपिक फ्यूरी’ देखा और तुरंत उसे फाइनल कर दिया.
ईरान में घुसकर किया अटैक
ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को एक ‘एक्सकर्शन’ (छोटा दौरा) बताया. उन्होंने कहा कि 47 साल से अमेरिका के लोगों को निशाना बनाने वाले ‘बुरे लोगों’ को खत्म करने के लिए यह जरूरी था. ट्रंप के मुताबिक, पिछले 11 दिनों के भीतर अमेरिकी सेना ने ईरान के डिफेंस सिस्टम को लगभग पूरी तरह तबाह कर दिया है. उन्होंने दावा किया कि ईरान की एयरफोर्स 3 घंटे में खत्म हो गई और उनके रडार व एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम अब काम नहीं कर रहे हैं.
नेमप्लेट से लेकर परमाणु ठिकाने तक, क्या-क्या हुआ तबाह?
इस ऑपरेशन में हुए नुकसान का डेटा देते हुए ट्रम्प ने बताया कि ईरान की मिसाइलें 90% और ड्रोन 85% तक कम हो चुके हैं. अमेरिकी सेना उन फैक्ट्रियों को उड़ा रही है जहां ये बनाए जाते हैं. इसके अलावा, समुद्र में ईरान के 58 नौसैनिक जहाजों और माइन बिछाने वाली नावों को भी नष्ट कर दिया गया है. ट्रंप ने पुरानी याद दिलाते हुए कहा कि पहले ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ से ईरान की न्यूक्लियर पावर खत्म की गई थी, लेकिन उन्होंने फिर से सिर उठाया, इसलिए अब इसे पूरी तरह खत्म करना जरूरी है.
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इजराइल के साथ मिलकर तेहरान पर हमला किया
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़े हमले किए. अमेरिका ने इसे ‘एपिक फ्यूरी’ तो इजराइल ने ‘लायंस रोर’ (शेर की दहाड़) कोडनेम दिया. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस और राष्ट्रपति भवन को निशाना बनाया गया. इस स्ट्राइक में खामेनेई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की भी जान चली गई है.
मिसाइल वॉर और पेट्रोल की कीमतों को कंट्रोल करने का प्लान
ईरान ने भी पलटवार करते हुए कतर, कुवैत, बहरीन, यूएई, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों की ओर मिसाइलें दागीं, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं. इस बीच, ट्रंप ने बताया कि युद्ध के दौरान पेट्रोल-डीजल के दाम न बढ़ें, इसके लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) दुनिया भर के रिजर्व से 40 करोड़ बैरल तेल रिलीज करने पर सहमत हो गई है. ट्रंप का कहना है कि वे नहीं चाहते कि हर दो साल में उन्हें वापस ईरान जाना पड़े, इसलिए इस बार काम पूरा करके ही दम लेंगे.
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